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Home विश्व

आखिर कौन से ‘खजाने’ की खातिर चांद पर खिंचे जा रहे तमाम बड़े देश!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 14, 2023
in विश्व
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Mission
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नई दिल्ली. चंद्रयान-3 के लॉन्च होने के कुछ हफ्तों बाद, रूस ने भी करीब 50 सालों में चांद पर अपनी पहला प्रयोग शुरू कर दिया है. लूना-25, 16 अगस्त को 100 किमी ऊंची चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने और 21 अगस्त को बोगुस्लाव्स्की क्रेटर के उत्तर में चंद्रमा पर उतरने के लिए तैयार है. चंद्रयान के लैंडर, विक्रम और रोवर, प्रज्ञान के 23 अगस्त को चंद्रमा पर उतरने की उम्मीद है. इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन सहित कई प्रमुख शक्तियां भी धरती के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह में मौजूद तत्वों के बारे में अधिक जानने की दौड़ में शामिल हैं. नासा ने “चांद में मौजूद खजाने ” के बारे में बात की है और चंद्रमा पर खनन की संभावना का पता लगाया है.

तमाम बड़ी ताकतों की रुचि चांद में क्यों जाग रही है

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चंद्रमा, जो हमारी धरती से 3,84,400 किमी दूर है, अपनी धुरी पर पृथ्वी की डगमगाहट को नियंत्रित करता है जिससे ज्यादा स्थिर जलवायु सुनिश्चित हो पाती है. इसकी वजह से ही दुनिया के महासागरों में ज्वार-भाटा आता है. वर्तमान सोच कहती है कि इसका निर्माण करीब 4.5 अरब साल पहले एक विशाल वस्तु के पृथ्वी से टकराने से हुआ था. टक्कर से निकले मलबे ने मिलकर चंद्रमा का निर्माण किया.

तापमान

इसके तापमान में भी जमीन आसमान का अंतर देखने को मिलता है, जब पूर्ण सूर्य होता है तो इसका तापमान 127 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है, वहीं अंधेरे में यहां तापमान शून्य से 173 डिग्री सेल्सियस नीचे तक गिर जाता है. चंद्रमा का बाह्यमंडल सूर्य से आने वाले विकिरण से सुरक्षा भी नहीं प्रदान करता है.

पानी

नासा के अनुसार, चंद्रमा पर पानी की पहली निश्चित खोज 2008 में चंद्रयान -1 द्वारा की गई थी, जिसने चंद्रमा की सतह पर फैले और ध्रुवों पर केंद्रित हाइड्रॉक्सिल अणुओं का पता लगाया था. पानी मानव जीवन के लिए कितना अहम है यह बताने की ज़रूरत नहीं है और यह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का स्रोत भी हो सकता है – और इसका उपयोग रॉकेट ईंधन के लिए किया जा सकता है

हीलियम-3

हीलियम-3, हीलियम का एक आइसोटोप (आइसोटोप ऐसे परमाणु होते हैं जिनमें प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है लेकिन न्यूट्रॉन की संख्या भिन्न होती है और इसलिए उनके भौतिक गुण अलग-अलग होते हैं, लेकिन रासायनिक गुण समान होते हैं) है, जो धरती पर बहुत ही दुर्लभ है. लेकिन नासा का कहना है कि चांद पर इसके लाखों टन मात्रा में होने का अनुमान है.

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, यह आइसोटोप एक फ्यूजन रिएक्टर में परमाणु ऊर्जा प्रदान कर सकता है, लेकिन चूंकि यह रेडियोधर्मी नहीं है, इसलिए यह खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न नहीं करेगा.

धरती पर पाए जाने वाले दुर्लभ खनिज

बोइंग के मुताबिक, धरती पर पाए जाने वाले दुर्लभ खनिज जिनका उपयोग स्मार्टफोन, कंप्यूटर और आधुनिक तकनीकों में किया जाता है, वह चंद्रमा पर मौजूद हैं, जिनमें स्कैंडियम, येट्रियम और 15 लैंथेनाइड्स शामिल हैं.

चांद पर खनन किस तरह होगा

चांद पर खनन का काम कैसे होगा यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है, लेकिन इसके लिए चांद पर किसी तरह का इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा. मून की स्थिति को देखते हुए सारी मेहनत का काम रोबोट से करवाया जाएगा, वैसे चांद पर पानी हुआ तो इंसान लंबे वक्त तक वहां रुक पाएगा.

चंद्रयान-3 का मकसद क्या हासिल करना है

चंद्रयान-3, दरअसल चंद्रयान-2 मिशन को ही आगे बढ़ाता है. जो चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास करेगा. इस मिशन का मकसद चंद्रमा पर सटीक लैंडिंग हासिल करने में भारत की तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन करना है. चंद्र यान, चंद्रमा पर घूमने और खोज करने की अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के लिए इसकी सतह पर एक रोवर तैनात करेगा. रोवर चंद्रमा की संरचना और भूविज्ञान पर डेटा एकत्र करेगा, जिससे वैज्ञानिकों को उपग्रह के इतिहास और विकास के बारे में अधिक जानकारी मिल सकेगी.  यही नहीं चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला मिशन भी होगा. यह क्षेत्र अपने स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्रों के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र है. जहां पानी की बर्फ की उपस्थिति का अनुमान लगाया जा रहा है.

रूस के चांद पर जाने का क्या मकसद है

रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोजकोसमोस का कहना है कि, लूना-25 चांद पर एक साल रहेगा, इस दौरान इसका काम सैंपल लेना और यहां की मिट्टी की जांच करना होगा, इसके साथ ही एक दीर्घावधि वाली वैज्ञानिक शोध भी संचालित की जाएगी. एएफपी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रूसी अंतरिक्ष विशेषज्ञ विटाली इगोरोव के अनुसार, सोवियत रूस के बाद का यह पहला मिशन है, जिसमें किसी खगोलीय पिंड पर एक उपकरण लगाने का प्रयास किया गया है. यह मिशन रूसी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अहम इसलिए भी है, क्योंकि धन का अभाव, भ्रष्टाचार घोटालों और संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ रूस का मुकाबला अरबपति एलोन मस्क के स्पेसएक्स जैसी निजी पहल से भी है.

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