वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका की दोस्ती दिन-प्रतिदिन मजबूत हो रही है। दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दे ऐसे हैं, जो अनसुलझे हैं। इसके बावजूद दोनों देश कई क्षेत्रों में, खासकर रक्षा, तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत और अमेरिका सुर्खियों से दूर रहकर रक्षा, अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एकसाथ काम कर रहे हैं। इसका हाल में ही जिक्र भारत दौरे पर आए अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने किया। सुलिवन बाइडन प्रशासन में बतौर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अंतिम बार भारत आए हैं। 20 जनवरी को अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे।
हथियारों के संयुक्त उत्पादन पर जोर
भारत की सरकारी कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड अमेरिकी निजी फर्म अल्ट्रा मैरीटाइम के साथ भारत में अमेरिकी सोनोबॉय के संयुक्त-उत्पादन के लिए चर्चा कर रही है, ताकि दोनों देशों की एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमताओं को बढ़ावा दिया जा सके। सोनोबॉय पानी के नीचे ध्वनिक तरंगे भेजकर दुश्मन की पनडुब्बियों की लोकेशन जानने का एक उपकरण होता है। यह एंटी-सबमरीन युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो भारत और अमेरिका के लिए मुख्य फोकस है। इसका कारण यह है कि चीन हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूती के साथ दुनिया की सबसे बड़ी पनडुब्बियों का बेड़ा संचालित कर रहा है।
मल्टी-डोमेन सिचुएशनल अवेयरनेस पर भी कर रहे काम
अमेरिकी फर्म जनरल एटॉमिक्स और भारतीय स्टार्ट-अप 114ai संयुक्त रूप से संयुक्त ऑल-डोमेन कमांड और कंट्रोल का समर्थन करने के लिए AI-सक्षम मल्टी-डोमेन सिचुएशनल अवेयरनेस उत्पाद पर काम कर रहे हैं। अमेरिका और भारत स्ट्राइकर बख्तरबंद वाहनों और विशेष हथियारों के सह-उत्पादन पर भी काम कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उल्लेख मंगलवार को व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक फैक्टशीट में किया गया, जो सुलिवन की यात्रा के बाद जारी किया गया, जिसके दौरान उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। सुलिवन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।







