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Home राजनीति

सबसे बड़े राज्य का सबसे कठिन द्वार, बीजेपी कैसे करेगी छठा चरण पार?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 25, 2024
in राजनीति, राज्य
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नई दिल्ली। देश में सियासी तौर पर सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है, जो आबादी और लोकसभा सीट दोनों ही लिहाज से है. लोकसभा चुनाव के छठे चरण में उत्तर प्रदेश की 14 सीटों पर शनिवार को मतदान है. बीजेपी के लिए पिछले चुनाव में सबसे कठिन चरण यही रहा था, जहां पर विपक्ष ने कांटे की टक्कर दी ही नहीं बल्कि पांच सीटें भी जीतने में कामयाब रही थी. जातीय बिसात पर खड़े पूर्वांचल में सपा ने गैर-यादव ओबीसी का दांव चला है तो बीजेपी ने भी सवर्ण कार्ड खेल है. इस तरह बीजेपी और सपा दोनों ही एक दूसरे की राह में कांटे बिछा दिया है.

लोकसभा चुनाव के छठे चरण में यूपी की 14 सीटों पर चुनाव है. सुल्तानपुर, प्रतापगढ़,फूलपुर, इलाहाबाद, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संतकबीरनगर, लालगंज, आजमगढ़, जौनपुर, मछलीशहर और भदोही सीट शामिल है. 2019 में इन 14 लोकसभा सीटों में से बीजेपी 9 सीटें ही जीती थी जबकि पांच सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा था. बसपा चार सीटें- श्रावस्ती, अंबेडकरनगर, लालगंज और जौनपुर सीटें जीती थी और सपा एक सीट आजमगढ़ ही जीत सकी थी. इस तरह से बीजेपी के लिए यह बड़ा झटका था. हालांकि, सपा-बसपा मिलकर चुनाव लड़ी थी, लेकिन इस बार दोनों अलग-अलग हैं. कांग्रेस-सपा मिलकर जरूर चुनावी मैदान में है.

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सपा ने बिछाई ओबीसी की बिसात

छठे चरण की सियासी पिच पर सपा और बीजेपी दोनों ही जातीय की बिसात बिछा रखी है. छठे चरण की 14 में से 12 सीट पर सपा चुनाव लड़ रही है जबकि कांग्रेस इलाहाबाद में कांग्रेस और टीएमसी भदोही सीट पर किस्मत आजमा रही है. सपा ने एक को छोड़कर ज्यादातर सीटों पर गैर-यादव ओबीसी प्रत्याशी को उतारकर बीजेपी की राह में कांटे बो दिए हैं. सपा ने केवल एक डुमरियागंज में ही अगड़ी जाति का प्रत्याशी उतारा है बाकी सभी सीटों पर उसने पिछड़ों और दलितों को टिकट दिया है.

सपा ने श्रावस्ती, बस्ती, प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर सीट पर कुर्मी समुदाय से सपा ने प्रत्याशी उतारे हैं जबकि संतकबीरनगर और सुल्तानपुर सीट पर निषाद जाति के कैंडिडेट हैं. इसके अलावा फूलपुर और जौनपुर में मौर्य समाज के उम्मीदवारों को टिकट दिया है. इस चरण में लालगंज और मछलीशहर दोनों ही सुरक्षित सीटें हैं, जहां पर पासी समुदाय के प्रत्याशी उतारे हैं. आजमगढ़ में सपा मुखिया अखिलेश के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव चुनाव लड़ रहे हैं जबकि डुमरियागंज सीट पर अगड़ी जाति के भीष्म शंकर तिवारी उर्फ कुशल तिवारी को टिकट दिया है. इंडिया गठबंधन की सहयोगी पार्टियों कांग्रेस ने इलाहाबाद में भूमिहार बिरादरी के उज्जवल रमण सिंह और भदोही में तृणमूल कांग्रेस ने ललितेश पति त्रिपाठी को उतारा है.

