प्रकाश मेहरा
एक्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: अमरनाथ यात्रा 2025 की सुरक्षा के लिए व्यापक और अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं, खासकर पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद। इस बार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 180 कंपनियों की तैनाती की गई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में 30 कंपनियां अधिक हैं। प्रत्येक कंपनी में लगभग 70-80 जवान शामिल होते हैं, जिससे कुल मिलाकर लगभग 12,600 से 14,400 सुरक्षाकर्मी तैनात होंगे। यह जानकारी जम्मू क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) भीम सेन टूटी ने दी है।
क्या हैं मुख्य सुरक्षा उपाय !
180 कंपनियां जम्मू-कश्मीर में तैनात की गई हैं, जो यात्रा मार्गों, आधार शिविरों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी। सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, और एसएसबी के जवान शामिल हैं। सीआरपीएफ मार्ग सुरक्षा, शिविर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन में मुख्य भूमिका निभाएगी, जबकि बीएसएफ और आईटीबीपी उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों और कमजोर इलाकों को सुरक्षित करेंगे।
हाई-टेक सुरक्षा उपाय
यात्रा मार्ग को 1 जुलाई से 10 अगस्त तक नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है, जिससे अनधिकृत ड्रोन उड़ानों पर रोक रहेगी। केवल सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी के लिए ड्रोन इस्तेमाल की अनुमति होगी। रेडियो फ्रीक्वेंसी जैमर और सैकड़ों सुरक्षा ड्रोन तैनात किए गए हैं ताकि आतंकी ड्रोन हमलों का मुकाबला किया जा सके। 700 से अधिक हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर के साथ लगाए गए हैं।
डिजिटल पहचान पत्र यात्रियों और पोनी राइडर्स के लिए अनिवार्य किए गए हैं। ड्रोन, नाइट-विजन उपकरण, बम निरोधक दस्ते (बीडीएस), त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी), और के9 यूनिट (खोजी कुत्ते) निगरानी और सुरक्षा के लिए तैनात हैं।
मार्ग और शिविरों की सुरक्षा
पहलगाम (48 किमी) और बालटाल (14 किमी)। दोनों मार्गों की डिजिटल मैपिंग की गई है, और नेशनल हाईवे के सभी अप्रोच रूट यात्रा के दौरान ब्लॉक किए जाएंगे। नुनवान बेस कैंप (पहलगाम) में अस्थायी टेंटों की जगह मजबूत संरचनाएं बनाई गई हैं।
जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास, पंथा चौक, और बालटाल में बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र स्थापित किया गया है। सीमावर्ती जिलों (जम्मू, सांबा, कठुआ) में अतिरिक्त जांच चौकियां स्थापित की जा रही हैं।
आपदा प्रबंधन और मॉक ड्रिल
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) नियमित मॉक ड्रिल कर रहे हैं, जिसमें ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और चिकित्सा आपातकाल जैसे परिदृश्य शामिल हैं।जम्मू-कश्मीर आपदा प्रबंधन विभाग ने पहलगाम में निकासी और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए अभ्यास किए हैं।
खुफिया और आतंकी खतरे का मुकाबला
खुफिया इनपुट्स के आधार पर आतंकी संगठनों द्वारा ड्रोन हमलों या अन्य गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। इसके लिए विशेष तोड़फोड़ विरोधी दल और क्यूआरटी उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में तैनात हैं। सेना ऊंची चोटियों और रणनीतिक स्थानों पर निगरानी रखेगी, जबकि जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीएपीएफ संयुक्त पीसीआर (पुलिस कंट्रोल रूम) के माध्यम से समन्वय करेंगे।
क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध रहेगी!
चिकित्सा सुविधाएं, राशन, पेयजल, मोबाइल टॉयलेट, साइन बोर्ड, इंटरनेट कनेक्टिविटी, और हेल्पलाइन सेवाएं तेजी से तैयार की जा रही हैं। इस बार यात्रा 38 दिन की होगी (3 जुलाई से 9 अगस्त 2025), जो पिछले साल की 52 दिनों की तुलना में कम है, ताकि सुरक्षा प्रबंधन को और मजबूत किया जा सके। लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, और सीआरपीएफ महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने सुरक्षा और रसद तैयारियों की समीक्षा की है।
सुरक्षा व्यवस्था को हाई-टेक और चाक-चौबंद
पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, के बाद सुरक्षा एजेंसियां कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं। यात्रा को आतंकी संगठनों का प्रतीकात्मक लक्ष्य माना जाता है, जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था को हाई-टेक और चाक-चौबंद किया गया है। स्थानीय लोगों ने भी इन इंतजामों की सराहना की है, क्योंकि यह यात्रा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और धार्मिक सद्भाव के लिए महत्वपूर्ण है।
अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए सुरक्षा व्यवस्था में 180 सीएपीएफ कंपनियों की तैनाती, हाई-टेक उपकरणों का उपयोग, और कड़े प्रशासनिक उपाय शामिल हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि तीर्थयात्री सुरक्षित रूप से बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकें, केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हर संभव कदम उठाया है।







