नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी बजट के बाद बढ़ जाएगी? या देर से लागू होन पर एरियर मिलेगा? कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग के तहत मिलने वाले सैलरी हाइक, लागू होने की तारीख और इसमें लगने वाले टाइम पीरियड की जानकारी 1 फरवरी को बजट के बाद मिल सकती है।हालांकि, कर्मचारियों को सैलरी बढ़ोतरी की उम्मीद जनवरी 2026 से थी, वह फिलहाल दूर जाती दिख रही है।
जनवरी बीत चुका है, लेकिन 8वें वेतन आयोग को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि सैलरी रिवीजन तय समय पर लागू नहीं हो पाएगी। रेटिंग एजेंसी ICRA की रिपोर्ट भी यही इशारा करती है कि देरी का असर सिर्फ कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि आने वाले सालों में सरकार के बजट पर भी पड़ेगा।
क्यों अटका है वेतन आयोग का मामला
परंपरा के मुताबिक हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू होता है। 7वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ था, इसलिए 8वें आयोग से भी जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद थी। लेकिन ICRA का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट आने में अभी 15 से 18 महीने लग सकते हैं। ऐसे में निकट भविष्य में सैलरी बढ़ने की संभावना कम है। कर्मचारियों के लिए इसका मतलब है कि उन्हें करीबन 2 साल इंतजार करना पड़ सकता है।
एरियर की उम्मीद, लेकिन साथ में चिंता
देरी का एक पहलू यह भी है कि जब वेतन आयोग लागू होगा, तो उसे 1 जनवरी 2026 से पिछली तारीख से लागू किया जा सकता है। यानी कर्मचारियों को एक साथ 18 महीने का एरियर मिल सकता है। यह सुनने में राहत जैसा है, लेकिन इससे सरकार पर एक ही साल में भारी फाइनेंशियल दबाव बन सकता है। ICRA का अनुमान है कि FY2028 में सैलरी खर्च 40 से 50 फीसदी तक बढ़ सकता है।
पुराने अनुभव क्या बताते हैं?
7वें वेतन आयोग में सिर्फ 6 महीने का एरियर था, फिर भी एक साल में वेतन खर्च 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया था। 6वें वेतन आयोग में देरी और ज्यादा थी, जिससे ढाई साल से अधिक का एरियर देना पड़ा और बजट पर लंबे समय तक दबाव बना रहा। यही वजह है कि 8वें वेतन आयोग को अब सिर्फ वेतन बढ़ोतरी नहीं, बल्कि एक बड़े वित्तीय फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
बजट 2026 में सरकार की रणनीति
ICRA का मानना है कि सरकार आने वाले खर्च को बैलेंस करने के लिए FY2027 में पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) पहले ही बढ़ा सकती है। अनुमान है कि कैपेक्स करीब 14 फीसदी बढ़कर 13.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास योजनाएं तेज होंगी और बाद में वेतन-पेंशन के बोझ को संभालने में मदद मिलेगी।







