प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: ध्रुव राठी, एक प्रसिद्ध यूट्यूबर ने अपने यूट्यूब चैनल पर 18 मई 2025 को “The Sikh Warrior Who Terrified the Mughals” और “The Rise of Sikh” शीर्षक से सिख इतिहास पर आधारित वीडियो अपलोड किए, जिनमें सिख गुरुओं, विशेष रूप से गुरु गोबिंद सिंह जी और बाबा बंदा सिंह बहादुर, को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए बनाए गए एनिमेटेड विजुअल्स में दर्शाया गया। इन वीडियोज में सिख गुरुओं की शहादत, खालसा पंथ की स्थापना और मुगलों के खिलाफ युद्धों का चित्रण था।
क्या है विवाद का कारण ?
सिख सिद्धांतों का उल्लंघन सिख धर्म के अनुसार, गुरुओं, साहिबजादों और उनके परिवार को मानवीय या एनिमेटेड रूप में चित्रित करना सिख रीतियों के खिलाफ है। ध्रुव राठी के वीडियो में गुरु गोबिंद सिंह जी को बचपन में रोते हुए दिखाया गया, जिसे सिख समुदाय ने अपमानजनक माना। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और अन्य सिख संगठनों ने वीडियो में ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। उदाहरण के लिए, बाबा बंदा सिंह बहादुर को रॉबिन हुड से तुलना करना और यह दावा करना कि वे सिख नहीं बने, गलत बताया गया।
SGPC, अकाल तख्त और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने वीडियो को सिख भावनाओं के खिलाफ बताया। SGPC के महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा कि सिख इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और AI का उपयोग धार्मिक सिद्धांतों का उल्लंघन है।
सिख समुदाय और नेताओं की प्रतिक्रिया
SGPC और DSGMC: SGPC ने वीडियो की निंदा करते हुए इसे सिख इतिहास के साथ छेड़छाड़ बताया और ध्रुव राठी से माफी की मांग की। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम सेल में भारतीय दंड संहिता (BNS) और IT एक्ट के तहत शिकायत दर्ज की, जिसमें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए धारा 295A के तहत FIR की मांग की गई।
दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने वीडियो को तथ्यात्मक रूप से गलत और सिख इतिहास का अपमान करने वाला बताया। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इसे सिख शिष्टाचार का उल्लंघन करार दिया। भाजपा नेता बलियावाल ने केंद्रीय मंत्री से कानूनी कार्रवाई की मांग की।
ध्रुव राठी ने दी प्रतिक्रिया
बढ़ते विरोध के बाद, ध्रुव राठी ने 19 मई 2025 को वीडियो को अपने यूट्यूब चैनल से हटा लिया। ध्रुव ने एक बयान में कहा कि उनका उद्देश्य भारतीय नायकों की कहानियों को नए प्रारूप में प्रस्तुत करना था, न कि धार्मिक या राजनीतिक विवाद पैदा करना। उन्होंने सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए वीडियो हटाने का फैसला किया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने वीडियो को सराहा, लेकिन सिख समुदाय के एक वर्ग की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया। ध्रुव ने X पर एक पोल शुरू किया, जिसमें पूछा कि वीडियो को हटाया जाए, ब्लर किया जाए, या अपडेट किया जाए।
कानूनी और सामाजिक प्रभाव
DSGMC ने ध्रुव राठी के यूट्यूब चैनल की समीक्षा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। SGPC और अकाल तख्त ने भी चेतावनी दी कि अगर ऐसी घटनाएं दोहराई गईं, तो कानूनी कदम उठाए जाएंगे। विवाद ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी, जहां कुछ लोग ध्रुव के पक्ष में थे, जबकि सिख समुदाय ने इसे धार्मिक संवेदनशीलता की अनदेखी बताया।
ध्रुव राठी का बैकग्राउंड
ध्रुव राठी, हरियाणा के रोहतक के रहने वाले, जर्मनी में बसे यूट्यूबर हैं, जिनके यूट्यूब चैनल पर 34 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं। वे सामाजिक, राजनीतिक, और पर्यावरणीय मुद्दों पर वीडियो बनाते हैं और अक्सर अपने विश्लेषणों के कारण विवादों में रहते हैं। इससे पहले भी कोविड-19, राम मंदिर और अन्य मुद्दों पर उनके वीडियो विवादित रहे हैं।
ऐतिहासिक रूप से गलत और अपमानजनक
ध्रुव राठी का सिख गुरुओं पर AI-आधारित वीडियो सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं और सिद्धांतों के खिलाफ माना गया, जिसके कारण तीखा विरोध हुआ। SGPC, DSGMC और सिख नेताओं ने इसे ऐतिहासिक रूप से गलत और अपमानजनक बताया। ध्रुव ने सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए वीडियो हटा लिया और सफाई दी, लेकिन सिख संगठनों ने माफी और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला धार्मिक संवेदनशीलता और डिजिटल कंटेंट निर्माण में सावधानी की जरूरत को उजागर करता है।







