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भारतीय सेना को मिली नए सुसाइडल ड्रोन की सौगात, सेना के लिए बनेगा ब्रम्हास्त्र

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 15, 2024
in राष्ट्रीय
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Nagastra-1
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नई दिल्ली: भारतीय सेना लगातार अपने बेड़े को मजबूत कर रही है जल्द ही विशेष प्रकार का मानव रहित ड्रोनमिलने से भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ने वाली है, इस मानव रहित हवाई यान (यूएवी) का नाम ‘नागास्त्र’ है, जो कि भारतीय सेना के लिए किसी ब्रह्मास्त्र से कम नहीं होगा.

नागपुरकी एक कंपनी ने भारत में तैयार पहला स्वदेशीलोइटर म्यूनिशन यानी नागास्त्र-1 सेना को सौंप दिया है. इसी के साथअपना कोई नुकसान किए बिना दुश्मनों को खत्म करना सेना के लिए काफी आसान हो जाएगा. यह पाकिस्तान व चीन जैसे देशों के बीहड़ इलाकों में भी दुश्मन की सेना का बड़ी आसानी के साथ सफाया करेगा. नागपुर की कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज ने इस ड्रोनको नागपुर की अनुषंगी इकोनॉमिक्स एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड के सहयोग सेबनायागया है तैयार किया है.

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पहले ही हो चुका है इसका परिक्षण

भारतीय सेना ने सोलर इंडस्ट्रीज इकोनॉमिक्स एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (EEL) को आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत करीब 480 नागास्त्र का ठेका दिया था. सेना को सौंपने से पहले ड्रोनों की जांच की गई. उसके बाद कंपनी ने सेना के आर्मी एम्यूनिशन डिपो को 120 लोइटर म्यूनिशन सौंपे गए. पिछली साल इस हथियार का चीन सीमा के पास लद्दाख की नुब्रा घाटी में सफल परीक्षण हुआ था. यानी भविष्य में सर्जिकल स्ट्राइक करने की जरुरत नहीं पड़ेगी. सीमा इस पार से ड्रोन उड़ेगा, वह दुश्मन के घर में घुसकर आत्मघाती हमला कर सकेगा.

सेना का नया सुसाइड ड्रोन ‘नागास्त्र-1 ड्रोन’

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और चीन दोनों ही सीमाओं पर निगरानी के दौरान तुरंत जरूरतों को पूरा करने के लिए इन आत्मघाती ड्रोन के ऑर्डर दिए गए थे, यही नहीं ऑर्डर के एक साल के भीतर ही ये भारतीय सेना को सौंप दिया गया. यह ड्रोन काफी खास है आम भाषा में इस ड्रोन को सुसाइड ड्रोन कहा जा सकता है लेकिन सेना की भाषा में इसे लॉयटरिंग म्यूनिशन कहते हैं. स्वदेशी नागास्त्र-1 ड्रोन में एक कामिकेज मोड है, जिसके जरिए दो मीटर तक जीपीएस की मदद से किसी भी खतरे को बेअसर कर सकता है. इस ड्रोन का वजन 9 किलोग्राम है जो कि 30 मिनट तक उड़ सकता है. यह सर्विलांस और हमला करने में सक्षम है और इससे रीयल टाइम वीडियो बनाता है. इस ड्रोन की मैन इन लूप रेंज 15 किलोमीटर और 30 किलोमीटर की ऑटोनॉमस मोड रेंज है.

क्या है इस नागास्त्र ड्रोन की खासियत ?

यह 200 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर दुश्मन का पता लगाने का काम करती है, इसके अलावा यह ड्रोन सीधे दुश्मन के टैंक, बंकर, बख्तरबंद वाहनों, हथियार डिपो या सैन्य समूहों पर घातक हमला कर सकता है. नागास्त्र फिक्स्ड विंग ड्रोन हैं. जिसके पेट में विस्फोटक रख कर दुश्मन के अड्डे पर हमला बोला जा सकता है.नागास्त्र 1 की सबसे बड़ी खासियत चुपचाप दुश्मन पर हमला करना. इससे दुश्मन को सचेत होने का मौका नहीं मिलता. इस ड्रोन से चीन और पाकिस्तान से लगी सीमा पर सटीक हमला किया जा सकता है. ड्रोन की खास बातों पर गौर करें तो ये ज्यादा तापमान पर बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी काम कर सकते हैं. इस ड्रोन को पैदल चल रही सेना के जवानों को लेकर इसे डिजाइन किया गया है. इसकी कम आवाज और इलेक्ट्रिक प्रोपल्सन है जो इसे एक साइलेंट किलर बनाता है और इसका इस्तेमाल कई तरह के सॉफ्ट स्किन टारगेट के खिलाफ किया जा सकता है.

पारंपरिक मिसाइलों और सटीक हथियारों से अलग ये कम लागत वाला ऐसा हथियार है, जिन्हें सीमा पर घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के ग्रुप को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. इस ड्रोन की एक और खास विशेषता पैराशूट रिकवरी मैकेनिज्म है, जो मिशन निरस्त होने पर गोला-बारूद को वापस ला सकता है.ऐसे में इसे कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है.

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