नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (आप) को इस समय अपने सबसे बड़े संकट का सामना करना पड़ रहा है। एक दशक पहले आंदोलन के रास्ते राजनीति में एंट्री करने वाली पार्टी ने बेहद कम समय में कई उपलब्धियां हासिल कर लीं। दिल्ली के बाद पंजाब में प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई तो गुजरात से गोवा तक में पार्टी विपक्ष का हिस्सा है। कई और राज्यों में पार्टी जड़े जमाने की कोशिश में जुटी थी कि इसके दूसरे सबसे बड़े नेता चौतरफा घिर गए हैं। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के शराब घोटाले में जेल चले जाने से ‘आप’ को बड़ा झटका लगा है। पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल भले ही केंद्र सरकार पर परेशान करने का आरोप लगाकर सहानुभूति बटोरने और डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक आकलन में जुटे हैं कि सिसोदिया के जेल चले जाने से ‘आप’ को कहां और कितना नुकसान पहुंचा है।
सरकार के कामकाज में दिक्कत
कहा जाता है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री भले ही हैं, लेकिन सरकार सिसोदिया ही चला रहे थे। उपमुख्यमंत्री होने के अलावा वह डेढ़ दर्जन विभागों का कामकाज देख रहे थे। शिक्षा, वित्त,रोजगार समेत सभी अधिकतर महत्वपूर्ण विभागों का काम सिसोदिया के जिम्मे ही था। सरकार में उन पर कितनी जिम्मेदारी थी इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अब उनके विभागों का बंटवारा तीन मंत्रियों में किया गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नौकरशाहों के साथ भी सिसोदिया के संबंध बेहद मधुर थे और इसलिए सरकार का कामकाज काफी सुगमता से चल रहा था। सिसोदिया के जेल चले जाने से ना सिर्फ कामकाज की गति प्रभावित हुई है,बल्कि केजरीवाल पर भी बोझ बढ़ा गया है।
संगठन में भी महसूस की जा रही कमी
‘आप’ के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल हैं तो सिसोदिया की भी पार्टी पर पकड़ उतनी ही अच्छी बताई जाती है। आंदोलन के समय से ही केजरीवाल के दाएं हाथ रहे सिसोदिया ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच एक पुल का काम किया है। दिल्ली में संगठन की मजबूती हो या दूसरे प्रदेशों में विस्तार, सिसोदिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। दिल्ली की राजनीति पर करीब से निगाह रखने वालों का कहना है कि पार्टी स्तर के हर छोटे से बड़े फैसले तक में उनकी सहति और सहभागिता रही है। केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद साथी के रूप में पार्टी के मजबूत स्तंभ रहे सिसोदिया के जेल चले जाने से पार्टी को संगठन के स्तर पर नुकसान हुआ है।
साख को लगा झटका
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जन्मी पार्टी ने ‘ईमानदारी और शुचिता की राजनीति’ का दावा करते हुए हमेशा खुद को परंपरागत पार्टियों से अलग पेश करने की कोशिश की है। अपने नेताओं और पार्टी को
‘कट्टर ईमानदार’ बताने वाले केजरीवाल के सबसे करीबी नेता पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने को पार्टी की साख पर सवाल और दाग के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी घर-घर पर्चे बांटकर लोगों को शराब घोटाले के बारे में बता रही है तो आम आदमी पार्टी भी हर गली-नुक्कड़ में जाकर जनता को भरोसा बनाए रखने को कह रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी की साख पर जो दाग सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के जेल जाने से लगा है उसे पूरी तरह साफ कर पानी बड़ी चुनौती होगी।
लंबा चल सकता है संकट
पिछले साल मई से जेल में बंद पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की तरह मनीष सिसोदिया को भी लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है। एक तरफ जहां शराब घोटाले में सीबीआई और ईडी ने सिसोदिया के खिलाफ काफी सबूत जुटाने की बात कही है तो दूसरी तरफ जासूसी केस में भी केस दर्ज कर लिया गया है। खुद अरविंद केजरीवाल भी मानते हैं कि यह संकट जल्दी खत्म नहीं होने वाला है। जासूसी कांड में सीबीआई की ओर से केस दर्ज किए जाने के बाद केजरीवाल ने कहा कि पीएम उन्हें लंबे समय तक बंद रखना चाहते हैं।







