आदित्य पटेल
खंडवा: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक 45 वर्षीय आदिवासी महिला के साथ हुई गैंगरेप और बर्बरता की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना खलवा क्षेत्र के रोशनी पुलिस चौकी अंतर्गत 23 मई 2025 की रात को हुई और पीड़िता की मृत्यु 24 मई 2025 को दोपहर करीब 2:30 बजे अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हो गई। इस मामले में दो आरोपियों, हरि पालवी (27-40 वर्ष) और सुनील कोरकू (26-30 वर्ष),को गिरफ्तार किया गया है।
क्या है पूरा मामला ?
स्थान और समय: यह जघन्य अपराध खंडवा जिले के खलवा क्षेत्र में एक गांव में हुआ। पीड़िता, जो दो बच्चों की मां थी, 23 मई 2025 को एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद हरि पालवी के साथ एक रिश्तेदार को उसके गांव छोड़ने गई थी। इसके बाद हरि के घर पर उसे और सुनील कोरकू ने मिलकर गैंगरेप किया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, गैंगरेप के बाद एक आरोपी ने पीड़िता के निजी अंगों में हाथ डाला, जिससे उसकी आंतें बाहर निकल आईं। इससे गंभीर आंतरिक चोटें और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ, जिसके कारण उसकी मृत्यु हो गई। पोस्टमॉर्टम में पता चला कि पीड़िता की छोटी आंत का लगभग 176 इंच हिस्सा योनि मार्ग से बाहर निकल आया था। पेरिटोनियम (आंतरिक अंगों को ढकने वाली झिल्ली) में गंभीर छेद था, और कई आंतरिक रक्त के थक्के पाए गए। गर्भाशय और मलाशय बरकरार थे, लेकिन डगलस की थैली (पेट की गुहा की सुरक्षात्मक झिल्ली) फट गई थी।
आरोपियों की हरकत
पुलिस के अनुसार, हरि ने पीड़िता के शरीर में हाथ डालकर आंतों को बाहर निकाला और बाद में उन्हें वापस डालने की कोशिश की, लेकिन वह असफल रहा। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि एक लोहे या लकड़ी के सरिए का उपयोग किया गया, लेकिन पुलिस ने अपराध स्थल से ऐसा कोई वस्तु बरामद नहीं की। दोनों आरोपी पड़ोसी थे और पीड़िता उन्हें पहले से जानती थी।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने हरि पालवी और सुनील कोरकू को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 66 (मृत्यु का कारण बनाना), 70(1) (गैंगरेप), और 103(1) (हत्या की सजा) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अपराध स्थल से खून से सना बिस्तर बरामद करने की कोशिश की जा रही है, जो जांच में महत्वपूर्ण सबूत हो सकता है। पीड़िता का शव खंडवा जिला अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया, जहां फोरेंसिक विशेषज्ञों की निगरानी में जांच की गई।
परिवार की स्थिति और शिकायत
हरि की मां ने अगली सुबह पीड़िता को घायल अवस्था में देखा और उसके परिवार को सूचित किया। पीड़िता ने अपने परिवार को बताया कि हरि और सुनील ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। परिवार का आरोप है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने समय पर एम्बुलेंस या अन्य सहायता उपलब्ध नहीं कराई, जिसके कारण पीड़िता को तुरंत अस्पताल नहीं ले जाया जा सका। मृत्यु के बाद भी शव को अस्पताल ले जाने के लिए कोई वाहन नहीं दिया गया, और परिवार को उधार लेकर व्यवस्था करनी पड़ी। पीड़िता के पास 20,000 रुपये थे, जो उसके बच्चों ने गोवा में सड़क निर्माण कंपनी में काम करके बचाए थे।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना ने मध्य प्रदेश और देश भर में आक्रोश पैदा किया है, और इसे 2012 के दिल्ली निर्भया कांड की याद दिलाने वाला बताया जा रहा है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश को “रेप कैपिटल” करार दिया और मुख्यमंत्री मोहन यादव पर कानून-व्यवस्था संभालने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस और आदिवासी कांग्रेस ने भोपाल में विरोध प्रदर्शन किया और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना की मांग की ताकि आरोपियों को कड़ी सजा दी जा सके। आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने कहा कि उनकी पार्टी ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है, जो इस मामले की गहन जांच करेगी।
डॉक्टरों ने क्या बताया ?
डॉक्टरों के अनुसार, ऐसी चोटों के लिए तत्काल सर्जिकल हस्तक्षेप आवश्यक था। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण पीड़िता को हाइपोवोलेमिक शॉक (खून की कमी से अंगों तक ऑक्सीजन न पहुंचना) का सामना करना पड़ा, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। कम से कम एक लीटर खून की हानि हुई, और आंतों का ढांचा इतना क्षतिग्रस्त था कि वे शरीर के भीतर नहीं रह सकीं।
यह घटना न केवल एक जघन्य अपराध है, बल्कि समाज में महिलाओं, विशेष रूप से आदिवासी समुदाय की महिलाओं, की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है। पीड़िता के साथ हुई बर्बरता और प्रशासन की कथित लापरवाही ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस जांच जारी है, और समाज के विभिन्न वर्गों से कड़ी सजा और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग उठ रही है।







