Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राज्य

चर्चा का विषय बन गया है ‘बिहार विशेष राज्य का दर्जा’!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 18, 2024
in राज्य, विशेष
A A
Special status of Bihar
19
SHARES
623
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली: विशेष राज्य की मांग से शुरू और विशेष राज्य की मांग पे खतम। कुछ इसी तर्ज पर बिहार को विशेष राज्य के दर्जे को लेकर राजनीति चलती रहती है। पक्ष और विपक्ष इस मुद्दे पर एक-दूसरे के खिलाफ बरसते रहते है। हाल ही में लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से ये चर्चा बार – बार बिहार के नेताओ से सुनने को मिलती है !

इस मामले में एक नया मोड तब आया है जब नीति आयोग ने 12 जुलाई, 2024 को अपनी जारी रिपोर्ट मे यह स्पष्ट किया है कि- कुछ पैमानों में स्थिति सुधार के बावजूद, बिहार सतत विकास का आकलन करने वाले एसडीजी इंडिया इंडेक्स में सबसे निचले पायदान पर रहा। इस रिपोर्ट के बाद से एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है बिहार विशेष राज्य का दर्जा!

इन्हें भी पढ़े

money laundering

कानपुर मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क: 8 लाख की झूठी लूट से खुला 3200 करोड़ के काले धन का राज

June 24, 2026
harkipodi

निर्जला एकादशी स्नान: हरिद्वार जाने से पहले जरूर पढ़ें ट्रैफिक प्लान

June 24, 2026
shiv sena ubt

शिवसेना यूबीटी को लगेगा एक और झटका! छिन सकता है संसद भवन का ऑफिसशिव

June 24, 2026
प्रशासन

मथुरा वृंदावन में मानकों का पालन न करने पर प्रशासन ने की कठोर कार्यवाही!

June 24, 2026
Load More

ADअब बात आती है कि आखिर विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त करने का क्या मापदंड है? क्या बिहार राज्य इस मापदंड पर खरा उतरता है? इसके लिए हम बात करेंगे गाडगिल सिफारिश पर आधारित निर्धारक की, इसमें विशेष राज्य दर्जा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित मापदंड तैयार किया गया है। जो इस प्रकार है – पहाड़ी इलाका, कम जनसंख्या घनत्व /या जनजातीय जनसंख्या का बड़ा हिस्सा, पड़ोसी देशों के साथ सीमाओं पर सामरिक स्थिति, आर्थिक तथा आधारभूत संरचना में पिछड़ापन , राज्य के वित्त की अव्यवहार्य प्रकृति।

अब बात आती है कि क्या बिहार विशेष राज्य के अनुदान हेतु मानदंड पूरा करता है? यद्यपि बिहार विशेष राज्य दर्जा अनुदान के अधिकांश मानदंडों को पूरा करता है, लेकिन यह पहाड़ी इलाकों और भौगोलिक रूप से विषम क्षेत्रों की आवश्यकता को पूरा नहीं करता है, जिसे बुनियादी ढाँचे के विकास में कठिनाई का प्राथमिक कारण माना जाता है। वर्ष 2013 में केंद्र द्वारा गठित रघुराम राजन समिति ने बिहार को ‘अल्प विकसित श्रेणी’ में रखा और विशेष राज्य दर्जा के बजाय ‘बहु-आयामी सूचकांक’ पर आधारित एक नई पद्धति का सुझाव दिया, जिस पर राज्य के सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिये पुनः विचार किया जा सकता है।

इन सभी रिपोर्ट के बावजूद बिहार में पक्ष विपक्ष के सभी नेता विशेष राज्य की दर्जा की मांग क्यों कर रहे है एक नजर इस पर भी डालते है। विशेष राज्य दर्जा की मांग का उद्देश्य केंद्र सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त करना है, जिससे बिहार को विकास परियोजनाओं के लिये आवश्यक धन प्राप्त करने और लंबे समय से चली आ रही सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने में सहायता मिलेगी। इसके लिए बिहार में कई तरह की असमानताएं भी है जैसे कि – बिहार को औद्योगिक विकास की कमी और सीमित निवेश अवसरों सहित गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

राज्य के विभाजन के परिणामस्वरूप उद्योगों को झारखंड में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे बिहार में रोज़गार और आर्थिक विकास के मुद्दे बढ़ गए। राज्य, उत्तरी क्षेत्र में बाढ़ और दक्षिणी भाग में गंभीर सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। बार-बार आने वाली आपदाएँ कृषि गतिविधियों को बाधित करती हैं, जिससे आजीविका और आर्थिक स्थिरता प्रभावित होती है। बिहार में गरीबी दर उच्च है, यहाँ बड़ी संख्या में परिवार गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं।

बिहार में इन सभी समस्याओं के बाद भी केंद्र सरकार की किसी भी राज्य को विशेष राज्य दर्जे से संबंधित क्या चिंताएं हो सकती है? इस बात को भी हमे समझने की जरूरत है। किसी भी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने में राज्य को अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करना शामिल है, जो केंद्र सरकार के संसाधनों पर दबाव डाल सकता है। विभिन्न राज्यों के बीच धन के आवंटन को संतुलित करना महत्त्वपूर्ण हो जाता है और विशेष राज्य का दर्जा देने से गैर-विशेष श्रेणी दर्जा राज्यों के बीच असमानता या असंतोष उत्पन्न हो सकता है।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
uniform civil code

उत्तराखंड : सामान नागरिक संहिता क्या समलैंगिक शादी के लिए बना सकती है रास्ता?

October 19, 2023
atiq ahmad

खुलने वाले थे अतीक के कई गंभीर राज, इसलिए विपक्ष ने करवाई हत्या: यूपी के मंत्री

April 22, 2023
UAE Pakistan?

पाकिस्तान की हालात नाजुक, परेशान हैं उसके दो ‘खास दोस्त’

June 3, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • निर्जला एकादशी का व्रत कैसे करें? जानें व्रत के नियम    
  • दिल्ली को बाढ़ से बचाने के लिए रेखा सरकार ने कसी कमर, ऐसा है पूरा प्लान
  • कानपुर मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क: 8 लाख की झूठी लूट से खुला 3200 करोड़ के काले धन का राज

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.