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Home राष्ट्रीय

अंतरिक्ष में भारत का पहला डेटा सेंटर, बदल जाएगा टेक का खेल

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 23, 2026
in राष्ट्रीय
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नई दिल्ली। भारत अब अंतरिक्ष और AI के क्षेत्र में एक नया कदम उठाने जा रहा है. भारतीय स्पेस कंपनी Agnikul Cosmos और AI क्लाउड कंपनी NeevCloud मिलकर अंतरिक्ष में भारत का पहला AI डेटा सेंटर भेजने की तैयारी कर रही हैं.

यह डेटा सेंटर पृथ्वी के पास की कक्षा में लगाया जाएगा. कंपनियों ने कहा है कि इसका पहला टेस्ट 2026 के अंत तक हो सकता है. अगर यह टेस्ट सफल रहा तो आने वाले समय में यह तकनीक बड़े स्तर पर इस्तेमाल की जा सकती है.

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NeevCloud ने बताया कि तैयारी पूरी हो चुकी है और प्रोटोटाइप जल्द ही स्पेस में भेजा जाएगा. AI Impact Summit 2026 में इन दोनों कंपनियों ने एक मॉडल पेश किया था. यहां ये दिखाया गया कि कैसे कंपनी स्पेस में डेटा सेंटर लगाने की तैयारी कर रही है.

गौरतलब है कि अमेरिकी अरबपति एलॉन मस्क भी SpaceX के जरिए स्पेस में डेटा सेंटर सेटअप करने की तैयारी में हैं. हालांकि अभी तक पायलट और डेमो स्टेज तक ही हैं और इस साल के आखिर तक प्रोटोटाइप भेजे जाने की प्लानिंग है.

स्पेस में डेटा सेंटर के फायदे

अभी जो बड़े डेटा सेंटर होते हैं, वे जमीन पर बने होते हैं. यहां पर बड़े कंप्यूटर और सर्वर रखे जाते हैं. इन्हीं से इंटरनेट और AI से जुड़े काम होते हैं. लेकिन इन डेटा सेंटरों को चलाने में बहुत खर्च आता है. बिजली ज्यादा लगती है. इन्हें ठंडा रखने के लिए भी काफी सिस्टम चाहिए. जगह भी बहुत लेनी पड़ती है. इसी वजह से कंपनियां अब सोच रही हैं कि डेटा सेंटर को अंतरिक्ष में भेजा जाए.

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर होने का मतलब है कि AI से जुड़ा काम ऊपर ही होगा. डेटा वहीं प्रोसेस होगा. इससे डेटा को ऊपर भेजने और नीचे लाने में लगने वाला समय कम हो सकता है. कंपनियों का कहना है कि इससे AI से जुड़ी सेवाएं तेज हो सकती हैं. साथ ही खर्च भी कुछ हद तक कम हो सकता है.

Agnikul और NeevCloud मिल कर करेंगे ये काम

Agnikul Cosmos चेन्नई की कंपनी है. यह रॉकेट और स्पेस टेक पर काम करती है. कंपनी का मकसद है कि अंतरिक्ष में जाने का खर्च कम किया जाए. ताकि छोटे मिशन भी आसानी से भेजे जा सकें. आने वाले समय में इसके रॉकेट से कई छोटे प्रयोग अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे.

NeevCloud एक भारतीय AI और क्लाउड कंपनी है. यह AI से जुड़े काम करती है. जैसे डेटा प्रोसेस करना और AI मॉडल चलाना. कंपनी का दावा है कि उसकी तकनीक से AI काम तेज होता है. Agnikul और NeevCloud साथ मिलकर यह देखना चाहते हैं कि क्या AI का काम अंतरिक्ष से किया जा सकता है.

कंपनियों का कहना है कि अंतरिक्ष में सूरज की रोशनी सीधे मिलती है. इससे बिजली बनाने में मदद मिलेगी. वहां का माहौल ठंडा होता है. इसलिए मशीनों को ठंडा रखने में कम खर्च आएगा. इसी वजह से अंतरिक्ष में डेटा सेंटर चलाना जमीन की तुलना में सस्ता पड़ सकता है.

