नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी की APMC (एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी) मंडियों को वाहनों की भीड़-भाड़ से मुक्ति दिलाने के लिए एक नई योजना बनाई है। इस दौरान MCD वहां माल ढोने वाले वाहनों के लिए मल्टी-लेवल डेक और अंडरग्राउंड पार्किंग की सुविधा बनाने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि इलाके में लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या को कम किया जा सके। दरअसल दिल्ली की सभी थोक मंडियों में बेतरतीब पार्किंग के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है, खासकर रात और सुबह-सुबह के समय, जब फल, सब्जियां, अनाज, फूल, मछली और पोल्ट्री लेकर सैकड़ों ट्रक सामान उतारने के लिए आते हैं।
इस बारे में जानकारी देते हुए निगम के एक अधिकारी ने बताया, ‘चूंकि मंडियों में आने वाले वाहनों को अक्सर सामान उतारने की जगह (अनलोडिंग बे) पर अपनी बारी का इंतजार करने के लिए कई घंटे तक रुकना पड़ता है, इसलिए वे अंदरूनी सड़कों और आवाजाही वाले इलाकों पर कब्जा कर लेते हैं, जिससे मंडियों के अंदर दूसरे ट्रकों, व्यापारियों और खरीदारों की आवाजाही धीमी हो जाती है।’
जहां पार्किंग है, वह भी छोटी पड़ जाती हैं
अधिकारियों का कहना है कि हालांकि कई मंडियों में पार्किंग के लिए तय जगहें हैं, लेकिन या तो वे अपर्याप्त हैं या उनका सही ढंग से इस्तेमाल नहीं हो रहा है, जिसके कारण ट्रेडिंग के अत्यधिक व्यस्त समय बेतरतीब पार्किंग और जाम की समस्या पैदा हो जाती है।
पार्किंग के साथ ही मिलेंगी ये सब सुविधाएं
इसी वजह से इन्हीं सब परेशानियों को देखते हुए निगम की योजना इन मंडियों में वाहनों के लिए ऐसा पार्किंग हब बनाने की है, जहां ट्रक ड्राइवर अनलोडिंग स्लॉट का इंतजार करते समय अपने वाहन पार्क कर सकें, आराम कर सकें, फ्रेश हो सकें और फिर मंडी के अंदर ट्रैफिक में रुकावट डाले बिना मंडी का काम आगे बढ़ा सकें।
चार से पांच घंटे तक मंडी में खड़े रहते हैं ट्रक
अधिकारी ने बताया कि, ‘ज्यादातर माल ढोने वाले वाहन आधी रात से सुबह के शुरुआती घंटों के बीच मंडियों में आते हैं। सामान चढ़ाने और उतारने के काम में चार से पांच घंटे लग जाते हैं, इस दौरान ट्रक मंडी के अंदर ही खड़े रहते हैं। ऐसे में अगर यहां एक व्यवस्थित पार्किंग सिस्टम बनाया जाता है तो यहां बेतरतीब आवाजाही को नियंत्रित करने और अंदरूनी सड़कों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।’
फिलहाल शुरुआती चरण में है पार्किंग का प्रस्ताव
एक अधिकारी ने बताया कि, ‘यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और विस्तृत योजना तैयार करने से पहले APMC के साथ इस पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव को APMC को भेजा जा सकता है। अधिकारी ने बताया कि हम मंडियों के अंदर मल्टी-लेवल और अंडरग्राउंड पार्किंग सुविधाएं विकसित करने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।’
APMC के अंतर्गत आती हैं ये सात प्रमुख मंडियां
दिल्ली में APMC की सात प्रमुख थोक मंडियां हैं, जिनमें आजादपुर मंडी, केशवपुर मंडी, नरेला मंडी, नजफगढ़ मंडी, शाहदरा (गाजीपुर) मंडी, गाजीपुर में मछली, पोल्ट्री और अंडा मंडी, और गाज़ीपुर में इंटरनेशनल फ्लावर मार्केट शामिल हैं। इन मंडियों में पार्किंग का प्रबंधन APMC के अधिकार क्षेत्र में आता है।
अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल इस प्रस्ताव के तहत शुरुआती तौर पर ओखला और गाजीपुर की थोक मंडियों के लिए विचार किया जा रहा है, और व्यवहार्यता (फिजीबिलिटी) के आधार पर आने वाले वक्त में APMC के तहत आने वाली अन्य मंडियों में भी ऐसी ही सुविधाएं देने पर विचार किया जा सकता है।







