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भारत-EU ट्रेड डील से इन राज्यों की लगेगी महा-लॉटरी!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 27, 2026
in राज्य, व्यापार
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free trade
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नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय यूनियन ने भारत-यूरोपीय यूनियन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है, जिसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है. यह समझौता अस्थिर वैश्विक वातावरण और वाशिंगटन की टैरिफ पॉलिसी के कारण उत्पन्न व्यापार बाधाओं के बीच हुआ है. इस एफटीए से यूरोपीय यूनियन को भारत के निर्यात में 64 लाख करोड़ रुपए का इजाफा होने का अनुमान है.

साथ ही भारत के एसएमई, मेकर्स, किसानों और पेशेवरों के लिए यूरोपीय यूनियन के बाजार खुलेंगे. इसमें 9,425 टैरिफ लाइनों को समाप्त करने का प्रस्ताव है, जिससे कपड़ा, परिधान, चमड़ा, रत्न और आभूषण, हस्तशिल्प, चाय, मसाले और समुद्री उत्पाद जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के साथ-साथ इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल इक्विपमेंट्स सहित हाई टेक एक्सपोर्ट के लिए बाजार पहुंच में वृद्धि होगी.

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इन तमाम बातों के बीच एक खास बात तो ये है कि इस एफटीए से कई राज्यों की महा-लॉटरी लगने वाली है. इसका कारण भी है. जानकारों का अनुमान है कि इस डील से बड़े राज्यों के अलावा छोटे राज्यों को बड़ा फायदा हो सकता है. यूपी से लेकर ​तमिलनाडु तक देश के एक दर्जन से ज्यादा छोटे और बड़े राज्य एक्सपोर्ट किंग बनने की राह में जुट जाएंगे. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर इस डील से कौन से राज्यों को कितना फायदा होने जा रहा है.

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में यूरोपीय यूनियन के बाजारों से मजबूत मांग के चलते बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई दोनों के लिए ऑर्डर में वृद्धि देखने को मिलेगी. 99.6 फीसदी एक्सपोर्ट पर टैरिफ घटकर शून्य हो जाने से (वस्त्रों पर 12 फीसदी और इलेक्ट्रॉनिक्स पर 14 फीसदी से घटकर शून्य होने से) इचलकरंजी के वस्त्र निर्माताओं और पुणे के इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा सेक्टर्स क्षेत्रों जैसे समूहों को ऑर्डर बढ़ाने और यूरोपीय यूनियन की सप्लाई चेन के साथ एकीकरण को मजबूत करने का अवसर मिलेगा. ठाणे-रायगढ़ से दवा निर्यात और मुंबई से रत्न एवं आभूषण निर्यात को भी लाभ होगा, जिससे श्रम-प्रधान और हाई वैल्यू वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

गुजरात

गुजरात को अपने निर्यात-आधारित औद्योगिक क्षेत्र से लाभ होगा, जहां बड़े उद्यम और एमएसएमई विक्रेता एक ही सप्लाई चेन में काम करते हैं. सूरत में वस्त्र, हीरा और आभूषण का उत्पादन बढ़ने की संभावना है, जबकि भरूच-वडोदरा में कैमिकल्स के निर्यात में वृद्धि हो सकती है क्योंकि यूरोपीय यूनियन को निर्यात होने वाले 97.5 फीसदी कैमिकल्स पर टैरिफ 12.8 फीसदी से घटकर 0 फीसदी हो गया है. वहीं, राजकोट को इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स के एक्सपोर्ट में वृद्धि से लाभ होने की संभावना है, और वेरावल को समुद्री निर्यात में वृद्धि से लाभ होने की संभावना है जो तटीय आजीविका और प्रोसेसिंग यूनिट्स को फायदा पहुंचाएगा.

तमिलनाडु

तमिलनाडु में श्रम-प्रधान उद्योग समूहों के लिए तत्काल विकास की अपार संभावनाएं हैं, जो पहले से ही वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं. तिरुप्पुर से परिधान निर्यात में प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि होने वाली है, क्योंकि वस्त्रों पर शुल्क 12 फीसदी से घटकर शून्य हो गया है. वहीं, वेल्लोर-अंबूर सेक्टर के चमड़ा और जूते निर्यातकों को यूरोपीय यूनियन के बाज़ार में शुल्क में भारी कमी (17 फीसदी से घटकर शून्य) का लाभ मिलेगा. इसके साथ ही, चेन्नई और कोयंबटूर में इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स से निर्यात में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे एमएसएमई सप्लायर्स से लेकर बड़े निर्माताओं तक की पूरी वैल्यू चेन मजबूत होगी.

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल को चाय, तटीय उत्पादन और हस्तशिल्प से जुड़े क्षेत्रों में आजीविका को सीधे तौर पर लाभ मिलने की संभावना है. उत्तरी बंगाल यूरोपीय बाज़ारों में तरजीही पहुंच का लाभ उठाकर दार्जिलिंग चाय के निर्यात को मजबूत कर सकता है. दीघा और हल्दिया से समुद्री खाद्य पदार्थों, जैसे झींगा और जमी हुई मछली, जिन पर वर्तमान में 26 फीसदी तक शुल्क लगता है, को यूरोपीय यूनियन के बाज़ारों में तरजीही पहुंच मिलेगी. पारंपरिक हस्तशिल्प को बेहतर पहुंच से लाभ होगा, जिससे छोटे उत्पादकों और लोकल प्रोडक्ट्स को फायदा होगा.

