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Home राज्य

‘बांधवगढ़’ टाइगर रिजर्व या मौत का जाल…?

टाइगर रिजर्व में तीन मौतें, एक लापता और वन विभाग पर सवाल

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 17, 2026
in राज्य, विशेष
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Bandhavgarh Tiger Reserve
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विकाश शुक्ला


उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बाघों की आबादी के लिए प्रसिद्ध है, एक बार फिर विवादों में घिरा हुआ है। धमोखर वन परिक्षेत्र के ग्राम पुटपुरा में एक बाघ की संदिग्ध मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Bandhavgarh Tiger Reserve
फोटो कैप्शन – जमीन पर पड़ा बाघ का शव।

मामला खेरवाहार फारेस्ट कंपार्टमेंट PF112 का है, जहां एक बाघ का शव बरामद हुआ। बताया गया कि एक खेत में लगे फेंसिंग वायर में बाघ के फंसने की आशंका जताई जा रही है, और उसमें करंट लगे फेंसिंग वायर से उसकी मौत होने की बात की जा रही है। मृत बाघ के पड़े होने की सूचना ग्रामीणों ने शुक्रवार को वन विभाग तक पहुंचाई, जबकि आशंका जताई गई कि बाघ की मौत पहले ही हो चुकी थी।

फेंसिंग सुरक्षा या मौत का हथियार ?

सूत्रों के अनुसार, बाघ की मौत उस फेंसिंग के कारण हुई, जिसे खेतों में सुरक्षा के लिए लगाया था। बताया गया कि खेत को तार से फेंसिंग किया गया था, जिसमें करंट प्रवाह हो रहा था, बाघ वहां से गुजरा होगा और उस फेंसिंग वायर में फंसने से उसकी मौत हो गई। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ एक दुर्घटना थी, या फिर यह वन्यजीवों के प्रति जानबूझकर की गई लापरवाही का परिणाम था ? टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में इस तरह की अवैध और खतरनाक फेंसिंग पर वन विभाग की हीलाहवाली न सिर्फ लापरवाही है, बल्कि सिस्टम की नाकामी को उजागर किया। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था और वन्यजीवों के मॉनिटरिंग पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी की देरी से उठे सवाल 

इस घटना के 24 घंटे बाद वन विभाग को सूचना मिली, जिससे यह सवाल और भी गहरा हो जाता है कि क्या वन विभाग अपने कर्तव्यों को सही तरीके से निभा रहा है। ये कोई नया मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले धमोखर वन परिक्षेत्र के रायपुर के कुदरी टोला में खुले कुएं में बाघ का शव सड़े-गले स्थिति में मिला था, जिसकी सूचना कई घण्टे बाद वन अमले को लगी थी। मसलन बाघ की मौत के कई घण्टे या कई दिन बाद वन विभाग को जानकारी मिलना प्रबंधन की धरातल पर कमजोर पकड़ और कमजोर पेट्रोलिंग की स्थिति बयां करता है।

जनवरी में तीसरी मौत 

इस घटना से पहले जनवरी माह में बांधवगढ़ में दो और बाघों की मौत हो चुकी है। जबकि एक बाघ शावक ताला कोर क्षेत्र में बने इनक्लोजर से लापता हो गया था, उसका भी फिलहाल कोई सुराख अब तक नहीं मिला। बता दें कि बाघ शावक तक़रीबन 15 दिन पहले सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर इनक्लोजर से निकलकर जंगल की ओर चला गया था, तब से लापता है। मसलन जनवरी माह में बांधवगढ़ से तीन बाघों की मौत और एक शावक लापता की यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है, कि बांधवगढ़ के अंदर और आसपास के क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खामियां हैं। एक के बाद एक होने वाली इन घटनाओं ने वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर चिंता पैदा कर दी है।

करोड़ों खर्च, फिर भी सुरक्षा लापता! 

बांधवगढ़ में बाघों के संरक्षण के नाम पर सलाना करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद बाघों की मौतों पर नियंत्रण नहीं किया जा सका। ऐसे में बाघों की मौत महज एक संयोग है, या फिर वन विभाग और प्रशासन की बेशुमार लापरवाही का परिणाम है? जब सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है, तो इसका वास्तविक असर जंगलों की सुरक्षा पर दिखना चाहिए था। लेकिन बांधवगढ़ में स्थिति बाघों के कब्रगाह के तौर पर उभरकर आ रही है।

अगर यही हालात रहे, तो बांधवगढ़ जैसे प्रतिष्ठित टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो सकती है। वन्यजीवों के संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद इस तरह के परिणाम टाइगर रिजर्व के प्रबंधन पर शंका और सवाल दोनों खड़े करते हैं।

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