शिमला : केंद्र की सत्ता पर काबिज होने का सेमीफाइनल शिमला में भी शुरू होने वाला है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों को पहाड़ पर इम्तिहान देना होगा। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन शानदार रहा है और पार्टी के पाले में 40 सीटें आई थी। भाजपा को सिर्फ 25 से ही संतोष करना पड़ा था, लेकिन बड़ी बात उन मतों के अंतर की है, जिसे अब सत्ता गंवाने के बावजूद भाजपा ने मुद्दा बना लिया है। दरअसल कांग्रेस को भाजपा से महज 37 हजार 974 वोट चुनाव में ज्यादा मिले। मतों के अंतर को देखें तो यह 0.9 फीसदी बनता है। बस यही भाजपा की सत्ता गंवाने के बाद एक आखिरी उम्मीद भी बना हुआ है।
शिमला नगर निगम में भाजपा बीते पांच सालों से काबिज है और अब से पहले तक शिमला में चुनाव विधानसभा से पहले होते रहे हैं। उन चुनाव में जो पार्टी जीत का स्वाद चखती रही, उसे बाद में फायदा विधानसभा चुनाव में भी मिलता गया, लेकिन इस बार शिमला में एमसी चुनाव लोकसभा से पहले होने हैं। ऐसे में प्रतिष्ठा का सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस के लिए भी है। कांग्रेस ने हाल ही में भाजपा से हिमाचल की सत्ता छीन ली है। अब शिमला के 34 वार्डों में पार्टी का प्रदर्शन लोकसभा में पार्टी की पकड़ के मजबूत होने का एहसास करवाएगा।
कांग्रेस 100 दिन की सरकार के काम पर यह चुनाव लडऩे जा रही है। कांग्रेस ने टिकट चयन प्रक्रिया में फूंक-फूंक कर कदम रखे हैं। टिकट आवंटन से ठीक पहले एक कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी ने वार्ड में उन प्रत्याशियों की खोज की जो जीतने की स्थिति में थे। इसके बाद तीन-तीन आवेदन मांगें गए। इन आवेदनों की स्क्रीनिंग कमेटी ने छंटनी की और बाद में इन्हें मुख्यमंत्री की मंजूरी को भेजा गया। राज्य में संगठन से सरकार तक चुनाव की झलक साफ दिख रही है। कांग्रेस में जीत या हार का सेहरा मुख्यमंत्री समेत पूरी सरकार के सिर बंधेगा। यही वजह है कि जो पार्टी ने दो मंत्रियों और एक विधायक की सीधी जिम्मेदारी समेत सभी विधायकों की फिल्डिंग राजधानी में लगा दी है। कांग्रेस की टिकटें तय होने में सबसे ज्यादा समय लगा है। सत्ता में होने के बावजूद दो चरणों में पार्टी अभी तक 16 ही प्रत्याशी तय कर पाई है। खास बात यह है कि इनमें से आठ महिलाएं हैं, यानि 50 फीसदी टिकटें कांग्रेस ने अभी तक महिलाओं को दी हैं।
शिमला में कुल 86 हजार 650 मतदाता
शिमला नगर निगम चुनाव में इस बार 86 हजार 650 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 45 हजार 544 पुरुष, जबकि 41 हजार 106 महिला मतदाता हैं। संजौली शहर का सबसे बड़ा वार्ड है। यहां चार हजार से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। जबकि मल्याणा में सबसे कम 962 मतदाता पंजीकृत हैं। बीते चुनाव के मुकाबले इस बार दस हजार ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। शहर में 149 मतदान केंद्रों में वोट डाले जाएंगे।
चुनावों में माकपा या आप बनेगी तीसरा विकल्प
शिमला नगर निगम चुनाव में तीसरे मोर्चे का दखल भी मुकाबले को दिलचस्प बना सकता है। शिमला में कभी माकपा को भरपूर समर्थन मिलता रहा है। हालांकि विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। इसके बावजूद माकपा के प्रभाव वाले वार्डों में पार्टी पूरे जोश के साथ चुनाव लडऩे की तैयारी में है। माकपा ने अभी तक चार उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं। जबकि आम आदमी पार्टी भी इस बार शिमला में दखल देती हुई नजर आएगी। आप ने तीन वार्डों में अपने प्रत्याशी अभी तक उतारे हैं। इन दोनों पार्टियों की दूसरी लिस्ट का इंतजार समर्थक कर रहे हैं।
भाजपा ने मैदान में उतारीं 21 महिला प्रत्याशी
शिमला नगर निगम चुनाव में भाजपा पूरी ताकत के साथ उतरने का फैसला किया है। पार्टी ने सबसे ज्यादा 31 टिकटों का ऐलान कर दिया है। पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहे हैं। भाजपा ने जिन 31 वार्डों में टिकटें अभी तक तय की हैं उनमें सबसे ज्यादा नाम महिलाओं के ही हैं। भाजपा ने 21 महिलाओं को राजधानी के चुनाव में उतारा है। खास बात यह है कि भाजपा ने 34 वार्डों में पांच विधायक और पूर्व विधायकों को जिम्मेदारी सौंपी है। विधायक सतपाल सत्ती, बलवीर वर्मा समेत, डॉ. राजीव ङ्क्षबदल, चेतना बरागटा और त्रिलोक जम्बाल को जिम्मेदारी सौंपी है। सभी वार्डों में कार्यालय भी खोल दिए हैं।







