Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

मोदी सरकार के बजट 2026 में स्टूडेंट्स के लिए क्या होगा खास?, जानिए

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 19, 2026
in राष्ट्रीय, व्यापार
A A
budget
19
SHARES
622
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली। यह आंकड़ा उत्साहित करता है कि भारत की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा है। इसके कारण ही संभावना जताई जा रही है कि भारत विश्व का ‘स्किल कैपिटल’ बन सकता है, लेकिन इस उत्साह को सच उजागर करते यह आंकड़े हतोत्साहित भी कर रहे हैं कि बीते वर्षों में औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग की भागीदारी अलग-अलग रिपोर्ट के अनुसार, मात्र दो से पांच प्रतिशत ही है।

इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि अलग से कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय बनाकर मोदी सरकार ने 2014 से इस दिशा में प्रयास तेज किए हैं, लेकिन सवाल उठता है कि धरातल पर क्या है! इसका परिणाम क्या रहा!

इन्हें भी पढ़े

IRCTC E-Pantry Service

ई-पैंट्री सर्विस क्‍या है जिसे IRCTC ने इन 25 ट्रेनों में किया लॉन्‍च, कैसे होगा आपको फायदा?

February 9, 2026
india -malaysia

पाकिस्तान के दोस्त को भारत ने साध लिया, मोदी ने चल दी ब्रिक्स वाली चाल?

February 9, 2026
Supreme court

सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को कड़ा संदेश, ‘SIR में कोई रुकावट बर्दाश्त नहीं करेंगे’

February 9, 2026
online scams

ऑनलाइन केवाईसी अपडेट के नाम पर लोगों से हो रही ठगी, छोटी सी भूल पड़ेगी भारी

February 9, 2026
Load More

भारत में केवल 2-5% युवा ही औपचारिक कौशल प्रशिक्षण लेते हैं
शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के प्रयास और कौशल विकास की ढेरों योजनाओं के बावजूद रोजगार-स्वरोजगार एक मुद्दा बना हुआ है।

दरअसल, मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद से ही प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना यानी पीएमकेवीआइ की ‘अंब्रेला स्कीम’ के तहत कौशल विकास की विभिन्न योजनाएं चल रही हैं। यह भी सच है कि इसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर बार-बार इसमें संशोधन किया गया और वर्तमान में इसका चौथा चरण चल रहा है।

इसके तहत उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार आइटीआइ व अन्य कौशल प्रशिक्षण संस्थानों में नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। औद्योगिक प्रशिक्षण को व्यावहारिक बनाने के लिए उद्योगों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।

इसके बावजूद इस चुनौती को कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय भी रेखांकित करता रहा है कि अभी भी उद्योग इतनी गंभीरता से सक्रिय नहीं हुए हैं। बदलती प्रौद्योगिकी के कारण स्किल गैप बना हुआ है।

चूंकि, विशेषज्ञों का जोर इस पर था कि शिक्षा और कौशल को एक ट्रैक पर लाते हुए शिक्षा को किताबी नहीं रखते हुए कौशल से जोड़कर युवाओं को रोजगार के कुशल बनाना होगा, इसीलिए सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लेकर आई। मगर, व्यावहारिक समस्या को आंकड़ों के माध्यम से समझा जा सकता है।

सकल नामांकन अनुपात 78 प्रतिशत
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, दसवीं तक सकल नामांकन अनुपात 78 प्रतिशत है, जो बारहवीं तक का 58 प्रतिशत है तो स्नातक स्तर तक पहुंचते-पहुंचते 29 प्रतिशत रह जाता है।

इसी तरह समग्रता में बात करें तो भारत को विकसित बनाने के लिए युवा पीढ़ी को इससे कहीं अधिक गति से व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोड़ना होगा।

