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खालिस्तान समर्थकों को पाकिस्तान से कैसे मिला खाद-पानी?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 7, 2023
in विशेष
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Khalistani Movement
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खालिस्तान बनाने का आइडिया 70 के दशक के अंत में आया. 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के पहले, कुछ विशेष समूहों ने खालिस्तान को लेकर आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी थी. ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद खलिस्तान को लेकर बड़ी घोषणाएं हुईं. इसे बढ़ावा देने काम विदेशों में रहने वाले समुदायों ने किया.

अस्सी के दशक के मध्य के बाद खालिस्तान का विचार एक प्रकार का कट्टरपंथी सिख आतंकवाद ही था. इसके बाद यह एक राज्य के राजनीतिक विचार में तब्दील हो गया, जो 1992-93 तक चला. यह वो दौर था जब खालिस्तान आंदोलन को पूरी तरह से हार मिली थी.

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उसके बाद कई सालों तक खालिस्तान के बारे में जो कुछ भी सुना, वो आवाजें विदेश से आ रही थीं. जिसकी शुरुआत पाकिस्तान से हुई और अभी भी रह-रहकर वही हो रहा है. इससे जुड़े लोग कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी और यूरोप के अन्य देशों जैसे पश्चिमी देशों में पहुंचे. दक्षिण-पूर्व एशिया में मलेशिया में उनका सुरक्षित ठिकाना बना, यही वजह है कि हाल के सालों में खालिस्तान पर सबसे ज्यादा तेज आवाज़ें विदेशों से आईं.

पाकिस्तान ने उनके लिए अपनी सीमाएं और अपने हथियार भंडार खोल दिए. मुझे लगता है कि वो साल 1988 था जब पहली बार एके 47 पंजाब पहुंची. उन्होंने सीमा पार पूरे आंदोलन के दौरान सुरक्षित आश्रय और प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई.

विदेशों में आतंकी आंदोलन नहीं, स्वतंत्रता संग्राम बताया

उस समय पश्चिमी देश भी इस आंदोलन का स्वागत कर रहे थे. उनकी नजर में यह आतंकवादी आंदोलन नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम था. जो कोई भी पश्चिमी देश जाता था भले ही वो सिख था उसे भी सरकार द्वारा परेशान किया जाता था. वो अब इसकी कीमत चुका रहे हैं. क्या आप जानते हैं कि कनाडा में चल क्या रहा है.

सिखों में कनाडा जाने की विशेष चाहत रही है. 1995 के बाद अगर आप आतंकवादी घटनाओं पर गौर करें तो पाएंगे कि जिन लोगों ने इन घटनाओं को अंजाम दिया या जिन घटनाओं में लोगों को गिरफ्तार किया गया, उनमें से बहुत से लोगों को विदेश ले जाने का वादा किया गया. पंजाब में लोग काफी सम्पन्न हैं, फिर भी उनके बच्चे कनाडा जाना चाहते हैं.

यह एक ऐसी आकांक्षा है जिसका आतंकवादी लामबंदियों द्वारा शोषण किया गया है. आज इनमें से अधिकांश आतंकवादी संगठन या तो पाकिस्तान या पश्चिमी देशों में सुरक्षित पनाहगाहों के जरिए काम कर रहे हैं, और सीमा पार से आंदोलनों को हवा-पानी दे रहे हैं.

पाकिस्तान से कनेक्शन

यदि आप इनमें से अधिकतर पश्चिम में बसे खालिस्तानी तत्वों को देखें, तो उनमें से जो प्रमुख हैं, आप उन्हें बार-बार पाकिस्तान की यात्राएं करते हुए देखेंगे. उनमें से कुछ को गिरफ्तार कर लिया गया है और कुछ पर पश्चिमी देशों में पाकिस्तान से धन प्राप्त करने का आरोप भी लगा है.

भारतीय उच्चायोगों के बाहर प्रदर्शनों होने पर ऐसे दस्तावेजी मामले सामने आए हैं जिसमें देखा किया कि पाकिस्तान दूतावास ने बड़ी संख्या में लोगों को खालिस्तान प्रदर्शनों के लिए भेजा.

इस मामले में एक ट्रेंड यह भी देखा किया गया कि वो है भारत में खालिस्तान विचारधारा को मुख्यधारा में लाने की कोशिश. पंजाब में जो कुछ भी होता है, हर आंदोलन, हर तरह की अव्यवस्था, हर तरह की घटना का सीधा संबंध खलिस्तान से होता है. यह पूरा विचार डर पैदा करने का है कि 1980 के दशक की वापसी हो रही है.

मुद्दों से भटकाव

पंजाब में परेशानी है, लेकिन राज्य में कई अन्य मुद्दे भी हैं, जिनसे ध्यान भटकाया जा रहा है. यह पंजाब के लिए अनोखा नहीं है. कश्मीर में भी यही होता है. यदि आज यह सुरक्षा के लिए ख़तरा है, तो इसका कारण यह नहीं है कि खालिस्तान आंदोलन अधिक मजबूत है. ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्य कमजोर और अधिक भ्रष्ट हो गई है.

राज्य से मेरा तात्पर्य राज्य सरकार से नहीं है. मेरा तात्पर्य राज्य और केंद्र सरकारों सहित संपूर्ण भारतीय राज्य से है. ये अराजकता और राजनीतिक शून्यता के कारण पैदा हुए अवसर हैं.

इसके अलावा, आपके सामने महत्वपूर्ण संकट हैं. आपके पंजाब में करीब 20 मिलियन बेरोजगार युवा हैं. आपके उद्योग संकट में हैं. आपके यहां भ्रष्टाचार और अविश्वास का माहौल है. युवा रोजगार की तलाश में हैं. चाहे वह धर्मनिरपेक्ष किसान आंदोलन के रूप में आए या कुछ और. यह कट्टरपंथी मंचों के माध्यम से शिकायतों की अभिव्यक्ति है.

 

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