नई दिल्ली : पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार, जो देश के विदेश मंत्री भी हैं, उन्होंने एक बार फिर से इंटरनेशनल फोरम पर इंडस वॉटर ट्रीटी का मुद्दा उठाया है। उन्होंने ईयू मंच पर जोर देकर कहा कि इंटस वॉटर ट्रीटी स्थगित करना “इलाके की स्थिरता के लिए असली खतरा” है। इशाक डार, EU इंडो-पैसिफिक मिनिस्टीरियल फोरम राउंडटेबल में अपना भाषण दे रहे थे। भारत ने इस साल अप्रैल महीने में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इंडस वॉटर ट्रिटी को स्थगित कर दिया था।
इशाक डार ने कहा कि “पानी को सहयोग का सोर्स बना रहना चाहिए, न कि पॉलिटिक्स के लिए हथियार बनाया जाना चाहिए।” जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने भारत के साथ तनातनी को शांत करने की कोशिशों में EU हाई रिप्रेजेंटेटिव समेत इंटरनेशनल पार्टनर्स की तारीफ की। सिंधु जल संधि के अलावा, इशाक डार ने कश्मीर मुद्दे को भी इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर उठाया, जबकि भारत ने साफ कर रखा है कि कश्मीर का मुद्दा भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है और किसी भी तीसरे पक्ष का बीच में आना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पाकिस्तान में कृषि सेक्टर में तबाही की आशंका
सिडनी के नॉन-प्रॉफिट इंस्टिट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) की 2025 इकोलॉजिकल थ्रेट रिपोर्ट में पिछले महीने बताया गया है कि पाकिस्तान, जिसकी 80 परसेंट खेती सिंधु बेसिन के पानी पर निर्भर है, वो पानी की कमी के गंभीर खतरे का सामना कर रहा है, क्योंकि भारत के पास सिंधु नदी का बहाव बदलने की क्षमता है। 1960 के एग्रीमेंट के तहत, भारत ने पश्चिमी नदियों, सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान के साथ शेयर करने की सहमति दी थी, जबकि ब्यास, रावी और सतलुज समेत पूर्वी नदियों पर उसका कंट्रोल बना रहा। इस संधि के तहत, नई दिल्ली पानी के बहाव को पूरी तरह से रोक या मोड़ नहीं सकता, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि डैम के ऑपरेशन में मामूली बदलाव भी पाकिस्तानी किसानों पर गंभीर असर डाल सकते हैं।
इस रिपोर्ट में आगे चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान की स्टोरेज कैपेसिटी नदी के बहाव के हिसाब से सिर्फ करीब 30 दिनों तक ही सीमित है, जिससे उसे मौसमी कमी का खतरा है। मई में, भारत ने चिनाब नदी पर सलाल और बगलिहार डैम में रिज़र्वॉयर फ्लशिंग की थी। इस वजह से, पाकिस्तान में चिनाब के किनारे बाढ़ जैसे हालात बन गए थे।







