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महाकाल के दरबार में दर्शन भी बना कारोबार

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 11, 2023
in राष्ट्रीय, विशेष
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Mahakal
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सिद्धार्थ शंकर गौतम : उज्जैन के महाकालेश्वर महादेव के बारे में धारणा है कि यहां काल भी अपनी गति त्याग देता है। उनकी इस महिमा के कारण ही दूर दूर से श्रद्धालु उनका दर्शन करने पहुंचते हैं। लेकिन यहां जिस तरह से महाकाल के दर्शन के नाम पर कारोबार चलने लगा है उससे भक्त तो परेशान हैं ही, भगवान भी खुश नहीं होंगे।

पिछले कुछ महीनों से महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन की नयी व्यवस्था बनायी गयी है। इस नयी दर्शन व्यवस्था के अनुसार 250 रुपए में मंडपम, जहां से महाकाल की दूरी 150 फीट है, से शीघ्रदर्शन किए जा सकते हैं। इसी प्रकार 200 रुपए में भस्मारती दर्शन की रसीद कटवानी पड़ती है। भस्मारती में भी दर्शन नंदी हॉल से कार्तिक मंडपम तक बैठकर हो सकता है। यदि श्रद्धालु गर्भगृह में जाकर बाबा का जलाभिषेक करना चाहे तो उसे 1500 रुपए की रसीद कटवानी पड़ेगी। इस रसीद पर दो व्यक्ति गर्भगृह में जा सकते हैं। ये सभी रसीदें ऑनलाइन उपलब्ध हैं जिसे लेकर महाकाल मंदिर के पुरोहितों में भी रोष है।

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दरअसल, पूर्व में मंदिर प्रबंध समिति सभी पुरोहितों को 750 रुपए की रसीद उपलब्ध कराती थी जिससे दो यजमान दर्शन करने जा सकते थे। अब मंदिर प्रबंध समिति ने नई व्यवस्था लागू कर दी है जिसके अनुसार पुरोहितों को भी ऑनलाइन 1500 रुपए की ही रसीद कटवानी पड़ेगी। जबकि पुरोहितों ने मंदिर प्रशासन से मांग की थी कि उनकी 750 रुपये वाली रसीद का कोटा बढ़ा दिया जाए और प्रोटोकॉल की असीमित संख्या को सीमित किया जाए। यह मामला अब तूल पकड़ता दिख रहा है क्योंकि इससे पुरोहितों में आक्रोश बढ़ रहा है।

हाँ, यदि कोई श्रद्धालु बिना किसी शुल्क के महाकाल दर्शन करना चाहे तो उसे दर्शन कार्तिक मंडपम से करवाए जाते हैं जहां से शिवलिंग को ठीक से देख पाना संभव नहीं है। आश्चर्य तो इस बात का भी है कि प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में होने वाली भस्मारती का शुल्क सबसे कम है जबकि बेरिकेडिंग से बाबा के दर्शन का शुल्क सबसे ज्यादा है। भस्मारती में शामिल होने के लिए बिचौलिए 800 से 1500 रुपए तक में रसीद दे रहे हैं। मंदिर काउंटर से प्रतिदिन 300 नि:शुल्क भस्मारती परमिशन जारी होती हैं लेकिन यह किसे, कैसे और क्यों जारी होती हैं इस पर हमेशा प्रश्नचिन्ह लगते रहे हैं। ये परमिशन किसको कैसे जारी की जाती है इस पर कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं है।

महाकालेश्वर में प्रवेश व दर्शन व्यवस्था

वर्तमान में सामान्य श्रद्धालु मानसरोवर द्वार से प्रवेश कर फेसिलिटी सेंटर वन से वेटिंग हॉल होकर चांदी के स्तंभ के पास से मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं। जबकि 250 रुपए की टिकट लेकर शीघ्र दर्शन रसीद वाले श्रद्धालु बड़े गणेश मंदिर के सामने से विश्रामधाम होकर सभामंडप होकर गणेश मंडपम से दर्शन कर पा रहे हैं। वहीं 750 की टिकट वाले श्रद्धालु गेट नंबर 13 से कुंड के पास से सभामंडप पहुंचकर चांदी द्वार से गर्भगृह प्रवेश कर रहे हैं।

वैसे भी गर्मियों की छुट्टियों के चलते महाकालेश्वर दर्शन हेतु भारी भीड़ उमड़ रही है। मंदिर प्रशासक संदीप सोनी के अनुसार बीते सप्ताह शुक्रवार से रविवार में ही पाँच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने महाकालेश्वर के दर्शन किए। मंदिर प्रशासन ने इस बार अपनी पुरानी गलती सुधारते हुए परिसर में बने अन्य मंदिरों हेतु भी प्रवेश मार्ग श्रद्धालुओं को दिया। पूर्व में नवीनीकरण के कार्यों के चलते मंदिर प्रशासन ने दर्शन की जो व्यवस्था लागू की थी उससे परिसर के अन्य मंदिरों में प्रवेश बंद हो गया था। इनमें साक्षी गोपाल मंदिर भी था जिसके बारे में प्रसिद्ध है कि इनके दर्शन से महाकाल दर्शन की साक्षी अर्थात् गवाही मिलती है। अब प्रशासन द्वारा पुनः उसी व्यवस्था से दर्शन करवाये जा रहे हैं जिससे श्रद्धालु महाकालेश्वर के साथ ही साक्षी गोपाल व अन्य मंदिरों के दर्शन कर पा रहे हैं। इससे पुजारी और श्रद्धालु दोनों प्रसन्न हैं।

