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Home राष्ट्रीय

ईरान युद्ध के बावजूद भारत में क्यों नहीं बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
March 29, 2026
in राष्ट्रीय
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Petrol-Diesel
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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में करीब एक महीने से भीषण संघर्ष जारी है। अमेरिका और इजरायल जैसे देश तेहरान पर रोज मिसाइल हमले कर रहे हैं। ईरान भी इसका माकूल जवाब दे रहा है। इस सैन्य संघर्ष का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दिखा है, जहां से कच्चे तेल के जहाज गुजरते हैं। भारत भी इसी रूट से खाड़ी देशों से तेल आयात करता है। पहले की तुलना में जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को जब उत्तर प्रदेश के जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन कर रहे थे तब उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई उथल-पुथल पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने बताया कि आखिर भारत में ईंधन की कीमतें कैसे स्थिर है।

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एथेनॉल मिश्रण से मिली राहत
उन्होंने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल मिश्रण को एक अहम रणनीति बताया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति लागू नहीं होती तो भारत को हर साल अतिरिक्त 4.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल आयात करना पड़ता, जो करीब 700 करोड़ लीटर के बराबर है। उन्होंने किसानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से इस वैश्विक संकट के समय देश को बड़ी राहत मिली है।

किसानों की भी बढ़ी आमदनी
पीएम मोदी ने बताया कि एथेनॉल उत्पादन ने न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि की है। इस पहल के चलते भारत को लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। जेवर क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक इलाकों के करीब है, जहां से एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होता है।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में संसद में दिए अपने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बताया था कि पिछले एक दशक में एथेनॉल ब्लेंडिंग 1-1.5 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। भारत ने 2025 में ही 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया, जो निर्धारित समय से पहले की उपलब्धि है।

विद्युतीकरण से भी लाभ
उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे के विद्युतीकरण से हर साल लगभग 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हो रही है, जबकि मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से भी ईंधन की खपत कम हुई है। वर्तमान में भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2,000 करोड़ लीटर है, जिसमें से 1,000 करोड़ लीटर से अधिक पेट्रोल में मिलाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान से जुड़े संघर्ष और इजरायल-अमेरिका के साथ जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। इसके बावजूद भारत सरकार ने ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की है ताकि आम जनता पर कीमतों का अतिरिक्त बोझ न पड़े। उन्होंने कहा, “हम भी युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से ईंधन आयात करते हैं। हर देश इस चुनौती से निपटने के लिए कदम उठा रहा है और हम भी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।” आपको बता दें कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में इसका सीधा असर देखने को नहीं मिला है।

प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय एकता की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यह एक वैश्विक संकट है और इससे निपटने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया कि ऐसे संवेदनशील समय में गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी से बचें।

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