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पाकिस्तान के दोस्त को भारत ने साध लिया, मोदी ने चल दी ब्रिक्स वाली चाल?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 9, 2026
in विशेष, व्यापार
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india -malaysia
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नई दिल्ली: भारत और मलेशिया ने रविवार को रिश्तों का नया पन्ना लिखा। कुआलालंपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मलेशियाई समकक्ष अनवर इब्राहिम के बीच हुए शिखर सम्मेलन में सुरक्षा और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में घोषणाओं और समझौतों के माध्यम से अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया। सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों नेताओं ने पाकिस्तान के आतंकी ढांचे का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश भी दिया। प्रधानमंत्री दो दिवसीय मलेशिया दौरे पर थे। सबसे बड़ी बात यह है कि क्या भारत ने मलेशिया को साध लिया है?

भारत-मलेशिया ने आतंक-विरोधी साझेदारी पर थामे हाथ
द इकनॉमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार, भारत और मलेशिया दोनों देशों ने डिजिटल भुगतान, सुरक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और चिकित्सा, आपदा प्रबंधन, भ्रष्टाचार निवारण, ऑडियो-विजुअल सह-निर्माण, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना सहयोग और भारतीय श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किया। साथ ही एक मजबूत आतंकवाद-विरोधी साझेदारी को मजबूत करने का निर्णय लिया।

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आतंक पर न डबल स्टैंडर्ड और न समझौता
एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले और लाल किले विस्फोट की कड़ी निंदा करने के लिए इब्राहिम को धन्यवाद दिया और आतंकवाद-विरोधी गतिविधियों में निरंतर घनिष्ठ सहयोग का आह्वान किया। शिखर सम्मेलन के बाद मोदी ने कहा-आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है, कोई दोहरा मापदंड नहीं और इस पर कोई समझौता नहीं।

सीमापार आतंकवाद समेत हर रूपों की कड़ी निंदा
दोनों प्रधानमंत्रियों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों की स्पष्ट और कड़ी निंदा की। शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान के अनुसार, उन्होंने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता और आतंकवाद से व्यापक और सतत तरीके से निपटने के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया। दोनों नेताओ ने आतंकवाद की फंडिंग रोकने पर बात की।

सेमीकंडक्टर में दोनों देश मिलकर कर रहे काम
दोनों प्रधानमंत्रियों ने IIT-मद्रास ग्लोबल और मलेशिया की एडवांस्ड सेमीकंडक्टर अकादमी के बीच सहयोग तथा इंडियन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन और मलेशिया सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री एसोसिएशन के बीच सहयोग सहित चल रही सहयोग पहलों की सराहना की।

Su-30 फोरम पर भी मलेशिया के साथ चर्चा
दोनों प्रधानमंत्रियों ने रक्षा साझेदारी, जिसमें रक्षा उद्योग सहयोग भी शामिल है, पर भी चर्चा की। उन्होंने मलेशिया-भारत रक्षा सहयोग समिति और उसकी उपसमितियों के सफल परिणामों का स्वागत किया, जिसमें सामरिक मामलों के कार्य समूह और Su-30 फोरम की स्थापना के लिए संदर्भ की शर्तें भी शामिल हैं।

मलेशिया को ब्रिक्स में शामिल करेगा भारत
मलेशिया ने भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का स्वागत किया, जबकि भारत ने ब्रिक्स भागीदार देश के रूप में मलेशिया की भूमिका का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और ब्रिक्स का सदस्य बनने की मलेशिया की आकांक्षा को भी स्वीकार किया। दोनों नेताओं ने इस सहयोग को अधिक संतुलित और प्रतिनिधि वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक रणनीतिक मील का पत्थर माना।

पाकिस्तानी नौसेना प्रमुख ने भी कर लिया दौरा
नवभारत टाइम्स की ही एक और खबर के अनुसार, जब पीएम मोदी मलेशिया में थे तो उसी वक्त पाकिस्तान की नौसेना के प्रमुख एडमिरल नावीद अशरफ ने भी मलेशिया का दौरा किया। एडमिरल अशरफ ने रॉयल मलेशियाई नौसेना के नेतृत्व से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।

पाकिस्तानी नौसेना ने कहा कि इस यात्रा ने पाकिस्तान-मलेशिया नौसैनिक साझेदारी और भविष्य के समुद्री सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि की। बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने पेशेवर संबंधों को मजबूत करने, नौसैनिक जुड़ाव का विस्तार करने और संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और सूचना साझा करने जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने समुद्री डकैती, आतंकवाद और सुरक्षित समुद्री संचार मार्गों को सुनिश्चित करने समेत समुद्री चुनौतियों के लिए सहयोग के महत्व पर जोर दिया।

1957 से ही मजबूत रिश्ते रहे हैं पाकिस्तान-मलेशिया रिश्ते
पाकिस्तान और मलेशिया के रिश्ते 1957 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ रहे हैं। दोनों देशों ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत किया है। मलेशिया अक्सर कश्मीर पर पाकिस्तान का साथ देता आया है। इसके अलावा, मलेशिया नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पर सवाल उठा चुका है।

कश्मीर पर पाकिस्तान का साथ देता रहा मलेशिया
नवभारत टाइम्स की एक खबर के अनुसार, पूर्व मलेशियाई पीएम महातिर मोहम्मद ने UN जनरल असेंबली में बोलते हुए कश्मीर का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत ने जम्मू और कश्मीर पर हमला करके कब्जा कर लिया है।
साथ ही नई दिल्ली से इस मुद्दे को सुलझाने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने की बात कही थी। इस पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। साथ ही, मलेशिया नेतृत्व से तथ्यों को बेहतर ढंग से समझने का आग्रह किया था।

नागरिकता कानून पर भी सवाल उठा चुका है मलेशिया
इससे पहले दिसंबर 2019 में में महातिर मोहम्मद ने भारत के नए नागरिकता कानून की आलोचना की थी। उन्होंने इसे मुसलमानों के खिलाफ भेदभावपूर्ण माना था। महातिर ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) की ‘जरूरत पर सवाल उठाया था। उनका कहना था कि इस कानून की वजह से लोग मर रहे हैं। महातिर ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटाने का भी विरोध किया था।

आसियान देशों में भारत का प्रमुख साथी है मलेशिया
इस यात्रा का मुख्य मकसद दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की पकड़ मजबूत बनाना है। मलेशिया आसियान (ASEAN) देशों में भारत का एक प्रमुख साझेदार है।

चिप मेकिंग और सेमीकंडक्टर का हब मलेशिया से भारत चाहता है कि मलेशियाई कंपनियां भारत के सेमीकंडक्टर मिशन में निवेश करें। वहीं, भारत अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’ और ब्रह्मोस मिसाइल के लिए मलेशिया को एक संभावित खरीदार के रूप में देख रहा है।

भारत पॉम ऑयल का बड़ा हिस्सा मलेशिया से खरीदता है
भारत अपनी कुल जरूरत का एक बड़ा हिस्सा ‘पाम ऑयल’ (Palm Oil) मलेशिया से खरीदता है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक चिप्स, पेट्रोलियम गैस और क्रूड ऑयल का आयात होता है। भारत से मलेशिया को मुख्य रूप से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, एल्युमिनियम, मांस (Meat), चीनी, और दवाइयां निर्यात की जाती हैं।

भारत को सबसे बड़ा फायदा ‘खाद्य सुरक्षा’ और ‘ऊर्जा’ में होगा। मलेशिया की कुल आबादी में करीब 7-8% हिस्सेदारी भारतीयों की है, जिनकी संख्या लगभग 27 से 28 लाख है।

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