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Home दिल्ली

मनीष सिसोदिया को CBI-ED ने क्यों गिरफ्तार किया था, समझे दोनों में अंतर?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 9, 2024
in दिल्ली, राजनीति
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Manish Sisodia
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नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है। देश की सर्वोच्च अदालत ने सिसोदिया को जमानत दी है। पिछले साल मार्च में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री को गिरफ्तार किया था। ईडी से पहले सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया था। शुक्रवार को सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें उन्हें राहत मिली है।

सीबीआई और ईडी ने मनीष सिसोदिया को क्यों गिरफ्तार किया था? दोनों मामलों में क्या अंतर है? दिल्ली शराब घोटाला मामले में अभी तक क्या-क्या हुआ? मनीष सिसोदिया को जमानत क्यों मिली? आइए जानते हैं..

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दिल्ली शराब घोटाला मामला क्या है?

ईडी अगस्त 2022 में सीबीआई द्वारा दर्ज मामले के संबंध में पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले की जांच कर रही है। ईडी अब तक इस मामले में 15 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। पिछले साल जनवरी में, एजेंसी ने एक पूरक चार्जशीट दायर की और दावा किया कि आप के शीर्ष नेताओं ने खुद के लिए अवैध धन जुटाने के उद्देश्य से आबकारी नीति बनाई थी। ईडी ने आरोप लगाया कि साजिश निजी संस्थाओं को थोक व्यापार देने और उसी से छह फीसदी रिश्वत प्राप्त करने के लिए 12 फीसदी मार्जिन तय करने की थी।

प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में सात पूरक आरोपपत्र दायर कर चुकी है। जुलाई में दायर सातवें पूरक आरोपपत्र में ईडी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘सरगना और मुख्य साजिशकर्ता’ और आम आदमी पार्टी को अपराध की आय का प्रमुख लाभार्थी बताया था। विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की अदालत ने 208 पन्नों की चार्जशीट पर संज्ञान लिया था, जिसमें केजरीवाल और आप को आरोपी बनाया गया।

ईडी ने आरोपपत्र में कहा कि सीएम ने 2022 में गोवा में आप के चुनाव प्रचार में अपराध से हुई आय का इस्तेमाल जानबूझकर किया और कथित घोटाले में पूरी साजिश में खुद शामिल थे। आरोपपत्र में कथित तौर पर कुल 1,100 करोड़ रुपये में से 100 करोड़ रुपये का जिक्र है। आरोपपत्र में दावा किया गया है कि केजरीवाल ने शराब बिक्री ठेके के लिए साउथ ग्रुप के सदस्यों से 100 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से 45 करोड़ रुपये गोवा चुनावों पर खर्च किए गए।

दिल्ली शराब नीति अनियमितता मामले की जांच कर रही दोनों एजेंसियां सीबीआई और ईडी अब तक कई लोगों की गिरफ्तारी कर चुकी हैं। गिरफ्तार होने वालों में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विजय नायर, के. कविता, मगुंटा श्रीनिवास रेड्डी, राघव मंगुटा, समीर महेंद्रू, अरुण रामचंद्रन, राजेश जोशी, गोरन्तला बुचिबाबू, अमित अरोड़ा, गौतम मल्होत्रा, अरुण पिल्लई, बेनॉय बाबू (फ्रांसीसी शराब कंपनी पर्नोड रिकार्ड के महाप्रबंधक), पी. सरथ चंद्र रेड्डी, अरबिंदो फार्मा के पूर्णकालिक निदेशक और प्रमोटर, व्यवसायी अमनदीप धाल और व्यवसायी अभिषेक बोइनपल्ली शामिल हैं। इसमें से संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल समेत कई आरोपियों को जमानत मिल गई है जबकि कुछ सरकारी गवाह भी बन गए हैं। अरविंद केजरीवाल को 10 मई को ईडी मामले में अंतरिम जमानत मिली थी लेकिन वो अभी सीबीआई की हिरासत में है।

ईडी ने मनीष सिसोदिया को क्यों गिरफ्तार किया था?

दरअसल, सिसोदिया शराब विक्रेताओं को रिश्वत देने के आरोपों का सामना कर रहे थे। ईडी द्वारा लगाए गए आरोप धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत हैं। इसके अलावा, सीबीआई ने सिसोदिया पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत रिश्वत लेने का आरोप लगाया था।

मार्च 2023 में सिसोदिया की गिरफ्तारी से पहले ईडी ने उनसे तिहाड़ जेल में दो दिन तक पूछताछ की थी। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। ईडी ने राउज एवेन्यू कोर्ट से सिसोदिया से पूछताछ करने की इजाजत मांगी थी। पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने सिसोदिया से शराब नीति में बदलाव के कारणों के बारे में पूछा। साथ ही उनसे इस मामले में ली गई रिश्वत के बारे में भी सवाल किए गए।

सीबीआई ने सिसोदिया की गिरफ्तारी क्यों की थी?

दिल्ली शराब घोटाला मामले में सीबीआई ने 26 फरवरी, 2023 को मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। उस वक्त सीबीआई ने कहा था कि सिसोदिया पर लगे आरोप पर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं देने और पूछताछ में सहयोग नहीं करने पर गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान सीबीआई ने सिसोदिया को कई सबूत दिखाए, इसमें डिजिटल सबूत और दस्तावेज भी शामिल थे। सिसोदिया इन सबूतों के सामने कोई जवाब नहीं दे पाए थे।

दोनों मामलों में क्या अंतर है?

ईडी और सीबीआई दिल्ली सरकार की नई शराब नीति में कथित घोटाले की अलग-अलग जांच कर रही हैं। ईडी नीति को बनाने और लागू करने में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही है। वहीं, सीबीआई की जांच नीति बनाते समय हुईं कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है।

अभी क्या हुआ है?

कथित शराब घोटाले के मामले में जेल में बंद दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने करीब 17 महीने से जेल में बंद सिसोदिया को जमानत देने का फैसला सुनाया। सुनाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जांच पूरी हो गई तो ट्रायल शुरू क्यों नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि बिना ट्रायल के सजा नहीं दी जा सकती। हालांकि, अदालत ने शर्त लगाई है कि आप नेता को पासपोर्ट जमा करना होगा। सिसोदिया को हर सोमवार और गुरुवार को थाने में हाजिरी भी देनी होगी।

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