प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली: दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक और दर्दनाक हादसे ने राजधानी की बदहाल सड़कों और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी। एक बाइक सवार युवक की खुले गड्ढे में गिरने से मौत हो गई, जबकि उसका परिवार पूरी रात बेटे को खोजने के लिए दर्जनभर थानों के चक्कर काटता रहा।
परिजनों का आरोप है कि “युवक के लापता होने की सूचना देने के बावजूद पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई ठोस मदद नहीं मिली। सुबह करीब 7 बजे पुलिस का फोन आया, जिसमें युवक का शव मिलने की जानकारी दी गई। तब जाकर परिवार को पता चला कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा।
दिल्ली जल बोर्ड के काम के दौरान खोदा गया था गड्ढा
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां दिल्ली जल बोर्ड का काम चल रहा था। सड़क को खोदकर गड्ढा बनाया गया था, लेकिन कोई चेतावनी बोर्ड नहीं, कोई बैरिकेडिंग नहीं, कोई लाइट या सुरक्षा इंतज़ाम नहीं। रात के अंधेरे में बाइक सवार युवक सीधे उसी गड्ढे में जा गिरा और उसकी जान चली गई।
मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में हादसा, फिर भी बेपरवाही
हैरानी की बात यह है कि यह हादसा कैबिनेट मंत्री आशीष सूद की विधानसभा क्षेत्र में हुआ है। सवाल यह है कि “क्या मंत्री के क्षेत्र में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है? क्या सड़क खोदने के बाद उसे सुरक्षित करना अब किसी की जिम्मेदारी नहीं रह गई है?
परिजनों और स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। वे दोषी अधिकारियों और संबंधित विभागों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
नोएडा हादसे से क्या सरकार ने कुछ नहीं सीखा ?
यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है, जब हाल ही में नोएडा में भी गड्ढे और निर्माण कार्य की लापरवाही के कारण जानलेवा हादसा हुआ था। बार-बार सवाल उठता है— क्या हर हादसे के बाद सिर्फ जांच के आदेश ही दिए जाएंगे? क्या किसी की मौत के बाद ही प्रशासन जागेगा ? क्या सड़कें पहले मौत का जाल बनेंगी और फिर मुआवजे से मामला शांत होगा ? दिल्ली और एनसीआर में गड्ढों से हो रही मौतें अब इत्तेफाक नहीं, सिस्टम की नाकामी बन चुकी हैं।
प्रशासन और सरकार से सवाल
गड्ढा खोदने की अनुमति किसने दी और सुरक्षा इंतज़ाम क्यों नहीं किए गए ? रात में गश्त कर रही पुलिस या निगम की टीम को यह खुला गड्ढा क्यों नहीं दिखा ? लापता युवक की शिकायत पर परिवार को रातभर भटकने क्यों दिया गया ?क्या जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर एफआईआर और निलंबन होगा?
कब रुकेगा यह मौत का सिलसिला ?
जनकपुरी का यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि शासन-प्रशासन के दावों पर बड़ा सवाल है। जब राजधानी और स्मार्ट सिटी कहे जाने वाले इलाकों में सड़कें सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक आखिर जाए तो जाए कहां ? अब देखना यह है कि सरकार इस मौत को भी “दुर्घटना” कहकर भूल जाती है या सच में जिम्मेदारों पर कार्रवाई करती है।