बीजेपी का सवर्णों पर दांव

बीजेपी ने छठे चरण की सभी 14 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर सियासी रणभूमि में है. बीजेपी ने इस चरण की 12 सामान्य सीटों पर अधिकांश अगड़ी जातियों से प्रत्याशियों को टिकट दिया है. सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, इलाहाबाद और बस्ती सीट पर बीजेपी ने ब्राह्मण कैंडिडेट दिए हैं जबकि जौनपुर और डुमरियागंज सीट पर ठाकुर बिरादरी के प्रत्याशी उतारे हैं. आजमगढ़ में यादव, प्रतापगढ़ में तेली, फूलपुर में कुर्मी जबकि संत कबीर नगर और भदोही में मल्लाह समुदाय के प्रत्याशी दिया है.

सपा की नई सोशल इंजीनियरिंग

उत्तर प्रदेश में पिछले कई चुनावों से गैर-यादव पिछड़ों की गोलबंदी कर बड़ी सफलता हासिल करती आ रही बीजेपी के सामने सपा की इस नयी व्यूहरचना के चलते परेशानी खड़ी हो गयी है. सपा की ओर से बड़ी संख्या में गैर-यादव पिछड़े प्रत्याशियों के मैदान में उतरने के बाद अब बीजेपी को अपने पुराने समीकरण बिगड़ने की आशंका है. राजनीतिक विश्लेषकों की मान तो बीजेपी ने जिस तरह से गैर-यादव ओबीसी वोटों के अपने पाले में करके दो लोकसभा और दो विधानसभा चुनाव जीता था, जिसमें कुर्मी, मल्लाह और मौर्य बीजेपी के हार्डकोर वोट माने जाते रहे हैं. सपा ने बीजेपी के ब्राह्मण और ठाकुर कैंडिडेट के सामने गैर-यादव ओबीसी का दांव चला है. सपा ने पीडीए फॉर्मूले को पूरी तरह से जमीन पर उतारने की कोशिश इस चुनाव में की है, जो बीजेपी के लिए चिंता का सबब बन सकी है.

बीजेपी कैसे पार पाएगी छठा चरण

बीजेपी अपने सवर्ण वोटबैंक को साधे रखते हुए ओबीसी और दलित वोटों को जोड़ने की रणनीति पर छठे चरण में काम कर रही है. छठे चरण में पिछड़े के असर को देखते हुए भाजपा की ओर से चुनाव प्रचार में बड़े पैमाने पर सहयोगी दलों के पिछड़े नेताओं के साथ ही अपनी पार्टी के भी इस वर्ग के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों व नेताओं का प्रयोग किया गया है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को यादव बहुल जौनपुर, आजमगढ़, फूलपुर में लाया गया है तो निषाद बहुल सुल्तानपुर, भदोही व अंबेडकरनगर में निषाद पार्टी के डॉ. संजय निषाद की जनसभाएं कराई गईं.

राजभरों की अधिक तादाद वाले आजमगढ़, लालगंज, जौनपुर, मछलीशहर और बस्ती में सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर की रैलियां रखी गई थी. जौनपुर में जहां इंडिया गठबंधन ने मौर्य-कुशवाहा समुदाय के प्रभावी नेता बाबू सिंह कुशवाहा को उतारा है तो बीजेपी ने महान दल के अध्यक्ष केशव देव मौर्य की रैली कराकर सियासी समीकरण साधने की कवायद की है. बीजेपी ने जनवादी क्रांति पार्टी के अध्यक्ष संजय चौहान को अपने पाले में लाने में सफलता प्राप्त की है और अब उनकी सभाएं नोनिया बिरादरी की अच्छी तादाद वाली सीटों- लालगंज, भदोही, जौनपुर, संतकबीरनगर व आजमगढ़ रखी गई. इसके अलावा जौनपुर में धनंजय सिंह के भी बीजपी ने अपने साथ मिलाकर जौनपुर और मछली शहर सीट पर लगाया है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी की रणनीति कितना कारगर साबित होती है?

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