नई दिल्ली। यूरोपीय यूनियन (ईयू) के साथ संभावित व्यापार समझौते से कृषि व टेक्सटाइल निर्यात को सबसे अधिक मदद मिल सकती है। अभी कृषि, मांस व अन्य प्रोसेस्ड आइटम को ईयू में निर्यात करने पर15.2 प्रतिशत तो टेक्सटाइल व गारमेंट पर 10 प्रतिशत का शुल्क लगता है। व्यापार समझौते के बाद ईयू के बाजार में इन वस्तुओं पर शून्य शुल्क हो जाएगा और निश्चित रूप से इन भारतीय आइटम का निर्यात ईयू के बाजार में कई गुना बढ़ सकता है।
गत वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईयू में 5.2 अरब डॉलर के कृषि, मांस व प्रोसेस्ड आइटम तो 7.3 अरब डॉलर के टेक्सटाइल व गारमेंट का निर्यात किया था। ईयू के साथ व्यापार समझौता होने पर पिछले चार सालों में यह नौवां समझौता होगा। गत 18 सालों से ईयू के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी जो बीच-बीच में टूटती रही।
27 जनवरी को घोषणा की उम्मीद
आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर यूरोपीयन काउंसिल और यूरोपीयन कमीशन के प्रेसिडेंट भारत पधार रहे हैं और पूरी उम्मीद है कि 27 जनवरी को ईयू के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर जारी वार्ता सहमति के साथ समाप्त होने की घोषणा कर दी जाएगी। व्यापार पर अमेरिका के साथ चल रहे आंख-मिचौली के खेल को देखते हुए ईयू के साथ होने वाले इस व्यापार समझौते को काफी अहम माना जा रहा है।
50 प्रतिशत शुल्क के बाद अमेरिका के बाजार में भारतीय टेक्सटाइल का निर्यात प्रभावित हो रहा है। दो दर्जन से अधिक देशों वाले ईयू की अर्थव्यवस्था 23 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर से अधिक की है। फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, बेल्जियम जैसे देशों के शामिल होने से ईयू की 45 करोड़ आबादी भारतीयों की तुलना में कई गुना अधिक खपत करने की क्षमता रखते हैं। भारत अमेरिका में 88 अरब डॉलर तो ईयू में 76 अरब डॉलर का निर्यात करता है।
फार्मा जैसे आइटम के निर्यात को भी फायदा
ईयू के साथ व्यापार समझौता होने से कंप्यूटर, प्लास्टिक, इलेक्ट्रिकल्स व इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा जैसे आइटम के निर्यात को भी फायदा मिल सकता है। किसानों के हितों को देखते हुए भारत ने अपने कृषि व डेयरी आइटम को ईयू के लिए नहीं खोलने का फैसला किया है। ईयू से आने वाले वाइन, ऑटमोबाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स कच्चे माल, मशीनरी जैसे आइटम पर भारत शुल्क कम कर सकता है जिससे ये आइटम भारत में सस्ते हो जाएंगे।
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईयू के कार्बन बार्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबैम) से निपटने की है। इस पर अमल से भारत के स्टील व एल्युमीनियम निर्यात प्रभावित हो सकते है। ईयू के साथ व्यापार समझौते में सर्विस सेक्टर व प्रोफेशनल्स को काम करने का मौका देना भी शामिल किया गया है।







