अयोध्या। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दो साल 22 जनवरी को पूरे हो जाएंगे। ऐतिहासिक अनुष्ठान के साथ जिस स्वप्न ने साकार रूप लिया था, वह आज पूर्ण भव्यता के साथ देश-दुनिया के सामने खड़ा है। इन दो वर्षों में न केवल मुख्य मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ, बल्कि राम जन्मभूमि परिसर 14 अन्य भव्य मंदिरों से सज्जित होकर एक विराट धार्मिक-सांस्कृतिक परिसर के रूप में विकसित हो चुका है।
अयोध्या में आस्था, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक बने राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूरे हो गए हैं। ऐसे में राम मंदिर निर्माण की यात्रा को जानना जरूरी हो उठता है। करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह मंदिर परिसर अब केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, स्थापत्य कौशल और आधुनिक सुविधाओं का अद्वितीय संगम बन गया है। राम मंदिर में बाल स्वरूप रामलला तो विराजमान हैं ही, अब प्रथम तल पर राम परिवार के भी दर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा 800 मीटर लंबा परकोटा भी बनकर तैयार हो गया है। परकोटा में छह देवी-देवताओं (भगवान शंकर, गणेश, सूर्य, हनुमान, माता भगवती, अन्नपूर्णा) के मंदिर भी आकार ले चुके हैं। इन मंदिरों ने परिसर की आध्यात्मिक गरिमा को और ऊंचाई दी है।
परिसर समरसता का भी संदेश देता नजर आता है। श्रीराम के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महर्षि वाल्मीकि, महर्षि विश्वामित्र, वशिष्ठ, अगस्त्य, निषादराज, अहिल्या व माता शबरी के भी मंदिर परिसर में बनकर तैयार हैं। हालांकि यह मंदिर अभी श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोले गए हैं।
दो साल के भीतर श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए आधुनिक दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, डिजिटल सूचना प्रणाली, सुगम मार्ग, प्रतीक्षालय, पेयजल, स्वच्छता और दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं विकसित की गई हैं। देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए रामनगरी अब सुव्यवस्थित और सुसज्जित धार्मिक नगरी के रूप में उभरी है।
राम मंदिर में मिल रही यह सुविधाएं
- 100 फीट चौड़ा राम जन्मभूमि पथ
- दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की सुविधा
- दर्शनपथ से लेकर राम मंदिर तक एलईडी टीवी
- दर्शनपथ पर स्थायी कैनोपी, वाटर प्लांट, शौचालय की व्यवस्था।
- श्रद्धालुओं के सामान व जूता-चप्पल जमा कराने के लिए लॉकर
- 25 हजार श्रद्धालुओं की क्षमता वाला तीर्थयात्री सुविधा केंद्र
- आधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल







