नई दिल्ली : दिल्ली में 5 फरवरी को सभी 70 सीटों पर वोटिंग होनी है। जिसके नतीजे 8 फरवरी को जारी हो जाएंगे। इसके बाद साफ हो गया कि इस बार दिल्ली की कमान कौन संभालेगा? अब तक चुनाव में कांटे की टक्कर सामने आ रही है। हालांकि दिल्ली में सत्ता परिवर्तन से जुड़ी ऐसी रोचक जानकारी सामने आई है, जिसको जानने के बाद शायद आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लग सकता है।
दिल्ली भारत की राजधानी ही नहीं बल्कि अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है। इससे इतर यहां के राजनीतिक परिवर्तनों में भी कई अनूठी घटनाएं घट चुकी हैं। दिल्ली की राजनीतिक में जब भी सत्ता परिवर्तन हुआ, तब एक दिलचस्प पैटर्न या संयोग देखा गया है, जिसमें हर बार महिला मुख्यमंत्री ने दिल्ली की सत्ता संभाली है।
इस आर्टिकल में हम इसी संयोग पर गौर करेंगे, जहां सत्ता परिवर्तन के दौरान महिला नेताओं ने अपनी पहचान बनाई और दिल्ली की राजनीति में अहम भूमिका निभाई। दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री आतिशी से पहले जो दो महिला मुख्यमंत्री बनी थीं, उनमें बीजेपी की सुषमा स्वराज और कांग्रेस की ओर शीला दीक्षित का नाम शुमार है।
सुषमा स्वराज (1998)
सुषमा स्वराज ने दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में एक नई दिशा दी। सुषमा स्वराज के तौर पर दिल्ली को पहली बार साल 1998 में महिला मुख्यमंत्री मिली। हालांकि प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन सीएम साहिब सिंह वर्मा को इस्तीफा देना पड़ा था और उसके बाद सुषमा को सीएम बनाया गया। हालांकि सुषमा सिर्फ 52 दिन ही मुख्यमंत्री रहीं और फिर नतीजे आए तो बीजेपी बुरी तरह विफल साबित हुई। साल 1993 में जिस बीजेपी की 49 सीटें मिली थीं, 5 साल बाद सिर्फ 15 सीटों पर सिमटकर रह गई।
वहीं सुषमा स्वराज की नेतृत्व क्षमता और उनकी प्रशासनिक कुशलता ने उन्हें भारतीय राजनीति में एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया। हालांकि, उनका कार्यकाल बहुत लंबा नहीं था, लेकिन उनके द्वारा किए गए फैसले दिल्ली के विकास में अहम माने जाते हैं।
शीला दीक्षित (1998-2013)
शीला दीक्षित दिल्ली की सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाली महिला थीं। उन्होंने तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया, और उनका कार्यकाल दिल्ली के विकास के लिहाज से अत्यधिक महत्वपूर्ण था। शीला दीक्षित के समय में दिल्ली में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ, जैसे कि मेट्रो रेल प्रणाली की शुरुआत, सड़कों का निर्माण, और अन्य सुविधाओं का विस्तार। उनके कार्यकाल में दिल्ली ने तीव्र गति से शहरीकरण और विकास को देखा, और उन्होंने दिल्ली को एक आधुनिक और बेहतर स्थान बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
साल 1998 में कांग्रेस चुनाव जीती और शीला दीक्षित दिल्ली की सीएम बनी। उसके बाद 2003 और 2008 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीत मिली, लेकिन लगातार 15 साल तक मुख्यमंत्री रहने के बाद साल 2013 में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सत्ता में आई। हालांकि त्रिशंकु विधानसभा में कांग्रेस ने AAP को बाहर से समर्थन देकर सरकार बनाई, जो 49 दिन की सरकार थी। इसके बाद 2015 में आप क्लीन स्वीप करते हुए सत्ता में वापस आई।
आतिशी सिंह (मार्लेना) (2020 – वर्तमान)
अब आतिशी सिंह, जिनका राजनीतिक कार्यकाल अभी जारी है, दिल्ली की राजनीति में एक नई उम्मीद के रूप में उभरी हैं। आतिशी का नाम महिलाओं के लिए प्रेरणा देने वाली नेताओं में लिया जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनकी पहल और कार्य उनके कार्यकाल को विशेष बनाते हैं। उनके नेतृत्व में दिल्ली की जनता को कई नई योजनाओं का लाभ हुआ है, जिनमें विशेष ध्यान बच्चों और युवाओं की शिक्षा पर दिया गया है। हालांकि अब इस चुनाव के नतीजे ही ये बता पाएंगे कि महिला मुख्यमंत्री के साथ जुड़ा सत्ता परिवर्तन का यह अजब संयोग कितना असरदार होता है?







