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Home राज्य

क्या 2023 में सुलझ जाएगा काशी-मथुरा का मुद्दा?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
December 26, 2022
in राज्य, विशेष
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नई दिल्ली: पिछले कई दशकों से भारत की राजनीति को प्रभावित करने और गरमाये रखने वाले अयोध्या, काशी और मथुरा के लिहाज से आने वाला नया वर्ष 2023 काफी महत्वपूर्ण होने जा रहा है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य जोर-शोर से जारी है, वहीं काशी के ज्ञानवापी और मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा अदालत की चौखट पर पहुंचने के बाद इन दोनों विवादों का भी जल्द समाधान होने की संभावना बढ़ गई है। भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और प्राचीन गौरव से जुड़े इन तीनों मुद्दों के लिहाज से आने वाला नया वर्ष 2023 काफी महत्वपूर्ण होने जा रहा है। ध्यान रहे कि 90 के दशक में अयोध्या, काशी और मथुरा के मुद्दे ने देश के राजनीतिक और सामाजिक माहौल को पूरी तरह से बदल कर रख दिया था। इन तीनों मसले में से एक अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण को भाजपा ने अपने घोषणापत्र में शामिल कर अन्य राजनीतिक दलों को ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया था जिससे वो आज तक उबर नहीं पाए हैं।

दशकों चला राम मंदिर का मुद्दा

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वर्ष 1989 में हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में हुई पार्टी के अधिवेशन में यह फैसला किया गया कि भाजपा राम जन्मभूमि आंदोलन का खुलकर समर्थन करेगी। इससे पहले विश्व हिंदू परिषद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चलाए जा रहे आंदोलन की अगुवाई कर रही थी। भाजपा के इस फैसले के बाद देश की राजनीतिक दशा और दिशा तेजी से बदलने लगी। भाजपा की राजनीतिक ताकत में इजाफा होने लगा तो दूसरी तरफ भाजपा के खिलाफ अन्य राजनीतिक दलों की गोलबंदी भी तेज हो गई।

राम मंदिर आंदोलन को चलाने के कारण एक समय पर अकाली दल और शिवसेना को छोड़कर देश के सभी बड़े राजनीतिक दलों ने मिलकर भाजपा को देश की राजनीति में अछूत तक बना दिया था और इसी आंदोलन की वजह से आज भाजपा देश की राजनीति के शीर्ष पर है। न केवल शीर्ष पर है बल्कि भाजपा ने अब देश की राजनीति को भी पूरी तरह से बदल दिया है। हालांकि यह भी एक सच्चाई है कि राम जन्मभूमि विवाद का समाधान बातचीत या राजनीतिक पहल की वजह से नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ही संभव हो पाया।

वर्ष 2019 में अयोध्या विवाद पर फैसला सुना कर सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर निर्माण का रास्ता कानूनी रूप से साफ कर दिया। वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमि पूजन करने के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो गया और अब यह दावा किया जा रहा है कि अगले वर्ष यानी 2023 के अंत तक श्रद्धालु भव्य राम मंदिर में रामलला के दर्शन कर पाएंगे। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने हाल ही में यह दावा किया था कि दिसंबर 2023 तक अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर के प्रथम तल का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा और सूर्य के उत्तरायण होते ही शुभ मुहूर्त में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।

काशी-मथुरा का विवाद भी अदालत के द्वार

काशी के ज्ञानवापी और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मसला अदालत की चौखट पर पहुंचने के बाद यह माना जा रहा है कि अयोध्या की तरह इन दोनों मसलों का समाधान भी अब अदालत के जरिए ही होने जा रहा है। मथुरा की स्थानीय अदालत ने 24 दिसंबर को काशी के ज्ञानवापी की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि का सर्वे कराकर और नक्शा बनाकर अदालत में पेश करने का निर्देश दिया। मथुरा की अदालत के निर्देश का स्वागत करते हुए विश्व हिंदू परिषद के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने इस विवाद के समाधान की उम्मीद जताते हुए कहा कि इस सर्वे से सच सामने आ जाएगा और इससे अदालत को भी सही फैसला सुनाने में आसानी होगी।

विहिप नेता ने काशी और मथुरा दोनों ही मामलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मथुरा के न्यायालय ने यह आदेश दिया है कि कृष्ण जन्मस्थान का सर्वे कराया जाए, नक्शा बनाया जाए और अगली तारीख पर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। ऐसा ही आदेश वाराणसी में भी हुआ था। उसको इंतजामिया कमेटी ने चुनौती दी थी। हाई में उनकी चुनौती निरस्त हो गई जिसके बाद इंतजामिया कमेटी सुप्रीम कोर्ट गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी सर्वे को रोका नहीं, और सर्वे हो गया।

विश्व हिंदू परिषद के कार्याध्यक्ष ने काशी की तरह ही मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भी सर्वे संपन्न हो जाने की उम्मीद जताते हुए कहा कि सर्वे से सच सामने आ जाएगा और उन्हें विश्वास है कि इस सर्वे से न्यायालय के लिए उचित निर्णय करना संभव हो पाएगा। यह कहा जा रहा है कि अयोध्या विवाद को लेकर कई दशकों तक चली कानूनी लड़ाई और देश में बने सांप्रदायिक तनाव के माहौल से सबक लेते हुए इस बार अदालत और सरकार दोनों ही सावधानीपूर्वक फूंक-फूंक कर ठोस कदम उठा रही है। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि अयोध्या की तरह काशी और मथुरा का मामला अब दशकों तक तारीख पर तारीख के मकड़जाल में उलझेगा नहीं और इस लिहाज से 2023 का साल काशी और मथुरा को लेकर चल रही अदालती लड़ाई के समाधान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होने जा रहा है।

 

 

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