Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

एक बजट, भारत के लिए

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 16, 2023
in राष्ट्रीय, विशेष, व्यापार
A A
budget for India
22
SHARES
748
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

अनिल पद्मनाभन


इस साल का केंद्रीय बजट- भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से लगातार 11वां बजट- असाधारण परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में पेश किया जा रहा है। यह अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले का अंतिम नियमित बजट है, जो ऐसे दौर में पेश किया जा रहा है, जब एक अति-विभाजित दुनिया अभूतपूर्व आर्थिक चुनौती का सामना कर रही है, जिसे जलवायु परिवर्तन ने और भी जटिल बना दिया है।

इन्हें भी पढ़े

fasihuddin fitrat

डूरंड लाइन पर बढ़ा तनाव, कौन हैं फसीहुद्दीन फितरत, जिनके नाम की चर्चा तेज?

February 27, 2026
Swami Avimukteshwarananda

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक, हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

February 27, 2026
Kejriwal and Sisodia

रिश्वत मांगने से पॉलिसी में बदलाव तक… दिल्ली शराब घोटाला केस में केजरीवाल-सिसोदिया पर क्या थे आरोप?

February 27, 2026
loan

घर खरीदते समय भूलकर भी मत करें ये 5 गलतियां, वरना बर्बाद हो जाएगा आपका पैसा

February 27, 2026
Load More

2020 में कोविड-19 महामारी के आने के बाद से, दुनिया को अभूतपूर्व परिमाण की संभावनाओं वाले विभिन्न संकटों का सामना करना पड़ा है- रूस-यूक्रेन संघर्ष, इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी और हाल ही में चीन में कोविड-19 महामारी का तेजी से फैलना।

महामारी, भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक स्तर पर नकदी में कमी और कमोडिटी की कीमतों के उतार-चढ़ाव के मिले-जुले प्रभाव ने सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था संयुक्त राज्य अमेरिका समेत पूरी दुनिया को खतरनाक रूप से मंदी के करीब ला दिया है। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लिए खुशी के कारण मौजूद हैं। 2022-23 में 6.5 से 7 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज करने के लिए तैयार अपनी अर्थव्यवस्था के साथ, भारत इस गंभीर वैश्विक धारणा को चुनौती देना जारी रखे हुए है। इससे भी अच्छी बात यह है कि वित्त मंत्री के पास इस तथ्य को मानने के पर्याप्त कारण हैं कि यह मुख्य रूप से 2014 में सत्ता में आने के बाद एनडीए द्वारा अपनाई गई नीतिगत कार्ययोजना का परिणाम है।

नयी कार्ययोजना
नौ साल पहले सत्ता में आने के बाद से, एनडीए ने भारतीय अर्थव्यवस्था को केन्द्रबिन्दु बनाने की कोशिश की है। वैश्विक निवेश बैंकों, विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा हाल ही में इन नीतिगत परिवर्तनों की सराहना और पुष्टि भी की गई है। सबसे बड़े अप्रत्यक्ष कर सुधार- वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी)- के लागू होने के साथ इसकी शुरुआत हुई, जिसने पहली बार देश को आर्थिक रूप से एकीकृत किया। जीएसटी सिद्धांत, ‘एक राष्ट्र, एक टैक्स’ ने विभिन्न मतभेदों को नाटकीय रूप से कम करके अर्थव्यवस्था को और अधिक कुशल बना दिया। आश्चर्य की बात नहीं है कि मासिक सकल जीएसटी संग्रह अब औसतन 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है- नवंबर में सरकारी कोष में 1.45 लाख करोड़ रुपये जमा हुए हैं।

निजी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने और इसे पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स की दरों को मौजूदा 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया। इसके अलावा, सरकार ने 2019 के बाद निगमित कंपनियों के लिए 15 प्रतिशत की निम्न दर निर्धारित की। इस योजना को 2023 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

इसी तरह, 2016 में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के पारित होने से वाणिज्यिक बैंकों के पुराने व अप्राप्य ऋणों को कम करने में मदद मिली। 2021-22 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वित्तीय लेनदारों ने 30 सितंबर 2021 के अंत तक बैंकों के 7.94 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में से 2.55 लाख करोड़ रुपये की वसूली की। वित्तीय क्षेत्र की इस व्यवस्था ने, जिसमें बैंक बैलेंस शीट का पूंजीकरण भी शामिल था, वाणिज्यिक बैंकों की उधार देने की क्षमता को बहाल किया।

निजीकरण की नीति को औपचारिक रूप देने के बाद, एनडीए ने एक प्रमुख वैचारिक बदलाव भी किया– इसका सबसे ताजा उदाहरण टाटा समूह को एयर इंडिया की बिक्री है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने की ग्रीनफ़ील्ड अवसंरचना परियोजनाओं के लिए धन अर्जित करने हेतु सार्वजनिक क्षेत्र के स्वामित्व वाली निष्क्रिय संपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए कदम उठाये हैं- अंतर्निहित रणनीति, निजी निवेश के लिए धन-अर्जन पर आधारित है।

