नई दिल्ली: पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC रेड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सीज मोबाइल फोन की जांच करने से रोकने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. यह मोबाइल फोन I-PAC के अधिकारी जितेंद्र मेहता का है, जो 8 जनवरी को रेड में ईडी ने जब्त किया था. ईडी ने जितेंद्र मेहता को पूछताछ के लिए शुक्रवार को हेडक्वार्टर बुलाया था.
जितेंद्र मेहता की तरफ से एडवोकेट सी. ए. सुंदरम मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच के सामने पेश हुए और उन्होंने कहा कि कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय को फोन ओपन करने से रोके क्योंकि यह जितेंद्र मेहता की प्राइवेसी का मामला है. उन्होंने जितेंद्र मेहता के मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए कहा कि मंगलवार को इस मामले की सुनवाई होनी है, तब तक ईडी को ऐसा करने से रोका जाए. एडवोकेट सुंदरम की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने उनसे पूछा, ‘आप इतना डर क्यों रहे हैं?’ मौलिक अधिकारों की बात पर कोर्ट ने कहा, ‘हम जानते हैं कि एक निर्दोष व्यक्ति की रक्षा कैसे की जाती है.’
8 जनवरी को ईडी ने दिल्ली और कोलकाता में I-PAC के ऑफिस और फर्म के को-फाउंडर प्रतीक जैन के घर पर रेड मारी थी. इस दौरान दिल्ली ऑफिस से जांच एजेंसी ने डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए थे, लेकिन कोलकाता में वह ऐसा नहीं कर सकी क्योंकि पश्चिम बंगाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं, जिसकी वजह से रेड रोक दी गई. ईडी का कहना है कि जांच के दौरान एजेंसी ने जो दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए थे, वो ममता बनर्जी ने अधिकारियों से ले लिए थे.
सुप्रीम कोर्ट में I-PAC रेड मामले को लेकर सुनवाई चल रही है. ईडी ने याचिका दाखिल करके सीबीआई जांच की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि ममता बनर्जी ने बंगाल पुलिस के आला अधिकारियों के साथ जांच की जगह पहुंचकर छापेमारी में बाधा डाली है. कानूनी कार्रवाई को बाधित करना गंभीर संज्ञेय अपराध है. चूंकि, पुलिस के बड़े अधिकारी खुद इस घटना में शामिल हैं इसलिए, मामले में सीबीआई से केस दर्ज करने को कहा जाए.
15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इस पर सुनवाई जरूरी है. कोर्ट ने इसे लेकर राज्य सरकार, मुख्यमंत्री और पुलिस के आला अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया है. ईडी की तरफ से सुनवाई में यह भी कहा गया कि ममता बनर्जी पहले भी केंद्रीय जांच एजेंसियों के कामकाज में सीधे दखल देती रही हैं, जिसमें राज्य पुलिस के बड़े अधिकारी उनकी मदद करते हैं. उन्होंने राज्य के डीजीपी राजीव कुमार, कोलकाता के पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा और साउथ कोलकाता के डीसीपी प्रियब्रत रॉय के निलंबन की मांग की. कोर्ट ने इस मांग पर भी नोटिस जारी किया है.







