नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा ने विधायकों के वेतन में संशोधन की मांगों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। भाजपा और आप दोनों के विधायकों ने सदन में यह मुद्दा उठाया था। कर्नाटक और मध्य प्रदेश के बाद अब दिल्ली के विधायकों के वेतन में भी जल्द ही बढ़ोतरी हो सकती है।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधायकों को दिए जाने वाले वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाओं की समीक्षा करने और उचित सिफारिशें देने के लिए 26 मार्च को एक समिति का गठन किया। यह फैसला दिल्ली विधानसभा सत्र के तीसरे दिन विधायकों द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के बाद लिया गया। समिति वेतन और भत्तों की वर्तमान स्थिति की जांच करेगी और संभावित संशोधनों पर विचार करेगी।
इन्ही चर्चा के बीच दिल्ली के विधायकों को वर्तमान में मिलने वाली सैलरी सुर्खियों में आ गई है। ऐसे में आइए जानते हैं कि दिल्ली के विधायकों को फिलहाल कितनी सैलरी मिलती है।
फिलहाल कितनी है दिल्ली के विधायकों की सैलरी?
delhi.gov.in पर दी गई जानकारी के मुताबिक बेसिक सैलरी 60,000/- प्रतिमाह, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 30,000/- प्रति माह, सचिवीय सचिवीय सहायता प्रति माह 25000 रुपये, सत्कार भत्ता रु. 10,000/- प्रति माह, सम्प्ट्युअरी भत्ता 10,000/ प्रति माह, कुल सैलरी 1,25,000 प्रति माह है।
इसके अलावा प्रतिदिन का दैनिक भत्ता 1,500/- रुपये मिलते हैं। इसके अलावा कार का निःशुल्क इस्तेमाल, जिसमें ड्राइवर की सेवाएं और कार के लिए अधिकतम 700 रुपये प्रति माह पेट्रोल शामिल है। अगर वह अपनी कार का उपयोग करना चाहता है तो उसे 10,000 रुपये प्रति माह वाहन भत्ता मिलता है।
दिल्ली विधानसभा सदस्य के रूप में हर कार्यकाल के लिए लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, प्रिंटर, मोबाइल हैंडसेट आदि की खरीद के लिए एकमुश्त भत्ते के रूप में 1,00,000 रुपये का भुगतान किया जाता है।
2023 में बढ़ाई गई थी दिल्ली के विधायकों की सैलरी?
दिल्ली के विधायकों के वेतन में आखिरी बार संशोधन फरवरी 2023 में हुआ था। उस वक्त उनकी सैलरी में 67 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई थी। यह बढ़ोतरी 12 साल के अंतराल के बाद की गई थी। उस वक्त दिल्ली के विधायकों को 54,000 रुपये से बढ़कर 90,000 रुपये प्रति माह किया गया था। मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, चीफ व्हिप और विपक्ष के नेता का वेतन 72,000 रुपये से बढ़ाकर 1.7 लाख रुपये कर दिया गया था।
2023 फरवरी में विधायकों का मूल वेतन 12,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया था जबकि मंत्रियों, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य सचेतक और विपक्ष के नेता का मूल वेतन 20,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया था।
वहीं निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 6,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया था, टेलीफोन बिल भत्ता 8,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये, सचिवालय भत्ता 10,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये, और विधायकों का यात्रा भत्ता 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया था।







