स्पेशल डेस्क/नई दिल्ली : दिल्ली सरकार ने 7 जून 2025 को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ट्रांसजेंडर कल्याण एवं सशक्तिकरण बोर्ड के गठन की घोषणा की। यह कदम ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों, सम्मान और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे सामाजिक न्याय और समावेशी शासन का प्रतीक बताया है। आइए इस बोर्ड और इसकी योजनाओं को एक्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से विस्तार में समझते हैं।
बोर्ड का उद्देश्य और कार्य !
यह बोर्ड ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए कल्याणकारी नीतियों का निर्माण करेगा और विभिन्न सरकारी विभागों के साथ समन्वय स्थापित करेगा।ट्रांसजेंडर समुदाय की शिकायतों का समाधान करना बोर्ड की प्रमुख जिम्मेदारी होगी।
अब ट्रांसजेंडर व्यक्ति अपनी लैंगिक पहचान स्वयं घोषित कर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से पहचान प्रमाणपत्र और पहचान पत्र प्राप्त कर सकेंगे। यह प्रक्रिया पारदर्शी और ऑनलाइन होगी। बोर्ड शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए योजनाओं की सिफारिश करेगा।
मुख्य योजनाएं और सुविधाएं
दिल्ली सरकार ने बोर्ड के साथ-साथ ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए कई नई पहले शुरू करने की योजना बनाई है इसमें कुछ बिंदु दिए गए हैं।
- सरकारी भवनों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग शौचालयों का निर्माण किया जाएगा।
- सरकारी अस्पतालों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग वार्ड और लैंगिक-विशिष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।
- ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए सुरक्षित आश्रय गृह स्थापित किए जाएंगे।
- रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ट्रांसजेंडर समुदाय को कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान क्या कहा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि “यह बोर्ड केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह दिल्ली सरकार की ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने इसे समानता, सम्मान और समावेशन के लिए एक मील का पत्थर बताया। उनका लक्ष्य एक ऐसी दिल्ली का निर्माण करना है जो भारतीय संविधान के समानता और न्याय के मूल्यों को साकार करे।
दिल्ली महिला आयोग की सिफारिश
दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली सरकार से ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड के गठन की सिफारिश की थी। आयोग ने बताया कि तमिलनाडु, केरल, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे 12 राज्यों में पहले ही ऐसे बोर्ड स्थापित हो चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में केंद्र और राज्य सरकारों को ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड के गठन के लिए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसने इस दिशा में कदम उठाने की प्रक्रिया को तेज किया।
हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी हाल ही में ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड गठित किए हैं, जो ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
महत्व और प्रभाव !
यह बोर्ड ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा में शामिल करने और उनके खिलाफ भेदभाव को कम करने में मदद करेगा। पहचान पत्र की आसान और पारदर्शी प्रक्रिया से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी। यह कदम सामाजिक समावेशिता को बढ़ावा देगा और ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जीने में सहायता करेगा।
अधिकारों की रक्षा की दिशा
दिल्ली सरकार का यह कदम ट्रांसजेंडर समुदाय के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बोर्ड के गठन और इसके साथ शुरू की गई योजनाएं ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, और सामाजिक सम्मान जैसे क्षेत्रों में बेहतर अवसर प्रदान करेंगी। यह न केवल दिल्ली बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है।







