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Home राष्ट्रीय

तिब्बत में इतनी ऊंचाइयों पर ये क्या कर रहा है चीन?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 29, 2024
in राष्ट्रीय, विश्व
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नई दिल्ली: चीन, तिब्बत में हेलिकॉप्टर बेस का जाल बिछा रहा है। यह भारत की सुरक्षा को बड़ी चुनौती है। तक्षशिला इंस्टिट्यूशन की एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि तिब्बत में चीन के लगभग 90% हेलीपैड समुद्र तल से 3,300 से 5,300 मीटर (10,000 से 17,400 फीट) की ऊंचाई पर हैं। इनमें से 80% हेलीपैड 3,600 मीटर से भी ज्यादा ऊंचाई पर हैं। यह खुलासा भारत के लिए खतरे की घंटी है क्योंकि चीन इन हेलीपैड का इस्तेमाल सैनिकों और हथियारों को तेजी से सीमा पर पहुंचाने के लिए कर सकता है।

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रिसर्च में यह भी बताया गया है कि चीन इन हेलीपैड का निर्माण भारत और भूटान के साथ लगती सीमा के पास कर रहा है। ये हेलीपैड चीन की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा हैं और इनसे भारत के लिए खतरा बढ़ गया है। रिसर्च में 109 हेलीपैड का अध्ययन किया गया है। इनमें से केवल दो हेलीपैड 780 से 2600 मीटर की ऊंचाई पर हैं। 32 हेलीपैड 2700 से 3600 मीटर, 44 हेलीपैड 3700 से 4300 मीटर और 25 हेलीपैड 4400 से 4700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। छह हेलीपैड 4800 से 5400 मीटर की ऊंचाई पर हैं।

रिसर्च रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

बेंगलुरु स्थित तक्षशिला इंस्टिट्यूशन में भूस्थानिक अनुसंधान कार्यक्रम के प्रमुख प्रोफेसर वाई नित्यानंदम ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस पर लेख लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि चीन इन हेलीपैड का इस्तेमाल सैन्य अभियानों के लिए कर सकता है। वह इनका इस्तेमाल सैनिकों और हथियारों की आवाजाही के लिए, निगरानी बढ़ाने के लिए और आपात स्थिति में मदद पहुंचाने के लिए कर सकता है।

डॉ. नित्यानंदम की अगुवाई में हुई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ऊंचे इलाकों में अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है। पहले ऊंचाई वाले इलाकों में हेलीकॉप्टर उड़ाना चीन की कमजोरी मानी जाती थी, लेकिन अब वह इस कमी को तेजी से दूर कर रहा है। चीन अपनी सैन्य रणनीति के तहत हेलीपैड के साथ-साथ हवाई पट्टियों का भी विस्तार कर रहा है। वह 1,000 मीटर से कम लंबाई वाली हवाई पट्टियों को मानवरहित विमानों (UAV) के लिए इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।

लगातार सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है चीन

पिछले एक दशक में चीन ने हेलीकॉप्टर के बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता में वृद्धि हुई है। यह निवेश केवल 2017 के डोकलाम गतिरोध या 2020 के गलवान घाटी संघर्ष जैसी घटनाओं की प्रतिक्रिया नहीं है। बल्कि, यह एक सोची-समझी रणनीति है जिसका उद्देश्य ऐसे क्षेत्र में दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करना है जहां भौगोलिक परिस्थितियां और ऊंचाई पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) के सैनिकों के लिए गंभीर चुनौती पेश करती हैं। उदाहरण के लिए, Z-20 और Z-8L हेलीकॉप्टरों को विशेष रूप से तिब्बती पठार की कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों से उत्पन्न बाधाओं को दूर करने के लिए चीन की इच्छा शक्ति को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘चीन जिस तेजी से हेलिपोर्ट का निर्माण कर रहा है, वह उसके आक्रामक सैन्य विस्तार को दर्शाता है।’ अध्ययन में शामिल कुछ हेलिपोर्ट्स को अत्याधुनिक बनाया जा रहा है और कुछ नए हेलिपोर्ट्स बनाए जा रहे हैं। चीन एलएसी के पास हेलीकॉप्टर बेस का जाल बिछा रहा है। एलएसी से 5 किलोमीटर, 10 किलोमीटर, 25 किलोमीटर, 50 किलोमीटर, 100 किलोमीटर और 200 किलोमीटर की दूरी पर हेलीपैड और हवाई अड्डे बनाए गए हैं।

कहीं युद्ध की तैयारी तो नहीं?

ये हेलीपैड सैन्य अभियानों और सीमा पर सैनिकों की तैनाती में मदद करेंगे। रडार स्टेशन और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) साइट जैसी अन्य सैन्य सुविधाओं के साथ इन हेलीपैड को मिलाकर चीन एक मजबूत सैन्य नेटवर्क तैयार कर रहा है जिसका इस्तेमाल वह किसी भी सीमा विवाद की स्थिति में तेजी से कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को चीन के इस कदम से सावधान रहने की जरूरत है। भारत को अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करना होगा और चीन की हरकतों पर कड़ी नजर रखनी होगी।

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