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Home दिल्ली

दिल्लीवालों के लिए अभी भी सबसे बड़ा खतरा है ये बीमारी!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 4, 2023
in दिल्ली
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टीबी उन्मूलन
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नई दिल्ली: कोविड आया और चला गया, लेकिन टीबी अभी भी जानलेवा बनी हुई है। मौजूदा समय में देश की राजधानी दिल्ली में औसतन हर साल एक लाख से ज्यादा टीबी के मामले आ रहे हैं। साथ ही औसतन दो हजार की जान भी हर साल जा रही है। डॉक्टरों के सामने दिक्कत वाली बात यह है कि अब टीबी के मरीजों पर दवाओं का असर भी कम हो रहा है और यह भी एक मौत की वजह बन रही है।

नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ट्यूबरक्लोसिस एंड रेस्पिरेटरी डिजीज के डायरेक्टर डॉ. आर. के. दीवान ने कहा कि दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में टीबी बढ़ने की वजह माइग्रेंट पॉपुलेशन है। इन शहरों की स्थिति यह है कि जहां पूरे देश में एक लाख की आबादी पर 210 से 220 मामले टीबी के हैं तो वहीं दिल्ली और मुंबई में 500 से ज्यादा है।

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ये है बीमारी बढ़ने की वजह

डॉक्टर दीवान ने कहा कि 1990 के बाद से लगातार टीबी के मामले कम हो रहे थे, लेकिन कोविड के दौरान सारे नैशनल हेल्थ प्रोग्राम व इलाज लगभग बंद हो गया। दो साल पूरी तरह से प्रभावित रहा। किसी की दवा छूट गई, किसी की जांच ही नहीं हुई। इसलिए इसका असर अब दिख रहा है। बच्चों में टीबी बढ़ने की वजह डायग्नोस आसान नहीं होना भी है। इन्हें खांसी कम होती है, लेकिन वजन नहीं बढ़ता। इस ओर जब तक ध्यान जाता है, तब तक बीमारी बढ़ जाती है।

बच्चों में भी सामने आ रहे केस

आकाश हॉस्पिटल के रेस्पिरेट्री विभाग के एक्सपर्ट डॉ. अक्षय बुद्धराजा ने कहा कि यह बीमारी अब केवल गरीबों की नहीं रही। स्कूल जाने वाले अपर मिडिल क्लास के बच्चों में भी हो रही है। जो पहले महीने में 3 से 4 मरीज आते थे, अब 15 साल से कम उम्र के 8 से 10 मरीज हर महीने आ रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह उनका बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल भी है।

हवा में फैल जाता है संक्रमण

डॉ बुद्धराजा ने कहा कि चूंकि टीबी हवा से होने वाला संक्रमण है। इसलिए टीबी के बैक्टीरिया संक्रामक मरीज द्वारा खांसने या छींकने पर हवा में चले जाते हैं। बुनियादी वेंटिलेशन, प्राकृतिक प्रकाश (यूवी प्रकाश टीबी बैक्टीरिया को मारता है) और अच्छी साफ-सफाई जैसे खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढंकना संक्रमण के फैलने की संभावना को कम करता है।

बचाव के लिए क्या है जरूरी

डॉक्टर का कहना है कि महत्वपूर्ण बात यह है कि टीबी से बचने के लिए इम्यूनिटी को मजबूत बनाना जरूरी है। ऐसा मानना है कि मजबूत इम्युनिटी सिस्टम वाले लोग लगभग 60 परसेंट टीबी के बैक्टीरिया को खत्म कर सकते हैं। कोविड-19 के दौरान घर में बंद रहने को मजबूर हुए लोगों की इम्युनिटी कमजोर हुई है। इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए स्वस्थ खानपान, नियमित रूप से एक्सरसाइज करने और हर दिन कम से कम 8 घंटे सोना बहुत जरूरी है।

​दवा का असर हो रहा है कम

डॉक्टर दीवान ने कहा कि मरीज पूरी दवा नहीं लेते, डोज पूरा नहीं करते, बीच में इलाज छोड़ देते हैं, जिसकी वजह से ऐसे मरीजों पर दवाओं का असर कम हो जाता है, जिसे मल्टी ड्रग रजिस्टेंस (MDR) कहा जाता है। दवा का असर कम होने से बीमारी गंभीर हो जाती है। उन्होंने बताया कि अब एक नई दवा पर ट्रायल चल रहा है, जिसका रिजल्ट 90 परसेंट तक आया है। वहीं Ni-kshay पोर्टल के अनुसार ड्रग्स रजिस्टेंस टीबी से पूरे देश में 2022 में 8208 यानी 7.7% मौत हुई थी, जबकि इस साल मई तक 3327 यानी 7.4% परसेंट मौत हो चुकी है।

पिछले चार दशक से टीबी के मामले कम हो रहे थे, लेकिन अब अचानक टीबी के मामले बढ़ने की वजह कोविड के दौरान नैशनल हेल्थ कार्यक्रम और इलाज लगभग बंद हो गया था। दो साल की इस अवधि में कई लोग ऐसे थे, जिनकी दवा छूट गई या फिर जांच ही नहीं हुई। उसका असर अब नजर आने लगा है। इसी तरह बच्चों में टीबी बढ़ने की वजह ये भी है कि उनमें लक्षण आसानी से पता नहीं चलता। बच्चों को टीबी होने पर खांसी नहीं होती। लेकिन वजन नहीं बढ़ता। जब इस ओर ध्यान जाता है, तब तक बीमारी बढ़ जाती है।

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