हल्द्वानी : उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की बखिया बार-बार उखड़ती रहती हैं। बीमार हो चुकी इन सेवाओं की पोल इस बार इलाज के लिए भटक रहे अअअअसात दिन के मासूम ने खोली हैं। पैदा होने के दो दिन बाद से ही मासूम नाभि में गांठ के इलाज के लिए दो मेडिकल कॉलेज, एक बेस अस्पताल और ऋषिकेश एम्स से बैरंग लौटकर हल्द्वानी के महिला अस्पताल पहुंचा है।
यहां भी संसाधनों के अभाव में बच्चे का इलाज नहीं होने वाला है। हालांकि हल्द्वानी महिला अस्पताल प्रबंधन ने मानवता दिखाते हुए नवजात को एसएनसीयू में भर्ती कर लिया है। नैनीताल के ओखलकांडा ब्लॉक निवासी बालम सिंह(पेशे से चालक) और प्रेमा मटियाली के घर आठ सितंबर को पुत्र का जन्म हुआ।
जांच में बच्चे की नाभि में गांठ पाई गई। सालों से गांव के बदहाल अस्पतालों को देख रहे मटियाली दंपति 10 सितंबर को नवजात को लेकर सीधे हल्द्वानी के एसटीएच पहुंचे। एसटीएच में पीडियाट्रिक सर्जन नहीं एसटीएच में डॉक्टर ने सर्जरी का हवाला देते हुए नवजात को भर्ती कर लिया। बालम का आरोप है कि तीन दिन बाद पीडियाट्रिक सर्जन नहीं होने की बात कहते हुए एसटीएच से नवजात को एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया। उधर, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के प्राचार्य डॉ अरुण जोशी ने घटना की जानकारी से इंकार किया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
मासूम को आठ दिन से नहीं मिला मां का दूध बालम ने बताया कि आठ दिन हो गए हैं। उनके नवजात बेटे ने अभी तक मां का दूध भी नहीं पिया है। मौजूदा हालात के कारण उनका हौसला कमजोर होता जा रहा है। उधर, पत्नी प्रेमा भी बुरी तरह टूट गई है। बालम बताते हैं कि महिला अस्पताल में बच्चे को एसएनसीयू में भर्ती कर लिया गया है। सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया है।
एम्स और दून अस्पताल में नहीं मिला बेड
14 सितंबर को हल्द्वानी एसटीएच से रेफर होने के बाद बालम, उनकी पत्नी और दो भाई तड़के करीब 330 बजे एम्स ऋषिकेश पहुंचे। बालम बताते हैं ऋषिकेश एम्स में भी उन्हें निराशा ही मिली। यहां डॉक्टर तो मौजूद थे लेकिन बेड न होने के कारण नवजात को भर्ती नहीं किया।
वहां कहा गया कि अस्पताल में डेंगू के इतने मरीज हैं कि एक बेड पर दो-दो मरीज लिटा रखे हैं। इसके बाद बालम मासूम बेटे को लेकर फिर इलाज के लिए देहरादून में दून अस्पताल पहुंचे। बकौल बालम सिंह, वहां भी डॉक्टरों ने उनके नवजात बेटे को भर्ती करने से इनकार कर दिया। कहा कि यहां न तो पीडियाट्रिक सर्जन है, ना ही बेड उपलब्ध हैं।







