नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) हरियाणा के चुनावी मैदान में पूरे दमखम के साथ उतरी नजर आ रही है. हरियाणा, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) का गृह राज्य भी है. उनका जन्म हिसार जिले के सिवानी मंडी में हुआ था. लेकिन क्या केजरीवाल को हरियाणा के गृह राज्य होने का फायदा मिल पाएगा? हरियाणा के सटे दिल्ली और पंजाब में तो पहले ही AAP की सरकार है. ऐसे में हरियाणा में अपने पक्ष में माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ने वाली है.
‘आप हमारा साथ नहीं देंगे तो और कौन देगा’
AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल हरियाणा में 2024 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर पहले ही आगाज कर चुके हैं. जींद में 8 जून को उन्होंने एक रोड शो के जरिए हरियाणा में आप के चुनावी आगाज की शुरुआत की. केजरीवाल अपनी ताकत दिखाकर जाट वोटर को पूरी तरह से अपने खेमे में करने की कोशिश कर रहे हैं. रोड शो के दौरान केजरीवाल ने गृह राज्य हरियाणा होने के नाते लोगों से अपील करते हुए कहा था कि ‘आप हमारा साथ नहीं देंगे तो और कौन देगा’ इस रोड शो के जरिए केजरीवाल ने लोगों से भावनात्मक जुड़ाव कायम करने का प्रयास करते यह भी कहा कि हरियाणा मेरी ‘जन्मभूमि’ है जबकि दिल्ली मेरी ‘कर्मभूमि’ है.’
चुनाव हारकर भी AAP को मिला था फायदा
आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी हरियाणा में 2022 में हुए जिला परिषद चुनाव भी लड़ चुकी है, लेकिन इन चुनावों में जहां आम आदमी पार्टी की ज्यादा सीटें तो नहीं आई, लेकिन इस चुनाव से पार्टी ने जमीन स्तर पर लोगों में अपनी पहचान बनाई. आप के 13 प्रतिशत उम्मीदावरों ने जीत दर्ज की. 115 सीटों पर लड़ने वाली आम आदमी पार्टी को 15 सीटों पर जीत मिली. आम आदमी पार्टी के लिए यह जीत काफी बड़ी थी. वहीं नगर निकाय चुनाव में भी आम आदमी पार्टी अपना खाता खोलने में कामयाब रही थी.