इस प्रोजेक्ट में पहले एक छोटा सिस्टम अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. उसी से टेस्ट किया जाएगा. इसमें कंप्यूटर और डेटा रखने की मशीनें होंगी. यह सिस्टम कक्षा में घूमते हुए काम करेगा. इससे कंपनियां समझेंगी कि अंतरिक्ष में डेटा सेंटर चलाना कितना सही है और इसमें क्या दिक्कतें आ सकती हैं.

2026 के आखिर तक भेजा जाएगा प्रोटोटाइप

कंपनियों के मुताबिक पहला टेस्ट 2026 के अंत तक किया जाएगा. अगर यह सही से चला तो बाद में इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाएगा. शुरुआत में इसका इस्तेमाल सीमित रहेगा. धीरे धीरे इसका दायरा बढ़ाया जाएगा.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह एक बड़ा नया प्रयोग है. अगर यह कामयाब हुआ तो आने वाले समय में AI के काम करने का तरीका बदल सकता है. आज जो काम जमीन पर बने डेटा सेंटर करते हैं, वही काम ऊपर से भी हो सकेगा. इससे AI से जुड़ी सेवाएं और बेहतर हो सकती हैं.

भारत पिछले कुछ सालों में स्पेस और AI दोनों में आगे बढ़ा है. यह प्रोजेक्ट उसी दिशा में अगला कदम माना जा रहा है. इससे भारत को दुनिया में नई पहचान मिल सकती है. इससे यह भी दिखेगा कि भारत नई तकनीक पर काम करने के लिए तैयार है.

दुनिया की बड़ी कंपनियां भी स्पेस से इंटरनेट और डेटा सेवा देने पर काम कर रही हैं. लेकिन पूरी तरह से AI डेटा सेंटर को अंतरिक्ष में चलाने का काम अभी किसी ने बड़े स्तर पर नहीं किया है. ऐसे में भारत का यह कदम खास माना जा रहा है.

यह प्रोजेक्ट भारत के लिए एक बड़ा कदम है. अगर 2026 का टेस्ट सफल रहा तो आगे चलकर भारत अंतरिक्ष से AI सेवाएं देने वाले देशों में शामिल हो सकता है. इससे देश की तकनीक को नई दिशा मिलेगी.

स्पेस में डेटा सेंटर कैसे लगेगा

डेटा सेंटर को एक छोटे बॉक्स या मॉड्यूल की तरह तैयार किया जाएगा. इसमें कंप्यूटर, सर्वर और जरूरी मशीनें होंगी. इस मॉड्यूल को रॉकेट से पृथ्वी के पास वाली कक्षा में भेजा जाएगा. रॉकेट इसे ऊपर छोड़ देगा और यह वहां घूमता रहेगा. इसे इस तरह बनाया जाएगा कि यह लंबे समय तक अंतरिक्ष में सुरक्षित रहे और काम करता रहे

काम कैसे करेगा

इस मॉड्यूल में लगे कंप्यूटर AI से जुड़े काम करेंगे. नीचे जमीन से जब कोई डेटा भेजा जाएगा तो वह ऊपर इस सिस्टम तक पहुंचेगा. वहां डेटा प्रोसेस होगा और जवाब वापस जमीन पर आएगा. चूंकि सिस्टम हमेशा कक्षा में रहेगा इसलिए बार बार भेजने और लाने की जरूरत नहीं होगी. इससे AI से जुड़ी सेवाएं तेज हो सकती हैं

यह आसान कैसे होगा

अंतरिक्ष में सूरज की रोशनी सीधे मिलती है जिससे बिजली बनाने में मदद मिलेगी. वहां का माहौल ठंडा होता है इसलिए मशीनों को ठंडा रखने में कम खर्च आएगा. जमीन पर जैसे बड़े कमरे, एसी और भारी बिजली की जरूरत होती है वैसी जरूरत यहां कम होगी. इसी वजह से लंबे समय में यह तरीका आसान और कम खर्च वाला बन सकता है.

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