जैसे कि भारत के दो से पांच प्रतिशत की तुलना में कोरिया में 96 प्रतिशत, जर्मनी में 75 प्रतिशत, जापान में 80 प्रतिशत तो यूनाइटेड ¨कगडम में यह 68 प्रतिशत तक है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण करना होगा सुनिश्चित
अखिल भारतीय व्यावसायिक शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) के वाइस चेयरमैन एमपी पूनिया का कहना है कि चूंकि स्कूली शिक्षा में अभी हमारे छात्र व्यावसायिक प्रशिक्षण नहीं ले रहे हैं, इसलिए विभिन्न परिस्थितियों के कारण जब बड़े पैमाने पर (करीब 69 प्रतिशत) छात्र उच्च शिक्षा नहीं ले पाते तो उन स्कूली शिक्षा स्तर के युवाओं के पास कोई हुनर नहीं होता।

उद्योग इन युवाओं को स्वीकार नहीं करते। वह मानते हैं कि जिस तरह सिंगापूर, ब्रिटेन आदि देशों में नौवीं कक्षा से कौशल प्रशिक्षण शुरू हो जाता है, वैसा ही यहां करना होगा। इसके साथ ही स्नातक स्तर पर 50 प्रतिशत अन्य पाठ्यक्रमों के साथ 50 प्रतिशत कौशल प्रशिक्षण की भागीदारी करनी होगी।

एमपी पूनिया कहते हैं कि सरकार को बजट बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उस बजट का सही प्रबंधन करना है। नए पाठ्यक्रम बनाकर, एनईपी को अच्छे ढंग से लागू कर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण सुनिश्चित करना होगा।

व्यावसायिक उत्पादकता से जुड़े शोध को मिल सकता है बढ़ावा
बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति को भुनाते हुए मानव पूंजी तैयार करने पर सभी राज्यों के मुख्य सचिवों व विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया था।

इसमें शिक्षा विभाग के कार्यक्रमों पर विशेष चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, सरकार पीएचडी के माध्यम से शोध कार्यक्रमों में बड़े बदलाव कर सकती है।

किसी भी मनचाहे विषय में शोध करने की बजाए ऐसे शोध को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिनकी व्यावसायिक उत्पादकता हो।

एनईपी के लक्ष्यों के अनुसार, चूंकि वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत युवाओं को कौशल से जोड़ना है, इसलिए शिक्षण संस्थानों में रिसर्च पार्क, इनक्यूबेटर की स्थापना, नए युवाओं को बेहतर इन्सेंटिव आदि देकर उन्हें प्रशिक्षक के रूप में तैयार करने के लिए योजना ला सकती है।

उद्योगों की भागीदारी, नए कोर्स, अंतरराष्ट्रीय मानक आवश्यक
इसके अलावा संभावना है कि बिना कौशल प्रशिक्षण लिए शिक्षा से विरत हो चुके युवाओं को फिर से इस प्रक्रिया में जोड़ने के लिए हर ब्लाक में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान खोलने का निर्णय हो सकता है। ध्यान रहे कि सरकार का लक्ष्य 2035 तक उच्च शिक्षा के जीईआर को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का है।

सरकार को उद्योगों की कौशल प्रशिक्षण में भागीदारी बढ़ाने के लिए एमएसएमई को जोड़ना होगा। उन्हें अप्रेंटिसशिप कराने के लिए स्किल वाउचर देने चाहिए। इसके साथ ही जर्मनी माडल पर एक दिन की थ्योरी क्लास और पांच दिन का उद्योगों में प्रेक्टिकल क्लास शुरू करनी चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

वेकोलि ने अन्नामृत फाउंडेशन को प्रदान किए 1000 इंसुलेटेड कंटेनर

April 9, 2024
india economy

आर्थिक विकास के दृष्टि से वित्तीय वर्ष 2023-24 भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ

June 8, 2024
wto

नैतिक महत्त्व का फैसला?

April 26, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • रूस ने भारतीयों को नौकरी देने में दिखाई दिलचस्पी, भर-भरकर जारी हो रहे वर्क परमिट
  • ई-पैंट्री सर्विस क्‍या है जिसे IRCTC ने इन 25 ट्रेनों में किया लॉन्‍च, कैसे होगा आपको फायदा?
  • पाकिस्तान के दोस्त को भारत ने साध लिया, मोदी ने चल दी ब्रिक्स वाली चाल?

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.