नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारी आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसा अनुमान है कि नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में 18 महीने या उससे ज्यादा का समय लग सकता है। वहीं, अलग-अलग राज्य के कर्मचारियों को भी सिफारिशों के लागू होने का इंतजार है। हालांकि, सवाल यह भी है कि क्या केंद्र के साथ ही राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ मिलेगा? इस सवाल का जवाब कुछ विशेषज्ञों ने इकोनॉमिक टाइम्स को दिया है।
बाध्य नहीं हैं राज्य सरकारें
विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य सरकारें केंद्र की तरह हर 10 साल में वेतन संशोधन करने के लिए बाध्य नहीं होतीं। देश के कुछ ऐसे भी राज्य हैं जिसने अपने-अपने वेतन आयोग गठित किए हैं। केरल की ही बात करें तो 11वां वेतन आयोग चल रहा है। वहीं, कर्नाटक में 7वां और पंजाब में 6वां वेतन आयोग लागू है।
ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल के मुताबिक भले ही राज्यों में अलग-अलग वेतन आयोग हों लेकिन राज्यों और केंद्र की वेतन संरचना मोटे तौर पर एक जैसी ही रहती है। राज्य वेतन आयोग की प्रक्रिया भी लगभग केंद्रीय वेतन आयोग जैसी ही होती है। नेक्सडिग्म के निदेशक रामचंद्रन कृष्णमूर्ति का कहना है कि केंद्र के बाद राज्य सरकारों पर कोई कानूनी समय-सीमा लागू नहीं होती। 7वें वेतन आयोग के दौरान भी कुछ राज्यों ने 2017 में लागू किया तो कुछ ने 2020 या उसके बाद किया है।
सैलरी का फिटमेंट फैक्टर और एरियर
अधिकतर मामलों में राज्यों का फिटमेंट फैक्टर केंद्र के बराबर या उसके आसपास होता है। उदाहरण के लिए, 7वें केंद्रीय वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जबकि पंजाब के 6वें वेतन आयोग में यह 2.59 रहा और उत्तर प्रदेश में 2.57 ही रखा गया। एरियर की बात करें तो पिछली वेतन आयोग अवधि के खत्म होने के अगले दिन से देय होता है। हालांकि, यह पूरी तरह केंद्र और राज्य सरकार की घोषणा पर निर्भर करता है। खास बात यह है कि इस बार 8वें वेतन आयोग की शर्तों में लागू होने की तारीख स्पष्ट नहीं की गई है, जिससे असमंजस बना हुआ है।






