नई दिल्ली: दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने मंगलवार को एक प्रेस कॉंस्फ्रेंस की, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने ईवीएम से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा कीं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम जोड़ने या हटाने के बारे में अफवाहें फैलाई जा रही हैं। मतदाता सूचियों से नामों को हटाने या जोड़ने में उचित प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया जाता है, किसी भी हेरफेर की कोई गुंजाइश नहीं है। सीईसी राजीव कुमार ने कहा कि EVM को हैक नहीं किया जा सकता है और न ही टेंपरिंग हो सकती है। इसके अतिरिक्त फर्जी वोट नहीं डाले जा सकते हैं। ट्रोजन हॉर्स डालकर EVM में कोई छेड़छाड़ नहीं हो सकती है।
चुनाव की तारीख से 7 से 8 दिन पहले EVM को कमीशन किया जाता है। फिर सिंबल लोडिंग होती है। उसी दिन एजेंट मॉक पोल करते हैं। उसे नई बैटरी डालकर सील किया जाता है और ईवीएम को Evm को स्ट्रांग रूम में रखा जाता है। फिर पोलिंग वाले दिन सील चेक कराई जाती है। मॉक पोल होता है। कैंडिडेट के पोलिंग एजेंट बूथ पर रहते हैं और फिर सील करके स्ट्रांग रूम में रख दिया जाता है।
राजीव कुमार ने कहा कि इलेक्शन कंडक्ट रूल्स में बदलाव को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना हमारा मूल है। उसे हम कम नहीं कर सकते हैं। जनप्रतिनिधित्व का कानून का रूल 93 कहता है कि 7 तरीके का डॉक्यूमेंट नहीं दिया जा सकता है। 17 A की डीटेल्स इसलिए नहीं दी जा सकती है कि उससे मतदाता की प्राइवेसी का हनन होता है। सिर्फ पोलिंग बूथ के अंदर और बाहर के CCTV फुटेज न पहले दिया जाता था न अब दिया जाएगा। ये भी वोटर की निजता को खतरे में डालना होगा। किसने वोट दिया और किसने नहीं दिया ये सारी जानकारी चेहरे के साथ बाहर आजाएगी। 1 करोड़ घंटे का विजुअल्स मांग रहे हैं जिसे देख पाना असम्भव है।