इसके अलावा महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने उज्जैन शहर के स्थानीय नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए ऐसी व्यवस्था बनाने का निर्णय लिया है जिससे स्थानीय नागरिकों को महाकालेश्वर के दर्शन के लिए लंबी कतार में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। मंदिर में प्रवेश के लिए शहरवासियों के लिए एक द्वार अलग से बनाया जाएगा जिसमें प्रवेश हेतु आधार कार्ड दिखाना होगा। इस व्यवस्था के लागू होने से भीड़ प्रबंधन में भी सहायता प्राप्त होगी।

अवैध वसूलीबाजों का गढ़ बना महाकालेश्वर मंदिर

मंदिर प्रशासन की व्यवस्था अपनी जगह लेकिन महाकालेश्वर मंदिर में पैसा लेकर दर्शन कराने का गोरखधंधा बदस्तूर जारी है जिसे मंदिर समिति भी रोकने में असफल साबित हुई है। बाहरी श्रद्धालुओं के साथ अवैध वसूलीबाजों ने वसूली का खेल चला रखा है। मंदिर में दर्शन कराने के लिए रुपए लेने की कई बार शिकायतें हो चुकी हैं तथा मंदिर से जुड़े कई लोगों पर प्रकरण भी दर्ज हो चुके हैं किंतु इसके बाद भी अवैध वसूली का गोरखधंधा लगातार चल रहा है।

मंदिर समिति के कर्मचारी और यहां से जुड़े कई लोग श्रद्धालुओं से बगैर लाईन में लगे दर्शन कराने के नाम पर 2 से 4 हजार रुपए तक की वसूली करते हैं जिसमें सभी की मिलीभगत होती है। कभी अपना यजमान बताकर तो कभी रिश्तेदार, रुपए लेकर दर्शन कराने का सिलसिला जारी है जो प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है। इसे लेकर कई बार श्रद्धालुओं और मंदिर समिति के कर्मचारियों के बीच मारपीट की नौबत तक आई है। इसके अलावा संत समाज भी अवैध वसूली को लेकर सरकार को घेर रहा है। संत समाज ने प्रशासन द्वारा लिए जा रहे दर्शन शुल्क पर भी आपत्ति जताई है।

वीआईपी दर्शन से बढ़ी मंदिर की आय

महाकाल लोक के प्रथम चरण के बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई जिससे महाकालेश्वर मंदिर का खजाना भी भरने लगा है। मंदिर प्रशासक संदीप सोनी के अनुसार पहले यहां रोज औसतन 15 हजार भक्त आते थे लेकिन अब श्रद्धालुओं की संख्या 1 लाख 50 हजार तक पहुंच गई है और इसका असर आय पर भी नजर आ रहा है। अक्टूबर, 2022 में महाकालेश्वर मंदिर की आय 4.97 करोड़ थी जो अप्रैल, 2023 में 14.26 करोड़ रुपए पर जा पहुंची है। 250 रुपए की रसीद कटने से ही आय में 5 करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ है।

मंदिर में वीआईपी कल्चर का विरोध

हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने उज्जैन दौरे में महाकालेश्वर मंदिर में शुल्क व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसका गुजरात कनेक्शन निकाल दिया था। उनका आरोप था कि गुजरात की कंपनी को इस वसूली का ठेका दिया गया है। इसके अलावा संत समाज के प्रतिनिधियों, उज्जैन के बुद्धिजीवियों तथा समाजसेवकों ने भी सशुल्क दर्शन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। अभी सशुल्क दर्शन व्यवस्था को देखकर ऐसा लगता है मानो श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने नहीं बल्कि फिल्म की टिकट खरीदकर फ़िल्म देखने आया है।

महाकालेश्वर की महिमा को देखते हुए देश-विदेश से लाखों-करोड़ों लोग उनके दर्शनों को आते हैं और उनसे यदि इस प्रकार दर्शनों के नाम पर शुल्क की वसूली की जा रही है तो यह उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का भी हनन है। फिर ऐसे देश में जहां 80 करोड़ लोगों को आज भी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभार्थी बताया जाता हो वहां भगवान के दर्शन के लिए पैसे लेना संस्थागत सरकारी महापाप ही है। दर्शन करने में उन्हीं 80 करोड़ लाभार्थियों की संख्या अधिक है जिनके बारे में सरकार भी मानती है कि वो दो वक्त की रोटी भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

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