राजकोषीय विवेक, वित्तीय संसाधनों को खोलना और कर संग्रह में वृद्धि आदि ने वित्त मंत्री को अवसंरचना परियोजनाओं और कोविड-19 राहत पैकेजों को वित्तपोषित करने के लिए साधन प्रदान किए हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन संरचनात्मक सुधारों ने आर्थिक दक्षता में सुधार किया है, वे महामारी के कारण हुई आर्थिक तबाही के खिलाफ स्पष्ट रूप से एक अतिरिक्त उपाय साबित हुए हैं।

डिजिटल जनकल्याण
पिछले एक दशक में आधार, एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई), कोविन, डिजिटल वाणिज्य के लिए ओपन नेटवर्क (ओएनडीसी), खातों को जोडऩा, स्वास्थ्य योजनायें और ऋण को सक्षम करने के लिए ओपन नेटवर्क (ओसीईएन) जैसी डिजिटल जनकल्याण (डीपीजी) योजनाओं की तेजी से शुरुआत से भी भारतीय अर्थव्यवस्था को अप्रत्याशित बढ़ावा मिला है। इन डिजिटल जनकल्याण (डीपीजी) योजनाओं को एक ओपन डिजिटल इकोसिस्टम में तैयार किया गया है, जो भुगतान, स्वास्थ्य देखभाल आदि में नवाचार के लिए निजी क्षेत्र को इन डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने में सक्षम बनाता है। इसी के साथ, शुरुआत करने की लागत को बहुत कम करके, इन डीपीजी ने अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने को गति दी तथा पहचान, कोविड-19 टीकाकरण, भुगतान, ऋण और हाल ही में ई-कॉमर्स तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण किया।

इन सार्वजनिक डिजिटल माध्यमों का उपयोग केंद्र सरकार द्वारा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को गति देने के लिए भी किया गया है, जिसका मूल्य कुल मिलाकर 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। प्रत्यक्ष लाभ को सीधे तौर पर हस्तांतरित करने से सरकारी कोष की हानि (लीकेज) को रोकने में भी सफलता मिली है तथा 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है। इसके अलावा, ये लाभार्थी भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रमुख हितधारक बन गए हैं – जिसे वे पहले बाहर से देख रहे थे।

महामारी संकट
कोविड-19 महामारी की शुरुआत तथा इसके कारण हुए अर्थव्यवस्था के लॉकडाउन ने न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में जीवन और आजीविका दोनों के लिए भारी संकट पैदा कर दिया। हालांकि अन्य देशों के विपरीत, भारत ने अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन के विकल्प का चयन नहीं किया। इसके बजाय, देश ने एक सोची-समझी रणनीति अपनाई, जिसमें शुरुआत में जीवन बचाने पर और फिर धीरे-धीरे आजीविका पर ध्यान केंद्रित किया गया- 80 करोड़ लोगों के लिए नि:शुल्क खाद्यान्न योजना शुरू करके कमजोर वर्गों के भौतिक आधार को मजबूती दी गयी। इस योजना को अब दिसंबर 2023 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

सभी के लिए बिजली, पेयजल, स्वच्छता और आवास प्रदान करने के बड़े प्रोत्साहन के साथ, नि:शुल्क खाद्यान्न योजना का यह असाधारण सामाजिक सुरक्षा कवच; सामाजिक संरचना के निचले हिस्से की आबादी के नुकसान को कम करने में सफल रहा।संरचनात्मक सुधारों ने अर्थव्यवस्था को और अधिक कुशल बना दिया है।

व्यापक प्रभाव का स्पष्ट रूप से दिखाई पडऩा अभी शेष है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था, खराब ऋणों की अभूतपूर्व वृद्धि से बैंकिंग क्षेत्र को हुई क्षति की भरपाई करने में जुटी थी। इसके अलावा, महामारी के साथ शुरू हुए एक के बाद एक संकटों ने सुधार प्रक्रिया को धीमा कर दिया। हालांकि, अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाले इन संकटों के समाप्त होने के साथ ही, देश की अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौटने के लिए तैयार है। यह परिस्थिति, इस साल के बजट के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक स्वस्थ पृष्ठभूमि प्रदान करती है।


(लेखक एक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
Nitish Kumar

नीतीश कुमार का मिशन

April 24, 2023
terrorists

क्या बदल गया तालिबान?

June 11, 2022
Shivraj Singh Chouhan's

शिवराज सिंह चौहान के घर गूंजी किलकारी, पोती का नाम रखा ‘इला’ – देवी से जुड़ा है गहरा धार्मिक महत्व

January 22, 2026
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • डूरंड लाइन पर बढ़ा तनाव, कौन हैं फसीहुद्दीन फितरत, जिनके नाम की चर्चा तेज?
  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक, हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
  • रिश्वत मांगने से पॉलिसी में बदलाव तक… दिल्ली शराब घोटाला केस में केजरीवाल-सिसोदिया पर क्या थे आरोप?

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.