प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर हाल ही में खतरे के निशान (205.33 मीटर) को काफी ऊपर पार कर गया है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की रिपोर्ट के अनुसार, 3 सितंबर की सुबह 5:00 बजे तक नदी का जलस्तर पुराने रेलवे ब्रिज (ओल्ड रेलवे ब्रिज) पर 206.74 मीटर पहुंच गया था, जो चेतावनी स्तर (204.50 मीटर) से भी काफी अधिक है। इससे पहले, 2 सितंबर को शाम 7:00 बजे यह 206.22 मीटर था, और 3 सितंबर को सुबह 6:00 बजे तक 206.76 मीटर तक पहुंच गया। यह स्तर 2023 की बाढ़ (जब जलस्तर 208.66 मीटर तक पहुंचा था) से कम है, लेकिन फिर भी गंभीर है।
बारिश की चेतावनी जारी
यमुना नदी में जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज और वजीराबाद बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक “हथिनीकुंड बैराज से 2 सितंबर की रात 9:00 बजे तक 1,76,000 क्यूसेक (घन फुट प्रति सेकंड) पानी छोड़ा गया।”
वजीराबाद बैराज से 93,260 क्यूसेक और ओखला बैराज से 73,619 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। इन बैराजों से छोड़े गए पानी को दिल्ली पहुंचने में 48-50 घंटे लगते हैं, जो अब नदी के उफान का कारण बन रहा है। इसके अलावा, दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। मौसम विभाग ने 3 सितंबर को भी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे अगले 24-48 घंटों में जलस्तर में और वृद्धि की आशंका है। विशेषज्ञों का अनुमान है “कि जलस्तर 206.50 मीटर को पार कर सकता है, और यदि 207 मीटर तक पहुंचा तो 2023 जैसी बाढ़ की स्थिति हो सकती है।”
बाढ़ का पानी सड़कों पर
नदी के बढ़ते जलस्तर से दिल्ली के पूर्वी और ट्रांस-यमुना इलाकों में पानी भर गया है। यमुना बाजार में घरों और गलियों में पानी घुस गया, कई घरों के निचले हिस्से डूब चुके हैं। मयूर विहार के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी सड़कों पर बह रहा है।
झरोड़ा कलां, मूर विहार, शाहदरा, विवेक विहार यहां पानी घरों में प्रवेश कर गया, लोग फंस गए हैं। अन्य क्षेत्र आईटीओ, कश्मीरी गेट, प्रीत विहार, लोहा पुल और पुराने रेलवे ब्रिज (ORB) के आसपास। सिग्नेचर ब्रिज से कश्मीरी गेट तक का इलाका प्रभावित है।
यातायात पर क्या प्रभाव ?
पुराना लोहा पुल (ओल्ड आयरन ब्रिज) को 2 सितंबर शाम 4:00 बजे से बंद कर दिया गया है। ट्रैफिक को हनुमान सेतु, राजा राम कोहली मार्ग और गीता कॉलोनी रोड से डायवर्ट किया जा रहा है। कई प्रमुख सड़कों (जैसे आईटीओ-अक्षरधाम) पर जलभराव से जाम लग गया है। ड्रोन तस्वीरों से पता चलता है कि नदी उफान पर है, और घाट-श्मशान जैसे क्षेत्र जलमग्न हो चुके हैं। जानवरों और मछली पालन को भी नुकसान हो रहा है।
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने तुरंत निचले इलाकों को खाली कराने के निर्देश जारी किए हैं। यमुना बाजार, मयूर विहार, शाहदरा आदि इलाकों से हजारों लोगों को नावों के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को केवल जरूरी सामान लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
राहत शिविर स्थापित किए गए
मयूर विहार और अन्य क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां भोजन, दवा और शरण की व्यवस्था है। बचाव टीमें (एनडीआरएफ, एसडीआरएफ) सक्रिय हैं। छह एजेंसियां (सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, PWD, जल बोर्ड, MCD, शहरी विकास, राजस्व विभाग) 24×7 ड्यूटी पर हैं। नालों की सफाई, पंपिंग से अतिरिक्त पानी निकालना और ओखला बैराज के गेट खोलना शामिल है।
मुख्यमंत्री (या संबंधित अधिकारी) ने कहा है कि “सरकार पूरी तरह तैयार है। लोगों से नदी किनारे न जाने और अनावश्यक यात्रा न करने की अपील की गई है। यदि जलस्तर 206 मीटर के ऊपर रहा, तो और अधिक इलाकों को खाली करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।”
भविष्य की संभावनाएं और सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में और बारिश से स्थिति गंभीर हो सकती है। दिल्ली की बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर यमुना के बाढ़ मैदानों पर अतिक्रमण (जैसे O-Zone क्षेत्र में अवैध निर्माण) के कारण। 2024 की एक रिपोर्ट में पाया गया कि यमुना का 75% कैचमेंट एरिया अतिक्रमित हो चुका है।
लोगों के लिए सलाह
निचले इलाकों में रहने वाले तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाएं। रेडियो/टीवी/ऐप से अपडेट रहें। मवेशियों और जरूरी सामान को सुरक्षित रखें। बाढ़ क्षेत्र में न जाएं, और यदि फंसें तो हेल्पलाइन (1077 या स्थानीय पुलिस) पर संपर्क करें। यह स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए नवीनतम अपडेट के लिए CWC या DDMA की आधिकारिक वेबसाइट चेक करें। बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारी मजबूत बताई जा रही है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।







