नई दिल्ली. पिछले दो हफ्ते से आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को ‘अप्रासंगिक’ बताया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ ‘मिलीभगत’ करके चुनाव लड़ रही है. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के अप्रासंगिक होने के पार्टी के लगातार दावों के अलावा, शहर में करीब 10 सीटें ऐसी हैं, जहां आप इस पुरानी कांग्रेस पार्टी के चुनाव अभियान पर कड़ी नजर रख रही है. आम आदमी पार्टी को ओखला, चांदनी चौक और बादली सहित दूसरी सीटों पर कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है.
पूर्व कांग्रेस विधायक आसिफ अहमद खान की बेटी अरीबा खान ओखला से आप के अमानतुल्ला खान के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं. जबकि वरिष्ठ कांग्रेस नेता जेपी अग्रवाल के बेटे मुदित अग्रवाल चांदनी चौक से आप के पुनर्दीप सिंह साहनी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, जो मौजूदा विधायक परलाद सिंह साहनी के बेटे हैं. बादली से दिल्ली कांग्रेस प्रमुख देवेंद्र यादव का मुकाबला आप के अजेश यादव से होगा. अमानतुल्लाह खान और अजेश यादव मौजूदा विधायक हैं. आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को ये चिंता नहीं है कि कांग्रेस कुछ सीटें जीतेगी, बल्कि यह है कि इससे भाजपा को अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी. भाजपा, जो 27 साल से दिल्ली विधानसभा में सत्ता से बाहर है, के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण चुनाव है. कांग्रेस के वोट शेयर बढ़ने से ही बीजेपी को मदद मिलेगी.
कांग्रेस से AAP को डर
2017 के एमसीडी चुनावों के नतीजों से इसे समझा जा सकता है. आप ने दो साल पहले ही 54 फीसदी के बड़े वोट शेयर के साथ विधानसभा चुनाव जीता था और कांग्रेस 10 फीसदी पर सिमट गई थी. लेकिन कांग्रेस ने एमसीडी चुनाव अच्छे से लड़ा. आप का वोट शेयर गिरकर 26 फीसदी पर आ गया, जबकि कांग्रेस का वोट शेयर बढ़कर 21 फीसदी हो गया. बीजेपी ने सिर्फ 4 प्रतिशत की बढ़त हासिल की, लेकिन उन चुनावों में जीत हासिल की. आप के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि वह अब तक का सबसे कठिन चुनाव लड़ रही है. आप का मानना है कि अगर वह 70 में से 50 से अधिक सीटें जीतती है तो वह आरामदायक स्थिति में होगी. इससे कम सीटें टॉप लीटरशिप को असहज कर देंगी.







