देहरादून : कोऑपरेटिव बैंक में चतुर्थ श्रेणी की भर्ती में हुए घपले की एक साल से जांच पर जांच चल रही है। इस मामले में कार्रवाई की बजाए शासन इसे नई-नई जांच के नाम पर उलझा रहा है। दूसरी ओर, इन भर्तियों के कर्मचारियों को अब पक्का करने की तैयारी की जा रही है। इन कर्मचारियों को पक्का करने का चौंकाने वाला प्रस्ताव गुरुवार को ऊधमसिंहनगर जिला सहकारी बैंक (डीसीबी) की बोर्ड बैठक में रखा गया।
इस प्रस्ताव की गूंज देहरादून तक सुनाई दी। जैसे ही सरकार को इसकी जानकारी लगी, तत्काल इस प्रस्ताव को निरस्त करने को कहा गया। इस पर बोर्ड बैठक में ही प्रस्ताव का विरोध हुआ और बाद में इसे निरस्त कर दिया गया। इस पूरे मामले में सवाल ये उठ रहा है कि किसके कहने पर विवादित भर्ती में रखे गए कर्मचारियों के स्थायीकरण का प्रस्ताव बैठक में रखा गया। बैठक के एजेंडे के बिंदु संख्या 29 में इन कर्मचारियों के स्थायीकरण का प्रस्ताव रखा गया।
तर्क दिया गया कि इन कर्मचारियों की एक साल की परीवीक्षा अवधि पूरी होने के कारण प्रस्ताव रखा गया। जबकि मार्च 2022 में इन कर्मचारियों के मामले में दो टूक आदेश थे कि इन्हें किसी भी सूरत में ज्वाइन न कराया जाए। इसके बाद भी बैंक प्रबंधन ने न सिर्फ इन्हें ज्वाइन कराया, बल्कि पूरे साल भर तक वेतन दिया।
सूत्रों की माने तो अब बोर्ड में प्रस्ताव लाकर इन कर्मचारियों के लिए आधार तैयार किया जा रहा है। ताकि भविष्य में यदि इनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई होती है, तो बोर्ड का यही प्रस्ताव उनके लिए सहारा बने। सवालों के घेरे में बोर्ड मैनेजमेंट बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखने को लेकर बोर्ड मैनेजमेंट सवालों के घेरे में है। जिस मामले को लेकर एक साल से शासन, सरकार और सत्ता के गलियारों में जबरदस्त हंगामा मचा है।
विपक्ष ने पूरे एक साल सरकार को निशाने पर लेकर रखा। तीन बैंकों के बोर्ड का भविष्य तक खतरे में है। उसके बाद भी इतने संवेदनशील और सियासी मायनों में बेहद नाजुक मामले में इस तरह का जोखिम बैंक मैनेजमेंट ने किसकी शह पर लिया। इस मामले में अब बैंक मैनेजमेंट एक दूसरे के पाले में गेंद उछाल रहा है।
बयानों में विरोधाभास इस मामले में डीसीबी अध्यक्ष और जीएम के बयानों में भी विरोधाभास है। अध्यक्ष कह रहे हैं कि जीएम स्तर से भूलवश ये प्रस्ताव रखा गया है। जबकि जीएम कह रहे हैं कि परीवीक्षा अवधि पूरी होने के कारण ये प्रस्ताव बोर्ड के समक्ष रखा गया।शासन की सुस्ती पर भी उठ रहे सवाल सहकारी बैंक भर्ती घपले मामले में शासन की सुस्ती भी सवालों के घेरे में है।
एक साल में दो बार जांच हो चुकी है। आधा दर्जन बार शासन में वित्त, न्याय, कार्मिक की राय लेने के मामले में पूरा एक साल गुजार दिया गया है। इसके बाद भी अभी भी इस मामले को लगातार घुमाया जा रहा है। सचिव सहकारिता बीवीआरसी पुरुषोत्तम का कहना है कि कार्मिक विभाग की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
मालूम हो कि सभी जिला सहकारी बैंकों में चतुर्थ श्रेणी के 423 पदों पर भर्ती हुई थी। सभी जिलों में से सिर्फ देहरादून, यूएसनगर और पिथौरागढ़ बैंक के रिजल्ट जारी करने व ज्वाइनिंग की प्रक्रिया आचार संहिता के बीच कराई गई। इस पूरी भर्ती पर भाजपा के ही विधायकों ने सवाल उठाए थे। इसके बाद शासन ने जांच कराई।







