नई दिल्ली। एम्स के सर्वर पर रैनसमवेयर अटैक की घटना के 40 दिन बाद भी इमरजेंसी वार्ड के खाली बेड की संख्या आनलाइन डैशबोर्ड पर प्रदर्शित करने की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। इस वजह से मरीजों और तीमारदारों को इमरजेंसी वार्ड के खाली बेड की जानकारी अभी नहीं मिल पा रही है। साथ ही में एमआरआइ व सीटी स्कैन जांच का डाटा भी अभी आनलाइन नहीं हो पाया है। इसका कारण यह है कि एम्स रैनसमवेयर अटैक की घटनाओं से अभी तक उबर नहीं पाया है। इस वजह से एम्स में चिकित्सा सुविधाओं को पारदर्शी बनाने की योजना पर अमल में विलंब हुआ है।
आनलाइन डैशबोर्ड पर अभी प्रदर्शित नहीं की जा रही है इमरजेंसी में खाली बेड की संख्या
उल्लेखनीय है कि एम्स की इमरजेंसी में मरीजों का दबाव अधिक व बेड कम हैं। इस वजह से अक्सर 40 से 50 मरीज इलाज के इंतजार में इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर पर पड़े रहने को मजबूर होते हैं। इसके मद्देनजर एम्स प्रशासन ने 29 अक्टूबर को राजधानी के 15 सरकारी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों के साथ बैठक कर एक बेहतर रेफरल सिस्टम बनाने पर चर्चा की थी। ताकि मरीजों को बेड मिलने पर परेशानी न होने पाए। इस बैठक में एम्स प्रशासन ने ‘कैजुअलिटी डैशबोर्ड’ पोर्टल जारी किया था।
एमआरआइ, सीटी स्कैन जांच का डाटा भी आनलाइन करने की योजना पर नहीं हुआ अमल
इस पोर्टल पर एम्स के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों और खाली बेड की संख्या प्रदर्शित की जाती थी। ताकि एम्स पहुंचने से मरीज और तीमारदार यह देख सकें कि इमरजेंसी में बेड खाली है या नहीं। इसके बाद एम्स प्रशासन ने एमआरआइ व सीटी स्कैन जांच के आंकड़ों को आनलाइन करने का निर्देश दिया था। क्योंकि एम्स में एमआरआइ व सीटी स्कैन जांच की लंबी वेटिंग है। साढ़े तीन माह पहले तक एम्स में एमआरआइ व सीटी स्कैन जांच के लिए दो वर्ष तक का समय दिया जा रहा था। एम्स के निदेशक डा. एम श्रीनिवास द्वारा सख्ती किए जाने के बाद वेटिंग कुछ कम हुई है। फिर भी अभी एमआरआइ जांच के लिए छह से सात माह बाद तक का समय दिया जाता है।
इसके मद्देनजर एम्स प्रशासन ने रेडियोलाजी व संबंधित विभागों को निर्देश दिया था कि अस्पतालल में प्रतिदिन कितने मरीजों की एमआरआइ व सीटी स्कैन जांच होती है उसका डाटा रियल टाइम में आनलाइन अपलोड किया जाए। यह सुविधा 27 दिसंबर तक शुरू करने का निर्देश था। इस बीच 23 नवंबर को एम्स के सर्वर पर रैनसमवेयर अटैक की घटना हुई थी। इसके बाद मरीजों के इलाज से जुड़ी ज्यादातर डिजिटल सेवाएं शुरू हो चुकी हैं लेकिन इमरजेंसी वार्ड के बेड की स्थिति और जांच के आंकड़े आनलाइन करने की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। फिलहाल इस मामले पर एम्स प्रशासन कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।







