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Home राजनीति

विजय रूपाणी : म्यांमार से गुजरात की गद्दी तक, एक प्रेरणादायी सफर !

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 13, 2025
in राजनीति, राज्य
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विजय रूपाणी
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स्पेशल डेस्क/नई दिल्ली: विजय रमणिकलाल रूपाणी (2 अगस्त 1956 – 12 जून 2025) भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक प्रमुख राजनेता थे, जिन्होंने 7 अगस्त 2016 से 13 सितंबर 2021 तक गुजरात के 16वें मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकाल पूरे किए। म्यांमार में जन्मे और गुजरात में बसने वाले रूपाणी का जीवन संघर्ष, समर्पण और जनसेवा की कहानी है। उनकी मृत्यु 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए एक दुखद विमान हादसे में हुई, जब वे अपनी पत्नी और बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे। आइए उनके जीवन और राजनीतिक सफर विशेष विश्लेषण एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से समझते हैं।

विजय रूपाणी का जन्म और सफर

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विजय रूपाणी का जन्म 2 अगस्त 1956 को म्यांमार (तब बर्मा) की राजधानी रंगून (अब यांगून) में एक जैन बनिया परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता, मायाबेन और रमणिकलाल रूपाणी, के सात बच्चों में वे सबसे छोटे थे। उनके पिता रंगून में अनाज और चावल के व्यापारी थे। 1960 में म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता के कारण उनका परिवार भारत लौट आया और गुजरात के राजकोट में बस गया। राजकोट में उनके पिता ने बॉल बेयरिंग का व्यापार शुरू किया।

रूपाणी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में पूरी की। उन्होंने धरमेन्द्र सिंह जी आर्ट्स कॉलेज से बीए और सौराष्ट्र विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की। छात्र जीवन से ही उनका झुकाव समाजसेवा और राजनीति की ओर था।

रूपाणी का राजनीतिक शुरुआत

विजय रूपाणी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ता के रूप में की, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध छात्र संगठन है। 1971 में वे जनसंघ और आरएसएस से जुड़े, और 1978 से 1981 तक आरएसएस के प्रचारक रहे। 1975 में आपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाई और 11 महीने तक भावनगर और भुज की जेलों में रहे। इस दौरान उन्होंने रूसी भाषा सीखी और स्वेतलाना स्टालिन के पत्रों का अध्ययन किया, जिससे उनकी वैचारिक दृढ़ता और बढ़ी।

राजनीतिक करियर का विकास

प्रारंभिक भूमिकाए 1987 में रूपाणी राजकोट म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के कॉर्पोरेटर चुने गए और ड्रेनेज कमेटी के चेयरमैन बने। 1996-97 में वे राजकोट के मेयर बने, जिससे उनकी स्थानीय स्तर पर लोकप्रियता बढ़ी। 1998 में उन्हें गुजरात बीजेपी का प्रदेश महासचिव नियुक्त किया गया।

राज्यसभा और अन्य जिम्मेदारियां… 2006 से 2012 तक रूपाणी राज्यसभा सांसद रहे। इस दौरान उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में भी काम किया। 2013 में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उन्हें गुजरात म्यूनिसिपल फाइनेंस बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया। 2006 में वे गुजरात पर्यटन निगम के चेयरमैन भी रहे।

विधायक और मंत्री 2014 में, जब वाजुभाई वाला ने राजकोट पश्चिम सीट छोड़ी, रूपाणी ने उपचुनाव में जीत हासिल की और पहली बार विधायक बने। आनंदीबेन पटेल की सरकार में उन्हें परिवहन, जल आपूर्ति, श्रम और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपे गए। फरवरी 2016 में वे गुजरात बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने।

मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल

पहला कार्यकाल (2016): 2016 में गुजरात में पाटीदार आंदोलन और ऊना दलित अत्याचार जैसे मुद्दों के कारण राजनीतिक उथल-पुथल थी। आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद बीजेपी ने विजय रूपाणी को 7 अगस्त 2016 को मुख्यमंत्री नियुक्त किया। यह निर्णय नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सहमति से लिया गया, जो रूपाणी के पुराने परिचित थे। रूपाणी ने शांत और संगठन-उन्मुख नेतृत्व प्रदान किया, जिससे बीजेपी ने स्थानीय स्तर पर स्थिरता हासिल की।

दूसरा कार्यकाल (2017-2021): 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में रूपाणी के नेतृत्व में बीजेपी ने 182 में से 99 सीटें जीतीं, जो कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण था। रूपाणी ने राजकोट पश्चिम से जीत हासिल की और दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। उनके कार्यकाल में ‘वाइब्रेंट गुजरात’ समिट को बढ़ावा मिला, जिससे राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आया। उन्होंने सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई परियोजनाएँ, फसल बीमा योजनाएँ और ‘मुख्यमंत्री अमृतम योजना’ जैसी स्वास्थ्य योजनाओं को विस्तार दिया। उनकी सरकार ने बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार पर ध्यान दिया, जिससे गुजरात का औद्योगिक विकास नई ऊँचाइयों तक पहुँचा।

रूपाणी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा

11 सितंबर 2021 को रूपाणी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी में समय के साथ दायित्व बदलते रहते हैं। उनके बाद भूपेंद्र पटेल ने गुजरात की कमान संभाली। इस्तीफे के बाद, रूपाणी ने बीजेपी के संगठनात्मक कार्यों पर ध्यान दिया। 2022 में उन्हें पंजाब और चंडीगढ़ बीजेपी का प्रभारी नियुक्त किया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव और लुधियाना वेस्ट उपचुनाव में उनकी रणनीति ने बीजेपी के वोट शेयर को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

विजय रूपाणी ने बीजेपी महिला मोर्चा की सदस्य अंजलि रूपाणी से विवाह किया। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। उनकी पत्नी और बेटी लंदन में रहती थीं, और वे उनसे मिलने के लिए ही 12 जून को एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 से लंदन जा रहे थे।

अहमदाबाद विमान हादसा

12 जून को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लंदन के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 (बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर) टेकऑफ के कुछ मिनट बाद मेघानी नगर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में 242 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से 200 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई, जिसमें विजय रूपाणी भी शामिल थे। उनकी सीट नंबर 2-D थी, और वे बिजनेस क्लास में यात्रा कर रहे थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और गुजरात बीजेपी अध्यक्ष सीआर पाटिल ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।

विजय की विरासत

विजय रूपाणी को एक शांत, विवाद-मुक्त और संगठन-निष्ठ नेता के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने बीजेपी की विचारधारा को कभी नहीं छोड़ा और गुजरात में स्थिरता और सुशासन के प्रतीक बने। उनकी मृत्यु को भारतीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

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