नई दिल्ली: नीट परीक्षा को लेकर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और एस.वी.एन. भट्टी की अवकाश पीठ ने NTA को फटकार लगते हुए कहा कि यदि नीट परीक्षा के आयोजन में 0.001 प्रतिशत भी लापरवाही हुई है तो इससे समुचित तरीके से निपटने की जरूरत है और मामले को एडवर्सरियल लिटिगेशन की तरह लेना चाहिए जिसमें जांच की जिम्मेदारी संबंधित पक्ष पर होती है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि हम उन बच्चों के प्रयासों को नहीं भूल सकते जिन्होंने परीक्षा की तैयारी की है।
सुप्रीम कोर्ट ने फर्जीवाड़ा के परिणामों से किया सचेत
सुप्रीम कोर्ट ने किसी उम्मीदवार के फर्जीवाड़ा से बुरे परिणामों के बारे में सचेत करते हुए कहा कि सोचिये एक ऐसा डॉक्टर बच्चों का इलाज कर रहा है जो फर्जीवाड़े तरीके से पास हुआ है। ऐसे में संभावित परिणाम बुरे हो सकते है। इसकी उचित जांच की जरूरत है।” शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि कहीं गलती हुई है तो एनटीए को इसे स्वीकार करना चाहिए और प्रतियोगिता की परीक्षाओं में लोगों का विश्वास बनाये रखने के लिए सुधारात्मक उपाय करने चाहिए। इसके जवाब में एनटीए ने कहा कि अदालत के समक्ष समुचित जवाब दाखिल करने से पहले सिर्फ कयासबाजी के आधार पर कोई कठोर राय नहीं बनानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह सीबीआई जांच का आदेश देने से था इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा(NEET Exam) में विभिन्न अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए दायर याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए एनटीए को दो सप्ताह का समय दिया है। उसने मामले को 8 जुलाई को सुनवाई के लिए निर्धारित दूसरी याचिकाओं के साथ टैग करने का भी आदेश दिया। बिहार पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट ने रविवार को दावा किया था कि दो आरोपियों ने प्रश्न पत्र लीक करने में अपनी भूमिकाओं की बात स्वीकार कर ली है। शीर्ष अदालत ने पिछले सप्ताह मामले में सिर्फ एक पक्ष को सुनकर सीबीआई जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया था।







