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नाटो सदस्यता नहीं, जमीन भी छोड़नी पड़ेगी… US का यूक्रेन शांति प्लान लीक?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
November 23, 2025
in विश्व
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Ukraine of the US
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वॉशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का यूएस-रूस शांति प्लान ड्राफ्ट लीक हो गया है। इससे पता चलता है कि यूक्रेन के कंट्रोल वाले इंडस्ट्रियल पूर्वी डोनबास इलाके को रूस को असल में कंट्रोल में देने का प्रस्ताव है। वहीं यूक्रेन से अपनी आर्म्ड फोर्स की संख्या घटाकर 600,000 करने और नाटो में शामिल नहीं होने को कहा गया है। ड्राफ्ट लीक होने के बाद इस पर बहस शुरू हो गई है कि इसका ज्यादा फायदा किसे होगा। यानी इसमें रूस और यूक्रेन के लिए क्या संदेश छुपा है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, लीक ड्राफ्ट की 28 में से कई ऐसी बातें हैं, जो यूक्रेन को मंजूर हो सकती हैं। इसमें यूक्रेन की सॉवरेनिटी कन्फर्म की जाएगी। साथ ही रूस, यूक्रेन और यूरोप के बीच नॉन-अग्रेसन एग्रीमेंट होगा। इसमें कीव के लिए भरोसेमंद सिक्योरिटी गारंटी और 100 दिनों में चुनाव की मांग होगी। रूस के यूक्रेन पर हमला करने की स्थिति में मजबूत कोऑर्डिनेटेड मिलिट्री का प्रस्ताव है।

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क्या मानेगा यूक्रेन?

सिक्योरिटी गारंटी के बारे में डिटेल नहीं है कि यह कौन देगा और कितनी मजबूत होगी। यह गारंटी यूक्रेन पर हमले को सभी पर हमला मानने के नाटो स्टाइल आर्टिकल फाइव कमिटमेंट से बहुत कम है। इसमें सबसे विवादित प्रस्तावों में यूक्रेन का अपना खाली इलाका रूस को सौंपना और अपनी आर्म्ड फोर्स का साइज कम करना शामिल है।

ड्राफ्ट में कहा गया है कि यूक्रेनी सेना डोनेट्स्क ओब्लास्ट के उस हिस्से से हट जाएगी, जिस पर अभी तक उसका कंट्रोल है। इस वापसी वाले जोन को एक न्यूट्रल डीमिलिटराइज्ड बफर जोन माना जाएगा। इसे इंटरनेशनल लेवल पर रशियन फेडरेशन का इलाका माना जाएगा। रशियन सेना इस डीमिलिटराइज्ड जोन में नहीं जाएगी।

यूक्रेन छोड़ेगा अपना इलाका!

यूक्रेन के लिए यह इलाका छोड़ना आसान नहीं होगा, यहां करीब ढाई लाख यूक्रेनी रहते हैं। डोनेट्स्क के स्लोव्यांस्क, क्रामाटोर्स्क और ड्रुज़्किव्का के ज्यादातर यूक्रेनियों को यह मंजूर नहीं होगा। रूस ने पोक्रोव्स्क शहर पर कब्जा करने की कोशिश में एक साल से ज्यादा समय लगा दिया है। यूक्रेन बिना लड़ाई के ऐसे जरूरी स्ट्रेटेजिक हब को शायद ही सौंपेगा।

यूक्रेनी आर्म्ड फोर्स का साइज 600,000 लोगों तक सीमित होगा। शांति के समय में 600,000 बड़ी संख्या लग सकती है। हालांकि रूस की मंजूरी के लिए यह बड़ी संख्या हो सकती है। यूक्रेनी प्रतिनिधि क्रिस्टीना हेयोविशिन ने UN सिक्योरिटी काउंसिल में कहा है कि यूक्रेन अपने सुरक्षा अधिकारों या हमारी सेना क्षमता पर कोई रोक नहीं मानेगा।

यूक्रेन के हाथ से निकलेगा इलाका

ड्राफ्ट में प्रस्ताव है कि क्रीमिया, लुहान्स्क और डोनेट्स्क को रूसी क्षेत्र माना जाएगा। दूसरे शब्दों में यूक्रेन और दूसरे देशों को कानून के जरिए रूसी कंट्रोल को मान्यता देने की जरूरत नहीं होगी। इससे कीव ऐसी शर्तों को मान सकता है क्योंकि इससे यूक्रेन के संविधान पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जो कहता है कि उसकी सीमाएं अलग नहीं की जा सकतीं और जिनका उल्लंघन नहीं किया जा सकता।

ड्राफ्ट में कहा गया है कि यूक्रेन अपने संविधान में यह शामिल करने के लिए सहमत है कि वह नाटो में शामिल नहीं होगा और नाटो अपने कानूनों में यह नियम शामिल करने के लिए सहमत है कि यूक्रेन को भविष्य में शामिल नहीं किया जाएगा। ईयू और नाटो में शामिल होना यूक्रेन के संविधान का हिस्सा है। इसके अलावा कीव को नॉन-न्यूक्लियर स्टेट होने का वादा करना होगा।

रूस को आइसोलेशन से वापस लाना

ड्राफ्ट में रूस को आइसोलेशन से वापस लाने की बात कही गई है। रूस को ग्लोबल इकॉनमी में फिर से शामिल किया जाएगा। उसे G8 ग्रुप ऑफ पावर्स में वापस बुलाया जाएगा। ड्राफेट में प्रस्ताव है कि 100 अरब डॉलर के फ्रीज किए गए रूसी एसेट को अमेरिकी अगुवाई में यूक्रेन को फिर से बनाने और उसमें इन्वेस्ट करने की कोशिशों में लाया जाएगा।

एक्सपर्ट का कहना है कि इस प्लान में यूक्रेन की मिलिट्री या उसकी आर्म्स इंडस्ट्री पर हथियारों की लिमिट लगाने की जरूरत नहीं है। इसमें इसका एक प्रोविजन रखा गया है। अगर यूक्रेन मॉस्को या सेंट पीटर्सबर्ग पर मिसाइल दागता है तो सिक्योरिटी गारंटी खत्म मानी जाएगी। यह प्लान यूक्रेन के बनाए जा रहे लंबी दूरी के हथियारों यानी फ्लेमिंगो और लॉन्ग नेप्च्यून मिसाइलों पर रोक नहीं लगाता है।

क्या यह पक्का शांति प्लान?

यूएस के इस ड्राफ्ट पर कई सवाल भी हैं। गुरुवार को US वेबसाइटों पर लीक हुई कुछ डिटेल अभी साफ नहीं हैं। दावा है कि रूस के स्पेशल दूत किरिल दिमित्रीव ने इस प्लान पर चर्चा करने के लिए विटकॉफ के साथ तीन दिन तक बिताए। उन्होने मॉस्को के हिसाब से एक इस डील के लिए सुझाव दिए।

ड्राफ्ट में यूक्रेनी इलाका रूस को सौंपने की बात पुतिन की तरफ झुकाव का संकेत है। हालांकि दक्षिण में फ्रंट लाइन को फ्रीज करना रूस के लिए मुश्किल साबित हो सकता है, जिसने अपने संविधान में खेरसॉन और जापोरिज्जिया को मिला लिया है।

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