असम

असम में किसानों और कारीगरों के लिए यूरोपीय यूनियन के प्रीमियम बाजारों तक सीधी पहुंच है, जहां ब्रांड आधारित निर्यात की अपार संभावनाएं हैं. डिब्रूगढ़-जोरहाट चाय निर्यात में विस्तार हो सकता है, वहीं ऊपरी असम के मसालों को बेहतर पहुंच और अधिक मूल्य मिलने से लाभ होगा. बारपेटा और नलबाड़ी में बांस आधारित फर्नीचर और हस्तशिल्प का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की अच्छी संभावना है, साथ ही अधिक पूर्वानुमानित बाजार पहुंच के कारण विशिष्ट दवा निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा.

केरल

केरल को खाद्य और मसालों की हाई डिमांड वाली कैटेगरीज से फायदा होगा, जो किसानों और मछुआरों की आय से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं. कोच्चि और अलाप्पुझा में प्रोसेसिंग यूनिट्स और बंदरगाह से जुड़ी रसद का समर्थन करने वाले यूरोपीय यूनियन के बाजारों तक तरजीही पहुंच के माध्यम से झींगा और टूना निर्यात में विस्तार हो सकता है. इडुक्की और वायनाड को काली मिर्च और इलायची जैसे मसालों से लाभ होगा, जिन्हें व्यापक यूरोपीय संघ के बाजार तक बढ़ी हुई पहुंच से फायदा होगा.

कर्नाटक

कर्नाटक एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सर्विस के माध्यम से तरजीही पहुंच को विकास में बदलने के लिए अच्छी स्थिति में है. बेंगलुरु-तुमकुरु सेक्टर से इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स के निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है, जिसे घटक और सहायक लघु एवं मध्यम उद्यमों के मजबूत इकोसिस्टम का का समर्थन प्राप्त है. बेंगलुरु के परिधान निर्यातकों को भी लाभ होगा, जिससे श्रम-प्रधान मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ हाई स्किल वाले सेक्टर्स में रोजगार सृजन में मदद मिलेगी.

आंध्र प्रदेश

यूरोपीय यूनियन की बढ़ती मांग और वैल्यू ​एडिशन के कारण आंध्र प्रदेश की तटीय निर्यात इकोनॉमी को मजबूत लाभ मिलने की संभावना है. विशाखापत्तनम और काकीनाडा में झींगा और समुद्री भोजन के निर्यात में उछाल आने की उम्मीद है, जिससे मत्स्य पालन, प्रोसेसिंग और कोल्ड-चेन सेक्टर्स में रोजगार सृजित होंगे. वहीं, विशाखापत्तनम के फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी विस्तार होने की संभावना है.

तेलंगाना

तेलंगाना को वस्त्र और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स के संतुलित संयोजन से लाभ मिलता है. हैदराबाद-वारंगल वस्त्र और परिधान निर्यात का विस्तार कर सकते हैं, जिससे एमएसएमई और श्रम-प्रधान इकाइयों में रोजगार को बढ़ावा मिलेगा. हैदराबाद फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा उपकरण और इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में वृद्धि के लिए भी तैयार है, जिससे हाई वैल्यू वाली ग्लोबल सप्लाई चेन में राज्य की भूमिका मजबूत होगी.

पंजाब

पंजाब को उन सेक्टर्स से लाभ मिलता है जहां एमएसएमई का वर्चस्व है और रोजगार घनत्व अधिक है. लुधियाना वस्त्र और बुनाई के निर्यात का विस्तार कर सकता है, जबकि जालंधर यूरोपीय यूनियन के बाजारों में खेल वस्तुओं की पहुंच बढ़ाने के लिए तैयार है. मंडी गोबिंदगढ़ की लाइट इंजीनियरिंग यूनिट्स को भी इससे लाभ होगा, जिससे औद्योगिक रोजगार और सहायक सप्लाई चेन मजबूत होंगी.

राजस्थान

राजस्थान को श्रम-प्रधान शिल्प और मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप्स से लाभ होगा जो निर्यात के लिए तैयार हैं लेकिन अक्सर बाजार पहुंच की कमी से जूझते हैं. जयपुर के आभूषण निर्यात में वृद्धि की उम्मीद है, जबकि जोधपुर यूरोपीय संघ के साथ मजबूत संपर्क स्थापित करके लकड़ी के फर्नीचर और हस्तशिल्प का विस्तार कर सकता है. चूरू के खेल के सामान, बंधेज जैसे वस्त्र और चमड़े के सामान को भी लाभ होगा, जिससे लघु एवं मध्यम उद्यमों और कारीगर समुदायों को व्यापक लाभ मिलेगा.

उत्तर प्रदेश

चमड़े और शिल्प में श्रम-प्रधान आधार के कारण उत्तर प्रदेश रोजगार सृजन के सबसे बड़े संभावित केंद्रों में से एक है. कानपुर और आगरा के चमड़े के जूते निर्यातक निर्यात बढ़ा सकते हैं, जबकि सहारनपुर फर्नीचर और हस्तशिल्प निर्यात से लाभान्वित होगा. नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और वेस्ट यूपी के कृषि उत्पादों को भी लाभ होगा, जिससे राज्य के निर्यात का दायरा बढ़ेगा.

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