Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

मोदी सरकार के वे नौ फैसले, जिन पर हुआ खूब बवाल

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 31, 2023
in राष्ट्रीय, विशेष
A A
PM Modi
25
SHARES
845
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने नौ साल पूरे कर लिए. इस दौरान देश ने अनेक सकारात्मक बदलाव देखे. मोदी ग्लोबल लीडर के रूप में उभरे. भारत की साख पूरी दुनिया में बढ़ी. जरूरत पड़ने पर भारत हमलावर हुआ तो कई बार तटस्थ भी देखा गया. जनहित में सरकार ने अपने फैसले वापस भी लिए. इस दौरान केंद्र सरकार ने कुछ ऐसे भी फैसले लिए, जिनका विरोध हुआ. तीखे सवाल भी हुए. केंद्र सरकार के नौ साल पूरे होने पर ऐसे नौ फैसलों की चर्चा, जिनका विरोध हुआ. कई बार आम जनता ने विरोध किया तो कुछ राजनीतिक दलों की ओर से हुआ.

लॉकडाउन : मार्च 2020 में कोरोना महामारी ने दस्तक दे दी थी. पीएम मोदी 19 मार्च को टीवी पर आए और 22 मार्च को एक दिन के जनता कर्फ्यू की विनम्र अपील की. सबसे कहा कि घरों से न निकलें. पूरे देश ने पीएम की अपील सुनी और सड़कों पर सन्नाटा छा गया. दो दिन बाद यानी 24 मार्च को 21 दिन के राष्ट्र व्यापी लॉक डाउन की घोषणा हो गयी. इस फैसले के लिए देश तैयार नहीं था. सब कुछ जहाँ-तहाँ ठप पड़ गया. परदेश में गरीब-मजदूर भूख से बेहाल हो उठे. सब कुछ बंद था तो लोग अपने-अपने गांवों को दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों से पैदल ही चल पड़े. साथ में बीवी-बच्चे बेहाल, पुलिस की लाठी-डंडे से बचते-बचाते चले जा रहे. पैरों में छाले पड़ गए. बाद में सरकार ने थोड़ी ढील दी. व्यवस्था भी की, पर तब तक देर हो चुकी थी.

इन्हें भी पढ़े

el niño

वैज्ञानिकों की प्रचंड भविष्यवाणी, 6 महीने में काल बन जाएगा अल नीनो

September 24, 2026
election

विश्लेषण: चुनाव आयोग के भीतर 14 बार आपत्ति, SIR, वोटर लिस्ट और ECINet को लेकर क्या सामने आया?

September 24, 2026
WCL

स्वच्छता ही सेवा-2026 एवं स्पेशल कैंपेन-6 के तहत वेकोलि ने आयोजित की सामुदायिक गतिविधियां

September 24, 2026
PM Modi

कैबिनेट मंत्रियों संग सेवा तीर्थ में PM मोदी करेंगे ‘चिंतन शिविर’

September 23, 2026
Load More

कानून : सितंबर 2020 में केंद्र सरकार ने किसानों के हित में तीन कानून संसद में न केवल पेश किया बल्कि उसे तीन दिन में पास करवाकर कानून बना दिया. बाद में पंजाब के किसानों ने आंदोलन शुरू किया और देखते ही देखते यह आंदोलन इतना बढ़ गया कि दिल्ली के चारों ओर प्रवेश द्वार पर किसान ही किसान देखे गए. इस आंदोलन को राजनीतिक दलों ने भी खूब हवा दी तो किसान भी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए. इस आंदोलन को विफल करने को सिस्टम ने अनेक प्रयास किए पर कामयाबी नहीं मिली. भीड़ बढ़ती ही गयी. महीनों चले आंदोलन के बाद सरकार ने कानून वापस ले लिया.

जीएसटी : एक देश-एक टैक्स के नाम पर केंद्र सरकार ने एक जुलाई 2017 को जीएसटी लागू कर दिया. इसे लेकर आज भी विवाद बना हुआ है. जीएसटी में लगातार संसोधन हो रहे हैं. ये इतनी तेजी से हो रहे हैं कि सीए तक कन्फ्यूज हैं. उन्हें भी कई बार अंदाजा नहीं मिल पाता कि क्लाइंट के लिए कौन सा एक्शन लिया जाना है. डीजल-पेट्रोल जैसी चीजें अभी भी जीएसटी के दायरे से बाहर हैं. ढेरों विरोध-विवाद के बीच व्यवस्था को लागू हुए इसी जुलाई में छह साल हो जाएंगे. बड़ा व्यापारी समुदाय इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. उसे कई तरह के हिसाब-किताब रखने पड़ रहे हैं.

