मुंबई: इस लोकसभा चुनाव में कहीं भाभी अपने देवर को चुनौती दे रही है, तो कहीं पर ननद अपनी भाभी को चैलेंज दे रही है। रिश्तों के बीच यह मुकाबला जमकर होने वाला है। धाराशिव और बारामती सीट पर महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देशभर की नजरें टिकी है। संभव है कि आने वाले दिनों में कुछ और भी रिश्ते दांव पर लगे दिखाई दे।
उस्मानाबाद लोकसभा चुनाव क्षेत्र यानी धाराशिव में पूर्व मंत्री डॉ. पद्मसिंह पाटील की बहू और बीजेपी के विधायक राणा जगजीत सिंह पाटील की पत्नी अर्चना पाटील को अजित पवार की एनसीपी ने उम्मीदवार बनाया है। तो उनके सामने उद्धव ठाकरे ने ओमराजे निंबालकर को उतारा है।
वैशाली दरेकर कल्याण में एक आक्रामक और अध्ययनशील चेहरे के रूप में जानी जाती हैं। अब दारेकर को श्रीकांत शिंदे के खिलाफ मैदान में उतारे जाने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि कल्याण लोकसभा सीट पर जीत किसकी होगी।
वैशाली दरेकर एकनाथ शिंदे के खिलाफ आक्रामक बयान देने के लिए जानी जाती हैं। ठाकरे ने उन्हें एक आक्रामक उम्मीदवार और एक शिक्षित चेहरे के रूप में मैदान में उतारा है। वैशाली ने कॉमर्स से ग्रैजुएशन किया है।
वैशाली को शिवसेना का कट्टर कार्यकर्ता माना जाता है। वह उप शाखा संगठक भी हैं। इस सीट पर पिछले कुछ दिन से ठाकरे समूह के पूर्व संपर्क प्रमुख सुभाष भोईर के नाम पर मुहर लगने की बात हो रही थी। हालांकि, सभी को पीछे छोड़ते हुए दरेकर को टिकट मिल गया है।
वैशाली दरेकर पिछले 19 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। 2005 में वह पहली बार शिवसेना (तत्कालीन) के टिकट पर कल्याण-डोंबिवली से नगरसेवक चुनी गई थीं। उन्होंने 2005 में जब कल्याण-डोंबिवली नगर निगम का चुनाव लड़ा था। वह उस समय सबसे कम उम्र की नगरसेवक के रूप में जानी जाती थीं। इसके बाद वह महाराष्ट्र नवसेना निर्माण में शामिल हो गईं और राज ठाकरे ने उन्हें 2009 में कल्याण लोकसभा सीट से उम्मीदवार बना दिया।
वैशाली दरेकर को 2009 के चुनाव में महज 1.63 लाख वोट मिले थे। वह शिवसेना के तत्कालीन उम्मीदवार आनंद परांजपे से हार गई थीं। 2010 के महानगर पालिका चुनाव में वह नगरसेवक बन गईं और कल्याण महानगरपालिका में विपक्षी नेता के रूप में काम किया।
2018 में वैशाली दरेकर ने राज ठाकरे की पार्टी मनसे छोड़ दी और शिवसेना का हाथ थाम लिया। जब शिवसेना टूटी, तब वह उद्धव ठाकरे गुट के साथ रहीं। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले उनकी पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात हुई थी। सोचा नहीं था कि पार्टी उन्हें यह मौका देगी। उन्होंने कहा कि इससे पहले श्रीकांत शिवसेना के नाम की वजह से जीते हैं। अब वही शिवसैनिक मेरे साथ खड़े हैं और मैं जीतकर आऊंगी।
उस्मानाबाद में देवर बनाम भाभी
ओमराजे और अर्चना के बीच देवर-भाभी का रिश्ता है। अर्चना पाटील की उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए अजित पवार की एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि अर्चना पाटील के रूप में उन्होंने एक मजबूत उम्मीदवार उतारा है। वहीं ओमराजे निबांलकर मौजूदा सांसद है। शिवसेना में शिंदे की बागवत के बाद भी उन्होंने अपनी निष्ठा नहीं बदली और उद्धव ठाकरे के साथ ही बने रहे। उद्धव ने उन्हें फिर से उम्मीदवारी देकर उन्हें उनकी निष्ठा का इनाम दिया है।
बारामती में हॉट मुकाबला
बारामती सीट पर करीब 55 सालों से शरद पवार परिवार का कब्जा है। बारामती लोकसभा सीट पवार परिवार का गढ़ रहा है। शरद पवार ने 1967 में पहली बार बारामती विधानसभा से चुनाव जीता था। अजित पवार भी एक बार इसी मतदान क्षेत्र से लोकसभा का चुना लड़ा था। सन 2009 में शरद पवार ने पहली बार बारामती लोकसभा से अपनी बेटी सुप्रिया को चुनाव लड़ाया था। तब से उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व सुप्रिया करती आ रही है। इस बार यहां से अजित पवार ने अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को चुनाव मैदान में उतारा है, तो शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया को फिर से मौका दिया है।
पहली बार पवार परिवार के दो सदस्य आमने-सामने
सुप्रिया सुले अजित पवार की चचेरी बहन हैं। इस तरह से यहां पर ननद और भाभी के बीच मुकाबला है। यहां पर पहली बार ऐसा हो रहा है कि पवार परिवार के दो सदस्य एक ही मतदान क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। सुले से मुकाबला करने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने लड़ाई अपने हाथ में ले ली है। इस पर सुले का कहना है उन्हें पूरा विश्वास है कि वे चुनाव जीतेगी। यहां ननद-भौजाई की ही नहीं चाचा-भतीजा शरद पवार और अजित पवार की प्रतिष्ठा भीं दांव पर है। देखना बेहद दिलचस्प होगा कि चाचा शरद पवार और भांजा अजित पवार में कौन बाजी मारता है।







