नई दिल्ली। भगवान राम इस धरती के कण-कण में बसते हैं। प्राचीन काल से आजतक समय-समय पर शासकों/राजाओं ने भगवान राम के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और राम भक्ति का परिचय अपनी जारी की गई मुद्राओं के माध्यम से दिया। इनमे मुस्लिम शासक भी शामिल हैं जिन्होंने अपनी विनिमय की मुद्राओं पर भगवान राम का चित्र अंकित किया। इन दुर्लभ मुद्राओं के माध्यम से हिंदू राजाओं से लेकर मुस्लिम शासकों ने भी भगवान राम के प्रति अपनी अनन्य भक्ति को प्रदर्शित करने का कार्य किया।
स्वर्ण, रजत एवं ताम्र धातु के रूप में जारी की गई इन मुद्राओं में राजाओं/शासकों ने भगवान श्रीराम के क्षत्रिय रूप से लेकर माता सीता के वनगमन और राम दरबार तक के चित्र अंकित किए हुए हैं। भगवान राम के प्रति सिक्कों के माध्यम से अपनी भक्ति का परिचय देने में केवल हिंदू राजा ही नहीं बल्कि मुस्लिम शासक भी पीछे नहीं रहे।
वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि समय-समय पर राजाओं द्वारा जारी की गई ऐसी मुद्राएं बहुत ही कम मिलती हैं जिनपर भगवान राम को अंकित कराया गया है। जैन ने बताया कि वहीं सिक्कों/मुद्राओं की दुनिया की बात करें तो अनेकों ऐसे प्रमाण मिलते हैं जिनके माध्यम से भगवान राम के प्रति अपनी श्रद्धा एवं भक्ति को परिलक्षित किया गया है। इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन का कहना है कि भगवान राम प्राचीन काल के सिक्कों पर भगवान राम की प्रासंगिकता दिखाई देती है।
ये मिले प्रमाण
1. अहिछत्रा के पांचाल राज्य के समकालीन ताम्र धातु की बनी प्ले पर भगवान श्रीराम की धनुर्धारी छवि को बड़े ही सुंदर ढंग से उकेरा गया है।
2. कालांतर में कुषाण वंश के प्रतापी राजा हुविष्क ने देवी-देवताओं के चित्रों के साथ अपनी मुद्राओं पर भगवान श्रीराम का अंकन कराया। सिक्कों पर श्रीराम की यह छवि सबसे प्राचीन मिलती हैं। इसका प्रचलन द्वितीय सदी के पूर्वाध में किया गया। एक ओर गजरोहि शासक का चित्र है तो दूसरी ओर धनुर्धारी श्रीराम के चित्र को दर्शाया गया है। यह सिक्का 16 ग्राम वजनी था।
3. 12वीं सदी में अजमेर के राजा विग्रहराज द्वारा जो स्वर्ण मुद्राएं चलन में लाए गए उनमें एक ओर भगवान श्रीराम के चित्र व उनके नामोल्लेख श्रीराम के साथ अंकित हैं। वहीं मुद्रा के दूसरी ओर देवनागरी में राजा का नाम विग्रहराज देव लिखा गया है। यह स्वर्ण मुद्रा चार ग्राम वजनी थी।
4. 16वीं सदी में मुगल शासक मौहम्मद अकबर ने भगवान श्रीराम की छवि वाले ऐसी मुद्रा को चलन में लाया जिस पर भगवान राम वनगमन में माता सीता के साथ मौजूद हैं। इस मुद्रा के एक ओर परिशयन लेख भी है। मुस्लिम शासक द्वारा भगवान राम का मुद्रा पर अंकन करना धार्मिक सहिष्णुता का परिचायक रहा होगा।
5. 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में दक्षिण भारत कुछ शासकों ने भगवान राम की छवि को अपनी मुद्राओं पर अंकित करा अपनी राम भक्ति का परिचय दिया। इनमें तंजोर के नायक एवं विजयनगर के शासकों ने इस प्रकार की मुद्राओं का चयन किया। इस तरह के सिक्कों पर राम दरबार को दर्शाया गया है। ये स्वर्ण मुद्राएं 1.690 ग्राम वजनी की थी। वहीं 17वीं शताब्दी में भी हिंदु राजाओं ने अपनी विनिमय की मुद्राओं पर भगवान राम के चित्र को अंकित करा अपनी राम भक्ति का परिचय दिया।