नोटबंदी : 8 नवंबर 2016 की शाम अचानक पीएम नेशनल टीवी पर आए और हजार-पाँच सौ के नोट को बंद करने की घोषणा कर दी. तर्क दिया गया कि इस कदम से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी. काले धन पर रोक लगेगी. वह सब तो हुआ नहीं लेकिन बैंकों में महीनों तक लंबी-लंबी लाइन लगी. शादी-विवाह जैसे कार्यक्रमों के लिए भी धन निकासी में दिक्कतें थीं. सरकार के इस फैसले की आमजन से लेकर राजनीतिक दलों ने जबर निंदा की. सरकार की तब और किरकिरी हुई जब लगभग पूरी रकम बैंकों में वापस आ गयी. इसी दौरान जन परेशानियों को दूर करने को दो हजार के नोट सरकार ने जारी किए, जिसे अब बंद करने का फैसला लिया गया. इस पूरे मामले पर जनता तो अब मौन है या यूँ कहें कि भूल चुकी है पर, राजनीतिक दल अभी भी हमलावर हैं.

सीएए-एनआरसी : दिसंबर 2019 में केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक लेकर आई. इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान आदि पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न के बाद आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, पारसी समुदाय को नागरिकता देने की व्यवस्था की गयी. इस कानून का विरोध असम से शुरू होकर दिल्ली तक पहुँच गया. यह आंदोलन भी महीनों तक चला. देखते ही देखते राजनीतिक समर्थन मिलने के बाद यह देश व्यापी हो गया. चूँकि यह सुविधा मुस्लिम समुदाय के लिए नहीं थी, इसलिए विरोध के स्वर ज़्याद तेज होते गए. तीखे विरोध के बाद पीएम ने लोगों को आश्वस्त किया कि इन कानूनों से किसी की नागरिकता नहीं जाएगी. इसी वजह से कानून आने के बाद भी इसे लागू नहीं किया गया.

तीन तलाक : केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के हित में तीन तलाक को लेकर एक कानून लागू किया, इसके तहत तीन तलाक को अपराध घोषित कर दिया गया था. इसका कुछ राजनीतिक दलों, मुस्लिम समुदाय और धर्मगुरुओं ने तीखा विरोध किया लेकिन प्रोग्रेसिव महिलाओं ने फैसले का साथ दिया.

धारा 370 और 35 ए : यह मोदी सरकार कड़े फैसलों में से एक माना जाता है, जिसका विरोध आज भी हो रहा है. धारा 370 के तहत कश्मीर के लोगों को विशेष अधिकार थे, जिसे खत्म करके सरकार ने एक देश-एक कानून की नीति का पालन किया. इसी के साथ जम्मू-कश्मीर औ लद्दाख नाम से दो केंद्र शासित प्रदेश प्रकाश में आए. केंद्र के इस फैसले का स्थानीय राजनीतिक दलों ने तीखा विरोध किया, जो आज तक चल रहा है.

गलवान घाटी / एयर स्ट्राइक/ सर्जिकल स्ट्राइक : गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ हुए संघर्ष में हमारे 20 जवान शहीद हुए थे और उधर के 30 जवान मारे गए थे. उरी हमले के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर बड़ी संख्या में आतंकवादियों का सफाया किया तो पुलवामा हमले के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक में पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया. अलग-अलग समय पर हुए इन तीनों ही मामलों में राजनीतिक दलों ने विरोध किया. अनेक सवाल उठाए. अब ये मुद्दे सत्ता-विपक्ष के लिए जवाबी कीर्तन बने हुए हैं.

नया संसद भवन : कोरोना के दौर में ही केंद्र सरकार ने नए संसद भवन की आधारशिला रखी और इसी 28 मई को उद्घाटन कर दिया. शिलान्यास से लेकर अब तक इस भवन का विरोध राजनीतिक दल कर रहे हैं. किसी को यह लगता है कि अभी इस भवन की जरूरत नहीं थी तो कोई कहता है कि जब देश महामारी की चपेट में था, तब सरकार को ऐसा करने से बचना चाहिए था. विरोध के इन्हीं कारणों से उद्घाटन समारोह से करीब 20 विपक्षी दलों ने दूरी बनाए रखी. विपक्ष की माँग थी कि संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति से करवाना चाहिए.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
DUVASU

डुवासु ने नशा मुक्ति पखवाड़े का किया आयोजन

August 4, 2026
court

दिल्ली : पत्थरबाज करेंगे पुलिस थानों की सफाई, हाईकोर्ट ने दिया रोचक आदेश

September 20, 2023
Amit Shah

दिल्ली : गृह मंत्री अमित शाह 1 मई को बोडोफा उपेंद्र नाथ ब्रह्मा मूर्ति का करेंगें अनावरण

April 30, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • उत्तराखण्ड: शहरों का होगा कायाकल्प, 98 छोटे-बड़े शहरों का मास्टर प्लान होगा तैयार
  • ₹25000 वेतन सीमा पर 35 साल में बनेगी कितनी पेंशन, तो हाथ में आएंगे कितने पैसै?
  • जेलेंस्की साहब, थोड़ा आंकड़े तो देख लेते, रूस की इकॉनमी सिर्फ हमारे भरोसे थोड़े ही है!

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.