नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्तों पर खुलकर बात की. राजदूत राजीव सीकरी की किताब “स्ट्रैटेजिक कॉनड्रम्स: रीशेपिंग इंडियाज फॉरेन पॉलिसी” के विमोचन के दौरान एस जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान के साथ लगातार बातचीत का समय खत्म हो गया है.
एस जयशंकर ने कहा, ‘कुछ कामों के परिणाम होते हैं और जहां तक जम्मू-कश्मीर का सवाल है, मुझे लगता है कि अनुच्छेद 370 खत्म हो गया है. इसलिए आज मुद्दा यह है कि हम पाकिस्तान के साथ किस तरह के रिश्ते पर विचार कर सकते हैं? राजीव सिकरी ने अपनी किताब में सुझाव दिया है कि शायद भारत मौजूदा स्तर के संबंधों को जारी रखने से संतुष्ट है. शायद हां, शायद नहीं. हम निष्क्रिय नहीं हैं. और चाहे घटनाएं सकारात्मक या नकारात्मक दिशा लें, हम किसी भी तरह से प्रतिक्रिया करेंगे.’
अफगानिस्तान के साथ कैसे हैं संबंध?
जयशंकर ने कहा कि अफगानिस्तान के साथ दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत संबंध हैं. उन्होंने कहा, ‘जहां तक अफगानिस्तान का सवाल है, वहां लोगों के बीच मजबूत संबंध हैं. वास्तव में, सामाजिक स्तर पर भारत के लिए एक निश्चित सद्भावना है, लेकिन जब हम अफगानिस्तान को देखते हैं, तो मुझे लगता है कि शासन कला की बुनियादी बातों को नहीं भूलना चाहिए.’
विदेश मंत्री ने कहा, ‘यहां अंतरराष्ट्रीय संबंध काम कर रहे हैं. इसलिए जब हम आज अपनी अफगान नीति की समीक्षा करते हैं, तो मुझे लगता है कि हम अपने हितों के बारे में बहुत स्पष्ट हैं. हम अपने सामने मौजूद ‘विरासत में मिली समझदारी’ से भ्रमित नहीं हैं.’
‘अमेरिका की उपस्थिति वाला अफगानिस्तान अलग था’
जयशंकर ने कहा, ‘हमें यह समझना चाहिए कि अमेरिका की उपस्थिति वाला अफगानिस्तान हमारे लिए अमेरिका की उपस्थिति के बिना वाले अफगानिस्तान से बहुत अलग है.’ जयशंकर ने आगे कहा कि भारत को बांग्लादेश के साथ आपसी हितों का आधार तलाशना होगा और भारत “वर्तमान सरकार” के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करेगा.
बांग्लादेश को लेकर क्या कहा?
जयशंकर ने बताया, ‘बांग्लादेश की आजादी के बाद से हमारे रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं और यह स्वाभाविक है कि हम मौजूदा सरकार के साथ व्यवहार करेंगे. लेकिन हमें यह भी पहचानना होगा कि राजनीतिक बदलाव हो रहे हैं और वे विध्वंसकारी हो सकते हैं और स्पष्ट रूप से यहां हमें हितों की पारस्परिकता पर ध्यान देना होगा.’
म्यांमार के बारे में जयशंकर ने कहा कि पूर्वोत्तर का संदर्भ सर्वोपरि है. उन्होंने कहा, ‘पूर्व की ओर आगे बढ़ें तो म्यांमार है, जो एक ही समय में प्रासंगिक और दूरस्थ दोनों है. यहां भी, मुझे लगता है कि पूर्वोत्तर का संदर्भ सर्वोपरि है और हमें सरकार और अन्य हितधारकों के बीच संतुलन बनाना होगा, क्योंकि यही वास्तविकता है.’







