Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट ने क्यों खींची आधार कार्ड की सीमा, जानिए सबकुछ

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 13, 2025
in राष्ट्रीय
A A
Supreme court
13
SHARES
421
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली। आधार कार्ड से देश का सबसे बड़ा पहचान पत्र कहा जाता है आज हर भारतीय के जीवन का अहम हिस्सा है. बैंक खाता खुलवाने से लेकर सरकारी सब्सिडी पाने तक, मोबाइल सिम लेने से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक, लगभग हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है. 12 अंकों का यह यूनिक नंबर, नाम, पता, जन्मतिथि, फोटो और बायोमेट्रिक जानकारी के साथ व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करता है. लेकिन, हाल के दिनों में यह सवाल फिर से चर्चा में है कि आखिर आधार कार्ड की कानूनी सीमा क्या है? क्या यह नागरिकता का प्रमाण है? क्या इसे निवास के पुख्ता सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है?

इन सवालों पर देश की सर्वोच्च अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक ने साफ कर दिया है कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है और न ही इसे हर स्थिति में निवास का निर्णायक सबूत माना जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में और बॉम्बे हाईकोर्ट ने नागरिकता विवादों में यह टिप्पणी देकर आधार की सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं.

इन्हें भी पढ़े

fighter aircraft

भारत में अब बिना पायलट के उड़ेंगे लड़ाकू विमान! AI संभालेगा कमान

August 26, 2026
modi

मोदी कैबिनेट में आएंगे युवा चेहरे? इन राज्यों से बन सकते हैं नए मंत्री, क्या होंगे समीकरण

August 25, 2026
एंटोनियो गुटेरेस

UN चीफ बोले- चीन-अमेरिका नहीं थोप सकते मनमानी, भारत का बढ़ रहा दबदबा

August 25, 2026
DRDO

DRDO की घातक मिसाइल तकनीक से अब निजी कंपनियां बनाएंगी हथियार!

August 25, 2026
Load More

आधार कार्ड: पहचान क्या है और इसमें क्या-क्या होता है?
आधार कार्ड, यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) द्वारा जारी किया गया एक 12-अंकीय पहचान नंबर है, जो भारत के निवासियों को उनके जनसांख्यिकीय (नाम, पता, लिंग, जन्मतिथि) और बायोमेट्रिक डेटा (फोटोग्राफ, दस अंगुलियों के निशान, आइरिस स्कैन) के आधार पर दिया जाता है.

यह कार्ड पहचान और पते दोनों का प्रमाण माना जाता है और इसका प्रयोग बैंक खाता खोलने से लेकर सरकारी सब्सिडी तक में होता है.ऑफलाइन XML फॉर्मैट में आधारधारक का नाम, पता, फोटो, लिंग, जन्मतिथि, और लिंक किया हुआ मोबाइल नंबर व ई‑मेल (हैश स्वरूप में) मौजूद होता है.आधार कार्ड की वैधता आजीवन होती है और पहली बार पंजीकरण नि:शुल्क होता है

सुप्रीम कोर्ट का क्या है रुख?
बिहार में चल रहे विशेष गहन सर्वे (SIR) के दौरान मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया के संदर्भ में, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है. कोर्ट ने चुनाव आयोग के उस रुख को सही ठहराया जिसमें उसने आधार को निवास प्रमाण के रूप में नहीं स्वीकारा. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार और राशन कार्ड को निवास का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता, विशेष रूप से बिहार में चल रही SIR प्रक्रिया में.

बोम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि नागरिकता प्रमाण नहीं, अन्य दस्तावेज जरूरी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि आधार, पैन या वोटर आईडी को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता. नागरिकता के सत्यापन के लिए, कानूनन अधिक प्रमाण-आधारित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है. यह निर्णय नागरिकता संबंधी संवेदनशील मुद्दों में आधार के सीमित उपयोग पर केंद्रित है.

सीमित उपयोग लेकिन व्यापक प्रभाव
सारांश में, आधार कार्ड एक पहचान और निवास का दस्तावेज हो सकता है, लेकिन नागरिकता का प्रमाण नहीं. सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि आधार को सार्वजनिक न्यायिक या संवैधानिक प्रक्रिया में निर्णायक आधार नहीं बनाया जाना चाहिए. बिहार SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह दोहरा दिया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार चुनाव आयोग का है और उसमें आधार का उपयोग निर्णायक नहीं हो सकता. इससे स्पष्ट होता है कि आधार कार्ड के व्यापक उपयोग के बावजूद जैसे बैंकों से लेकर सब्सिडी तक आधार अनिवार्य हुआ है. न्यायपालिका ने इसकी सीमाओं को रेखांकित किया है. यह फ़ैसला नागरिकता और मताधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों में दस्तावेज़ों की सटीकता व भरोसेमंदता की रक्षा करता है.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

किताबें बदलने का आसान तरीका

June 22, 2022
वीरभद्र सिंह

हिमाचल प्रदेश में राजपूतों के अलावा कोई और मुख्यमंत्री क्यों नहीं बन पाता!

November 1, 2022
india-pak

युद्ध से डरपोक पाकिस्तान को भय…’चार दिन में युद्ध तय’…आर्थिक रूप से महंगा पड़ेगा !

April 29, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • दिल्ली में पानी की किल्लत होगी दूर, सरकार ने मंजूर किए 11,427 करोड़, क्या है पूरा प्लान?
  • टपकेश्वर महादेव की भव्य शोभायात्रा में शामिल हुए CM धामी, प्रदेश की खुशहाली की मांगी मन्नत
  • दिल्ली लक्ष्मी योजना शुरू, महिलाओं को मिलेंगे ₹2,500 हर माह

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.