नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (आप) के स्वाति मालीवाल को राज्यसभा भेजने के फैसले ने सभी को चौका दिया है। हालांकि जानकार मानते है कि आप ने आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए ये बड़ा दांव चला है। आप के दिल्ली से तीन और पंजाब से सात राज्यसभा सदस्य हैं। कुल 10 सांसदों में एक भी महिला सांसद नहीं है। पार्टी ने महिला विरोधी तमगे को हटाने के लिए स्वाति मालीवाल को दिल्ली से राज्यसभा भेजने का फैसला किया है।
स्वाति मालीवाल भी दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष बनने के बाद से मुखर होकर महिला सुरक्षा और अधिकारों की बात करती रही हैं। वह आप की दिल्ली सरकार के खिलाफ भी आवाज उठाने से नहीं चूकीं। दिल्ली महिला आयोग में रहते हुए उन्होंने आठ साल में 1.7 लाख केस देखे। महिला सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम उठाएं, खुद सड़कों पर भी उतरीं। उन्होंने मणिपुर में महिलाओं के साथ हुई हिंसा को लेकर भी आवाज उठाई। हिंसाग्रस्त मणिपुर का दौरा भी किया। आम आदमी पार्टी भी उच्च सदन में इसका फायदा उठाना चाहती है। आप को उम्मीद है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में महिला मतदाताओं को इससे लुभाने में आसानी होगी।
दिल्ली में महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ी
स्वाति मालीवाल का जन्म गाजियाबाद में हुआ, लेकिन उनकी शिक्षा-दीक्षा अलग-अलग शहरों में हुई। बेहद कम उम्र से ही मालीवाल महिलाओं के सामाजिक और समानता के अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं। वह आप के गठन और जनलोकपाल आंदोलन के पहले से ही केजरीवाल के सामाजिक कार्यों से जुड़ी रहीं। आप की सरकार बनी तो उन्हें दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने एसिड अटैक, यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर मुद्दों का समाधान को लेकर लगातार आवाज उठाई।







